मंगलवार, 07 जुलाई, 2015 | 10:17 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    बरमूडा ट्राइएंगल की तरह हो चुका है व्यापमं, राज जानने वाला नहीं बचता जिन्दा ग्वालियर-चंबल से जुड़े हैं व्यापमं के तार, इलाके से अब तक 21 लोगों की मौत ढाई करोड़ का फ्रॉड कर बन गया था बाबा, दस साल बाद चढ़ा सीबीआई के हत्थे व्यापमं में हो रही मौतों पर बोलीं उमा भारती: मंत्री हूं लेकिन फिर भी लगता है डर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने विश्वासपात्रों को पार्टी में दी महत्वपूर्ण भूमिका यूपी के बाराबंकी में पुलिसवालों ने थाने में महिला को जिंदा फूंका वनडे मैचों में 5000 रन बनाने वाली दुनिया की दूसरी क्रिकेटर बनीं मिताली चीन ने विज्ञापन में दिखाई भारतीय शहरों में गंदगी  VIDEO: आकाशवाणी दिल्ली परिसर में सिपाही पर गोलीबारी कुंआरी मां बन सकती है बच्चे की अभिभावक
गुरु के सामने कभी बैठते नहीं थे महेंद्र कपूर
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:08-01-13 05:28 PM
Image Loading

भारत की जीवंत आवाज कहलाने वाले महेंद्र कपूर अपने गुरुओं को बहुत सम्मान देते थे और कभी अपने गुरु के सामने बैठते नहीं थे, अगर कभी बैठना पड़ा तो वह जमीन पर बैठते थे।

सुगम संगीत की कलाकार देवयानी झा ने बताया कि पंजाब के अमृतसर में जन्मे महेंद्र कपूर ने मुंबई आकर शास्त्रीय गायकों पंडित हुसनलाल, पंडित जगन्नाथ बुआ, उस्ताद नियाज अहमद खान, उस्ताद अब्दुल रहमान खान और पंडित तुलसीदास शर्मा से शास्त्रीय संगीत सीखा था।

पंडित हुसनलाल के पसंदीदा शिष्यों में से एक महेंद्र कपूर की एक खासियत थी, वह अपने गुरु के आगे कभी बैठते नहीं थे और अगर कभी बैठना पड़ा तो वह जमीन पर बैठते थे। वह कहते थे गुरु का दर्जा बहुत ऊपर होता है। उसके समकक्ष बैठने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

उन्होंने बताया कि शुरू में महेंद्र कपूर, मोहम्मद रफी से प्रभावित थे और उनकी शैली के गाने उन्हें अच्छे लगते थे। बाद में उन्होंने अपनी शैली विकसित की और मेट्रो मरफी की अखिल भारतीय गायन स्पर्धा जीत कर पाश्र्वगायन के क्षेत्र में प्रवेश किया। पाश्र्वगायक के रूप में उनकी पहली फिल्म 1958 में वी शांताराम की नवरंग थी जिसमें उन्होंने आधा है चंद्रमा गीत गया। इसके लिए संगीत सी रामचंद्र ने दिया था। यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों का पसंदीदा गीत है।

महेंद्र कपूर बीआर चोपड़ा के पसंदीदा गायक थे। चोपड़ा की फिल्में धूल का फूल, गुमराह, वक्त, हमराज, धुंध के गीत आज भी लोकप्रिय हैं और उन्हें संगीत प्रेमी महेंद्र कपूर की खनकती आवाज की वजह से खास तौर पर याद करते हैं। जब बीआर चोपड़ा ने 1988 में छोटे पर्दे पर महाभारत धारावाहिक पेश किया तो उसके शीर्षक गीत के लिए उनकी पहली पसंद महेंद्र कपूर ही थे।

इस धारावाहिक में चोपड़ा के पुत्र रवि चोपड़ा के सहायक रहे राजन शिवहरे ने बताया जब बीआर चोपड़ा ने महेंद्र कपूर को बताया कि वह महाभारत पर सीरियल बना रहे हैं और उन्हें (महेंद्र कपूर को) उसमें आवाज देनी है तो महेंद्र कपूर ने चोपड़ा से कोई सवाल नहीं किया और सीधे हामी भर दी। यहां तक कि पारिश्रमिक के बारे में भी महेंद्र कपूर ने चोपड़ा से कुछ नहीं पूछा।

वर्ष 1988 से 1990 तक इस धारावाहिक की 94 कड़ियां प्रसारित हुईं और 45 मिनट की प्रत्येक कड़ी की शुरुआत महेंद्र कपूर की खनकती आवाज में महाभारत के उद्घोष से होती थी। आज भी शीर्षक गीत के साथ उनके स्वर में निकले गीता के श्लोक यदा यदा ही धर्मस्य.. लोगों को याद हैं।

हिन्दी फिल्मों के अलावा गुजराती, पंजाबी और मराठी गीतों को भी महेंद्र कपूर ने स्वर दिया था। नौ जनवरी 1934 को जन्मे महेंद्र कपूर ने 27 सितंबर 2008 को अंतिम सांस ली।

 

 
 
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
Image Loadingवनडे मैचों में 5000 रन बनाने वाली दुनिया की दूसरी क्रिकेटर बनीं मिताली
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने सोमवार को एकदिवसीय क्रिकेट में 5000 रन पूरे कर लिए। इस मुकाम पर पहुंचने वाली वह भारत की पहली और विश्व की दूसरी बल्लेबाज हैं।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड