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इलाज करने के लिए लाने होंगे 50% अंक
नई दिल्ली, प्रभात कुमार
First Published:11-06-12 02:23 PM
विदेश से डिग्री लेकर आए छात्रों को नहीं मिलेंगे ग्रेस अंक
हाईकोर्ट ने कहा है कि विदेशी डिग्रीधारी डॉक्टरों को भारत में मरीजों के इलाज करने की अनुमति देने के लिए होने वाली परीक्षा हर हाल में पचास अंकों के साथ पास करनी होगी। हाईकोर्ट ने चिकित्सा पेशे की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था देते हुए कहा कि इस तरह की परीक्षा पास करने के लिए ग्रेस मार्क नहीं दिए जा सकते हैं।
जस्टिस हीमा कोहली ने यह महत्वपूर्ण फैसला फिलिपिंस से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले डॉ. शांतनु कदम की मांग को खारिज करते हुए दिया है। डॉ. कदम भारत में मरीजों को इलाज की अनुमति देने (पंजीकरण के लिए) राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) द्वारा पिछले साल आयोजित परीक्षा में महज आधे से भी कम अंक से फेल हुए थे। परीक्षा पास करने के लिए डॉ. कदम को 50 फीसदी अंक की जरूरत थी, जबकि उन्होंने सिर्फ 49.66 फीसदी ही अंक हासिल किए।
उन्होंने पहले एनबीई और फिर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ग्रेस मार्क देने की गुहार लगाई थी जिससे उन्हें भारत में मरीजों के इलाज करने की अनुमति मिल सके। चिकित्सा पेशे में कम गुणवत्ता वाले न आ सकें, इस बात को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने डॉ. कदम की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस परीक्षा में ग्रेस मार्क नहीं दिए जा सकते हैं।
भारत में पंजीकरण के लिए विदेशों से पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों के लिए एमबीबीएस परीक्षा की तरह ही फॉरेंज मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) में 50 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा।
रूस और चीन के ज्याद फेल: रूस और चीन में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले डॉक्टर भारत में मरीजों के इलाज की अनुमति के लिए होने वाले परीक्षा में सबसे ज्यादा फेल होते हैं। इन दोनों देशों से डिग्री हासिल करने वाले महज 22 फीसदी ही डॉक्टर पास होते हैं। आंकड़ों की बात करे तो वर्ष 2010-2011 में रूस में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 7854 डॉक्टर इस परीक्षा में शामिल हुए। लेकिन उनमें से महज 1696 ही पास कर पाए। यही हाल चीन से पढ़ाई करने वालों का है। इन दोनों वर्षो में 5185 चीनी डिग्रीधारी परीक्षा में शामिल हुए, लेकिन पास सिर्फ 1133 हुए।
एफएमजीई जरूरी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2002 में मेडिकल काउंसिल ने विदेशों में पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों के लिए भारत में मरीजों के इलाज के लिए फॉरेंज मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) को बनाया अनिवार्य।
विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले डॉक्टर भारतीय चिकित्सा मानक पर खरे नहीं उतरते हैं।
2009: 2289 में से महज 460 डॉक्टर ही परीक्षा पास कर सके।
2008: 4211 में महज 1326 ने की परीक्षा पास।
2007: 3143 में से 536 ही हुए पास। नेपाली डिग्री है भरोसेमंद
रूस और चीन की बजाय नेपाल से पढ़ाई करने वाले डॉक्टर भारतीय मानक पर ज्यादा खरे उतरते है। यहां से पढ़ाई करने वाले 32 फीसदी डॉक्टर यह परीक्षा पास करते हैं।
हाईकोर्ट ने कहा है कि विदेशी डिग्रीधारी डॉक्टरों को भारत में मरीजों के इलाज करने की अनुमति देने के लिए होने वाली परीक्षा हर हाल में पचास अंकों के साथ पास करनी होगी। हाईकोर्ट ने चिकित्सा पेशे की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था देते हुए कहा कि इस तरह की परीक्षा पास करने के लिए ग्रेस मार्क नहीं दिए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2002 में मेडिकल काउंसिल ने विदेशों में पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों के लिए भारत में मरीजों के इलाज के लिए फॉरेंज मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) को बनाया अनिवार्य।
विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले डॉक्टर भारतीय चिकित्सा मानक पर खरे नहीं उतरते हैं।
2009: 2289 में से महज 460 डॉक्टर ही परीक्षा पास कर सके।
2008: 4211 में महज 1326 ने की परीक्षा पास।
2007: 3143 में से 536 ही हुए पास। नेपाली डिग्री है भरोसेमंद
रूस और चीन की बजाय नेपाल से पढ़ाई करने वाले डॉक्टर भारतीय मानक पर ज्यादा खरे उतरते है। यहां से पढ़ाई करने वाले 32 फीसदी डॉक्टर यह परीक्षा पास करते हैं।
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By raviranjan kumar (12th-June-2012 06:03:PM)



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