शुक्रवार, 25 जुलाई, 2014 | 23:47 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    विपक्ष के नेता के पद की हकदार नहीं कांग्रेसः अटॉर्नी जनरल सीपीपी बैठक के लिए अकेले पहुंचीं सोनिया, बैठक थी ही नहीं मलाइका की चांदी के बाद अभिनव ने दिलाया सोना मलाइका की चांदी के बाद अभिनव ने दिलाया सोना मलाइका की चांदी के बाद अभिनव ने दिलाया सोना 10 मीटर एयर राइफल में बिंद्रा ने जीता स्वर्ण पदक 10 मीटर एयर राइफल में बिंद्रा ने जीता स्वर्ण पदक 10 मीटर एयर राइफल में बिंद्रा ने जीता स्वर्ण पदक उत्तर प्रदेश में वायुसेना का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, सात मरे उत्तर प्रदेश में वायुसेना का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, सात मरे
 
सौमित्र चटर्जी को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:23-03-12 08:10 PM
 imageloadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ-

बंगला फिल्मों के मशहूर अभिनेता सौमित्र चटर्जी को भारतीय सिनेमा के सबसे बडे सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित करने की शुक्रवार को यहां औपचारिक तौर पर घोषणा कर दी गयी।

इस बारे में खबर हालांकि दो दिन पहले ही आ गयी थी लेकिन आज सरकार ने इसकी विधिवत घोषणा की। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक चटर्जी को यह पुरस्कार 2011 के लिए दिया जाएगा । उनके नाम का प्रस्ताव पांच सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया। उन्हें यह पुरस्कार 59वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जायेगा।

लगभग एक दशक पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ठुकराने वाले 77 वर्षीय अभिनेता सौमित्र चटर्जी दादा साहब फाल्के पुरस्कार पाकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं और उनका मानना है कि इस पुरस्कार ने देशवासियों पर उनके भरोसे को सही साबित किया है।

इस अभिनेता ने कोलकाता से बातचीत में कहा है कि मैं बहुत खुश हूं और अच्छा लग रहा है। कम से कम यह पुरस्कार तो किसी तरह की राजनीति से परे था। इससे देशवासियों पर मेरा भरोसा सही साबित हुआ है। मैं पिछले 50 से भी ज्यादा साल से काम कर रहा हूं और मुझे खुशी है कि मेरे काम को सराहा गया।

दादा साहब फाल्के पुरस्कार ज्यूरी ने प्राण, मनोज कुमार और वैजंतीमाला पर तरजीह देकर इस साल सिनेमा के इस सर्वोच्च पुरस्कार के लिए चटर्जी को चुना। चटर्जी ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समिति पर पक्षपात का आरोप लगाकर 2001 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का विशेष ज्यूरी पुरस्कार ठुकरा दिया था।

सौमित्र चटर्जी ने 1959 में महान फिल्मकार सत्यजीत राय की सुपरहिट फिल्म अपूर संसार के जरिए फिल्मों में पदार्पण किया था। वह सोनार केला, चारुलता, घरे-बाहिरे जैसी उनकी क्लासिक फिल्मों के मुख्य अभिनेता रहे। उन्होंने तपन सिन्हा और मृणाल सेन जैसे समानांतर सिनेमा के दो अन्य दिग्गजों के साथ भी काम किया।

इस मुकाम पर पहुंचने के लिये चटर्जी राय को श्रेय देने से नहीं चूकते। उन्होंने कहा, जो कुछ भी मैं आज हूं वह राय की बदौलत ही हूं। यदि निर्देशक उनके जैसा महान कलाकार नहीं होता तो मैं शायद अच्छा अभिनय नहीं कर पाता।

उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि बंगाल में सिनेमा खत्म हो रहा है लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता। कई बार हमारे आसपास काफी प्रतिभाशाली लोग होते हैं, लेकिन हम उन्हें देख नहीं पाते। हमारे यहां भी कई प्रतिभाशाली फिल्मकार हैं, हालांकि मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता।

इस वयोवृद्ध अभिनेता ने कहा कि मुझे यकीन है कि सिनेमा का भविष्य उज्जवल है। अतीत में जो था, वैसा तो नहीं हो सकता लेकिन तकनीकी प्रगति के बावजूद सिनेमा की आत्मा नहीं मरी है।

पांच दशक से अधिक समय तक फैले अपने करियर के दौरान चटर्जी ने 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। उनकी कुछ प्रमुख फिल्मों में क्षुधितो पाषान, तीन कन्या, चारूलता, कापुरूष, आकाश कुसुम, अरण्येर दिन रात, अशनी संकेत, सोनार केल्ला, जय बाबा फेलूनाथ, हीरक राजार देश, घरे बाहिरे और गणशत्रु हैं।

चटर्जी को वर्ष 2007 में पदक्षेप फिल्म में उनके अभिनय के लिये श्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और इससे पूर्व वर्ष 2000 में दैखा फिल्म में अभिनय के लिये श्रेष्ठ अभिनेता के विशेष ज्यूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

रंगमंच के प्रति अपने जुनून के लिए विख्यात पद्म भूषण पुरस्कार प्राप्त चटर्जी ने कहा कि रंगमंच उनका पहला प्यार है। उन्होंने कहा कि मुझे नाटकों का निर्देशन करना सबसे ज्यादा पसंद है। निर्देशन और एक नाटक को रंगमंच पर प्रस्तुत करना मुझे सबसे ज्यादा रोमांचित करता है।

चटर्जी हिन्दी फिल्में नहीं देखते लेकिन श्याम बेनगल का काम उन्हें पसंद है। उन्होंने कहा, मैं बॉलीवुड फिल्में नहीं देखता लेकिन श्याम बेनगल ने मुझे काफी प्रभावित किया। वह अपने फन के उस्ताद हैं। उन्होंने कहा कि मुझे मुख्यधारा के सिनेमा से कोई परेशानी नहीं बल्कि मेरा मानना है कि ये काफी सशक्त माध्यम है। मसलन शोले अच्छे फिल्म निर्माण का उम्दा उदाहरण है।

चटर्जी की प्रतिभा केवल सिनेमा जगत तक ही सीमित नहीं है। उनकी कविताओं की एक दजर्न से अधिक पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं। वह कविता पाठ में भी माहिर हैं। इसके अलावा उनकी गिनती अच्छे वक्ताओं में होती है।

 
 imageloadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ- share  स्टोरी का मूल्याकंन
 
टिप्पणियाँ
 

लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें

आज का मौसम राशिफल
अपना शहर चुने  
धूपसूर्यादय
सूर्यास्त
नमी
 : 05:41 AM
 : 06:55 PM
 : 16 %
अधिकतम
तापमान
43°
.
|
न्यूनतम
तापमान
24°