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क्या कहते हैं मुरादाबाद स्थित संस्थानों के छात्र
हिन्दुस्तान नई दिशाएं
First Published:10-07-12 12:30 PM
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र्तीथकर महावीर विश्वविद्यालय
मैं यूनिवर्सिटी के एमएड विभाग का छात्र हूं। संस्थान में पढ़ाई की गुणवत्ता के चलते मैंने टॉप किया है। संस्थान में प्रवेश से पहले केवल बीबीए व बीसीए कोर्स संचालित थे। बाद में बीएससी होम साइंस, एमबीए, एमसीए और जुड़ गए। संस्थान को 2005 में बीएड की मान्यता मिल गई।

नर्सिंग, फिजियोथेरेपी व पैरामेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद विवि. में पाठय़क्रमों की झड़ी लग गई, जिसमें एमएड का पाठय़क्रम भी शामिल रहा। टीएमयू में मेडिकल के छात्रों के लिए भी अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि वर्तमान में र्तीथकर महावीर मेडिकल कॉलेज के चौदह विभाग में सौ से ज्यादा पाठय़क्रम संचालित हो रहे हैं।

न्यूटन रस्तोगी
छात्र, एमएड विभाग
आईएफटीएम विश्वविद्यालय

मैं आईएफटीएम में इंजीनियरिंग विभाग का छात्र हूं। संस्थान बीबीए व एमबीए और फार्मेसी के पाठय़क्रम के साथ शुरू हुआ था। कुछ समय उपरांत बीटेक, बीसीए, एमसीए के कोर्सेज शुरू किए गए। इन कोर्स की शुरुआत के बाद ही मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया। संस्थान में पाठयक्रम के साथ-साथ अतिरिक्त गतिविधियों में हिस्सा लेकर अंदर छुपी प्रतिभा निखारने का अवसर समय-समय पर मिलता है।

शंशाक
छात्र, इंजीनियरिंग विभाग
राधा कृष्ण इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी

कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों की संख्या में बढ़ोत्तरी को देखते हुए इंस्टीटय़ूट की दूसरी ब्रांच की शुरुआत की है। संस्थान राधा कृष्ण इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रथम ब्रांच अगवानपुर पेपर मिल चौराहा पर, जबकि दूसरी ब्रांच इससे कुछ ही दूरी पर शुक्ला की पुलिया, हरिद्वार रोड पर स्थित है। पिछले नौ वर्षो के दौरान कैंपस ने स्वयं को तकनीकी शिक्षा के बड़े संस्थान के रूप में विकसित किया है।

अनुज शर्मा
छात्र, इंजीनियरिंग विभाग 
राधा गोविंद इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी

हमारा कैंपस राधा गोविंद इंस्टीटय़ूट ऑफ पालीटेक्निक एआईसीटीई से स्वीकृत है व बीटीयू, यूपी से संबद्ध है। इंस्टीटय़ूट की स्थापना वर्ष 2003 में हुई। यहां पढ़ाए जाने वाले कोर्सेज केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रलय व यूजीसी द्वारा स्वीकृत हैं। वर्तमान में इंजीनियरिंग के डिप्लोमा व डिग्री कोर्स और एमबीए की गुणवत्तापरक शिक्षा यहां सफलतापूर्वक दी जा रही है। इंस्टीटय़ूट के दो कैंपस क्रमश: चंदौसी और मुरादाबाद में हैं। शुरुआत में यहां छात्रों की संख्या केवल 156 थी, जो अब तीन हजार से ज्यादा पहुंच चुकी है।
अभिषेक यादव
छात्र, पॉलीटेक्निक

 
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