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कृषि शोध पर निवेश बढ़ाने की जरूरत
नई दिल्ली, वार्ता
First Published:21-02-12 10:57 AM
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश में कृषि उत्पादन बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में शोध कार्यों पर निवेश को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मौजूदा एक प्रतिशत से बढ़ाकर दो प्रतिशत किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है।

उन्होंने 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक देश में कृषि उत्पादन रिकॉर्ड 25 करोड़ टन से ऊपर होने के प्रति विश्वास व्यक्त किया। सिंह ने सोमवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (पूसा) के स्वर्ण जयंती दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी के बिना इसे हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत किस्मों, भूमि और उपलब्ध पानी के बेहतर इस्तेमाल की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि देश के समान और समग्र विकास के लिए कृषि क्षेत्र की खुशहाली, उत्पादकता और इसका सतत विकास अत्यंत जरूरी है और सरकार इसके लिए लगातार नीतियां बना रही हैं, जिससे कृषि अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार कर इसे और सुदृढ़ किया जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने खेती से बेहतर आय और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं में निवेश बढ़ाने के लिए बहुआयामी रणनीति अख्तियार की है और इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

सरकार भारत निर्माण कार्यक्रम के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, विद्युतीकरण, सिंचाई, आवास और दूरसंचार क्षेत्र में निवेश पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। किसानों की आर्थिक दशा सुधारने और उनकी आय बढ़ाने के लिए पिछले सात वर्षो के दौरान विभिन्न कृषि जिंसों के समर्थन और खरीद मूल्य में काफी बढोत्तरी की गई है।

दीक्षांत समारोह
निजी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी के बिना लक्ष्य हासिल नहीं होगा
11वीं योजना में कृषि विकास गति साढ़े तीन प्रतिशत होने की उम्मीद
पीएम ने कहा, उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत किस्मों का इस्तेमाल जरूरी

 
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