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फिल्म समीक्षा: इस स्मर्फीगंज मोहल्ले में बच्चों को ही भेजें तो ठीक!

फिल्म समीक्षा: इस स्मर्फीगंज मोहल्ले में बच्चों को ही भेजें तो ठीक!

स्टार- 2

मशरूम के अंदर रहने वाले नीले रंग के अतरंगी जीवों स्मर्फ्स की ताजातरीन कहानी फिल्म ‘स्मर्फ्स दि लॉस्ट विलेज’ के रूप में एक बार फिर आप सबके सामने है। शायद सोनी पिक्चर्स एनिमेशन जैसे हॉलीवुड के प्रोडक्शन हाउसेज तक भी यह बात पहुंच चुकी है कि इन दिनों बॉलीवुड में महिला प्रधान फिल्मों का दौर चल रहा है।

उन्होंने सोचा हम भी पीछे क्यों रहें, और उन्होंने बना डाली नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए यह फिल्म जिसकी हीरोइन है एक लड़की स्मर्फ यानी ‘स्मर्फेट’। यह फिल्म जितना एडवेंचर की बात करती है, उतना ही स्मर्फेट की ‘खुद को पहचानने’ की तलाश भी है।

सिर्फ छोटे बच्चों के लिए ही है ये फिल्म

इसके आगे कुछ भी कहने से पहले यह बता देना मुनासिब होगा कि यह फिल्म छोटे नहीं... बहुत छोटे बच्चों के लिए बनाई गई है और अगर आप इतने बड़े हैं कि यह समीक्षा पढ़ने में रुचि रखते हैं तो जान लीजिए कि यह फिल्म आपके लिए नहीं है। 

जिन बच्चों ने बहुत सारी एनिमेशन फिल्में पहले से देख रखी हैं, उन्हें भी इस फिल्म के पसंद आने की गुंजाइश बहुत कम है। अगर यह फिल्म 80 या 90 के दशक में रिलीज हुई होती, तो हो सकता है कि इसे पसंद किया जाता, पर आज के दौर में ऐसा संभव नहीं लगता।

अगर आपके परिवार का कोई बहुत छोटा बच्चा है जो स्मर्फाहॉलिक (इन नीले जीवों का फैन) है, तो बेहतर होगा कि उसके साथ जाने वाला बड़ा व्यक्ति अपने व्यक्तिगत मनोरंजन की उम्मीद न रखे। हो सके तो पॉपकॉर्न और कोल्डड्रिंक का बड़ा कॉम्बो लेकर जाए ताकि आपके पास हॉल के अंदर करने के लिए कम से कम कुछ तो हो!

जानें कैसी है कहानी

फिल्म शुरू होती है स्मर्फीगंज नाम के मोहल्ले में रहने वाले स्मर्फ की धमाचौकड़ी से। यहां के हर स्मर्फ्स की आदतें ही उसकी पहचान हैं। फिर चाहे वह डोले-शोले बनाने वाला हेफ्टी हो, अनोखे प्रयोग करते रहने वाला ब्रेनी हो या अस्त-व्यस्त रहने वाला क्लम्जी हो। 

स्मर्फेट इस मोहल्ले में रहने वाली इकलौती फीमेल स्मर्फ है जिसे एक जादूगर गारगैमेल ने मिट्टी से बनाया था ताकि वह उसे स्मर्फ्स की जासूसी कर सके, पर अब उसे स्मर्फ्स के मोहल्ले के लीडर पापा स्मर्फ ने जादू से एक बुरी स्मर्फ से एक अच्छी स्मर्फ बना दिया है।

एक दिन स्मर्फेट को क्लमजी, हेफ्टी और ब्रेनी के साथ खेलते समय एक अंजान स्मर्फ नजर आता है जिससे उन्हें पता लगता है कि उनके गांव के अलावा स्मर्फ्स का और भी कोई गांव है। 

बदकिस्मती से यह बात जादूगर गारगैमेल को भी पता लग जाती है और स्मर्फ्स के दूसरे अंजान गांव की तलाश में निकल पड़ता है। दूसरी तरफ स्मर्फेट, क्लमजी, हेफ्टी और ब्रेनी भी उस गांव की तलाश में निकल पड़ते हैं ताकि वे उन्हें गारगैमेल के खतरनाक इरादों से आगाह कर सकें। 

दरअसल गारगैमेल स्मर्फ्स की जादुई शक्ति हासिल कर शक्तिशाली बनना चाहता है। स्मर्फ्स के नए गांव का रास्ता एक तिलिस्मी दुनिया से होकर जाता है जिसमें खतरनाक फूल हैं और जगमगाते हुए खरगोश भी। जादुई दुनिया से गुजर कर स्मर्फ्स के नए गांव तक पहुंचने के बाद चारों स्मर्फ्स को पता लगता है कि वहां सिर्फ फीमेल स्मर्फ्स ही रहती हैं जिनमें कई खूबियां हैं। कई रास्तों से गुजरते हुए कहानी की हैप्पी एंडिंग होती है।

फिल्म में कल्पनाशीलता की काफी कमी नजर आती है। अंजान गांव के स्मफ्र्स कैसे दिखते हैं, इसे लेकर कुछ रचनात्मक सोचा जा सकता था। फिल्म के 3डी एनिमेशन और स्पेशल इफेक्ट्स भी बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करते। कहानी, स्क्रीनप्ले, डायरेक्शन और म्यूजिक भी औसत है। नए गांव में रहने वाली फीमेल स्मफ्र्स की मुखिया स्मर्फ विलो के किरदार को आवाज दी है मशहूर एक्ट्रेस जूलिया रॉबट्रस ने जो काफी प्रभावी लगी है। 
 

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  • Web Title:smurfs the lost village review