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तीन फीसदी तक बढ़ेगी इंग्लिश की कटऑफ
रोहित पंवार से बातचीत
First Published:23-06-12 11:38 AM
नोवी कपाड़िया, एसोसिएट प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग, जीटीबी खालसा कॉलेज
केट का नतीजा होगा बड़ा फैक्टर
इंग्लिश ऑनर्स में दाखिले के लिए इस बार ज्यादा मारामारी देखने को मिलेगी। इसके तीन कारण है। पहला, इस बार केट का टॉप स्कोर 92.90 है। दूसरा, शीर्ष सौ में सबसे कम अंक पाने छात्र के भी 82.95 अंक है, इनमें 18 छात्र वे हैं जिन्होंने प्रवेश परीक्षा में बराबर अंक हासिल किए हैं। तीसरा, स्टीफंस में इंग्लिश ऑनर्स की कटऑफ 95 फीसदी को पार कर गई है। हालांकि केट से स्टीफंस का कोई संबंध नहीं है, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि हर कॉलेज की कटऑफ का असर दूसरे कॉलेज की कटऑफ पर पड़ता है। इन्हें देखते हुए यह तय है कि इंग्लिश ऑनर्स की कटऑफ में तीन फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। देखा जाए तो की इस बार की केट की प्रक्रिया भी कटऑफ बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगी। पिछले साल जहां केट के लिए 60 फीसदी अंक वाले ही आवेदन कर सकते थे तो वहीं इस बार क्राइटेरिया में बदलाव कर 45 फीसदी वालों को भी मौका दिया। इनमें सैकड़ों छात्र ऐसे हैं जिनके 12वीं में कम होने के बावजूद इंग्लिश विषय में बेहतर अंक है। ऐसे में, साफ है कि इस बार पिछले साल की तरह अंतिम समय तक सीटें खाली नहीं रहेंगी। दाखिले के कड़े मुकाबले को देखते हुए छात्रों को पहली कटऑफ में ही अपनी सीट पक्की कर लेनी चाहिए। जो छात्र नामी कॉलेज के चक्कर में दूसरी या तीसरी कटऑफ का इंतजार करेंगे, उन्हें आखिर में एसओएल की ओर ही जाना होगा।
(रोहित पंवार से बातचीत पर आधारित)
इंग्लिश ऑनर्स में दाखिले के लिए इस बार ज्यादा मारामारी देखने को मिलेगी। इसके तीन कारण है। पहला, इस बार केट का टॉप स्कोर 92.90 है। दूसरा, शीर्ष सौ में सबसे कम अंक पाने छात्र के भी 82.95 अंक है, इनमें 18 छात्र वे हैं जिन्होंने प्रवेश परीक्षा में बराबर अंक हासिल किए हैं। तीसरा, स्टीफंस में इंग्लिश ऑनर्स की कटऑफ 95 फीसदी को पार कर गई है। हालांकि केट से स्टीफंस का कोई संबंध नहीं है, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि हर कॉलेज की कटऑफ का असर दूसरे कॉलेज की कटऑफ पर पड़ता है। इन्हें देखते हुए यह तय है कि इंग्लिश ऑनर्स की कटऑफ में तीन फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। देखा जाए तो की इस बार की केट की प्रक्रिया भी कटऑफ बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगी। पिछले साल जहां केट के लिए 60 फीसदी अंक वाले ही आवेदन कर सकते थे तो वहीं इस बार क्राइटेरिया में बदलाव कर 45 फीसदी वालों को भी मौका दिया। इनमें सैकड़ों छात्र ऐसे हैं जिनके 12वीं में कम होने के बावजूद इंग्लिश विषय में बेहतर अंक है। ऐसे में, साफ है कि इस बार पिछले साल की तरह अंतिम समय तक सीटें खाली नहीं रहेंगी। दाखिले के कड़े मुकाबले को देखते हुए छात्रों को पहली कटऑफ में ही अपनी सीट पक्की कर लेनी चाहिए। जो छात्र नामी कॉलेज के चक्कर में दूसरी या तीसरी कटऑफ का इंतजार करेंगे, उन्हें आखिर में एसओएल की ओर ही जाना होगा।
(रोहित पंवार से बातचीत पर आधारित)
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