रविवार, 26 मई, 2013 | 02:47 | IST
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डिजास्टर मैनेजमेंट: निराशा को आशा में बदलने की चुनौती
वेदव्रत काम्बोज
First Published:09-05-12 12:11 PM
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अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और भारत की संसद पर हमला या फिर हाल ही में जापान में आए सुनामी के विनाश के बाद एक ऐसे प्रबंधन की जरूरत महसूस की जाने लगी है, जो इस तरह की आपदाओं से होने वाले विनाश से बचने और लड़ने का सामर्थ्य दे सके। आपदा प्रबंधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल मानव सेवा का प्रतीक है, बल्कि एक बेहतर भविष्य निर्माण का साधन भी है। इस बारे में बता रहे हैं वेदव्रत काम्बोज

प्राकृतिक विपदाओं का पूर्वानुमान आज भी पूरी तरह संभव नहीं हो सका है। यही वजह है कि जब कभी इन आपदाओं से व्यक्ति का सामना होता है तो उसे इसकी कीमत अपनी जान व माल की भारी क्षति के रूप में चुकानी पड़ती है। सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं से ही नहीं, मानवीय चूक या आतंकी मनसूबों के कारण उत्पन्न आपदा भी एक बड़ी समस्या है, जिससे पार पाना बेहद जरूरी है। इसलिए आज इस बात के प्रयास किए जा रहे हैं कि यदि हम इन आपदाओं का पहले से पता लगा पाने में पूरी तरह से सक्षम नहीं हैं तो कम से कम इनसे बचाव और मुकाबले के उपाय तो किए ही जाएं। 

आपदा प्रबंधन या डिजास्टर मैनेजमेंट एक ऐसा ही कदम है, जिससे आपदा के प्रभावों, उनके नियंत्रण और प्रबंधन को समझा जा सकता है। आपदा प्रबंधन ने पिछले कुछ सालों में काफी लोकप्रियता हासिल की है और बड़ी संख्या में छात्र इस ओर आकर्षित हुए हैं। एक अच्छे करियर की भरपूर संभावनाएं इसमें हैं।

सरकारी, गैर सरकारी एजेंसियों में इस क्षेत्र के प्रशिक्षित लोगों की अच्छी मांग है। बीमा कंपनियां, बड़े उद्योगिक प्रतिष्ठान, खासकर वे, जो ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों में हैं, जैसे रसायन, खनन और पेट्रोलियम में आपदा प्रबंध प्रकोष्ठ होता है। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और संयुक्त राष्ट्र के कुछ संगठन भी बड़ी आपदाओं और आपात स्थितियों से निपटने के लिए मानवीय मिशन पर काम करने के लिए ऐसे प्रशिक्षित पेशेवरों का पैनल बनाते हैं।

कोर्स
आपदा प्रबंध कोर्स में जोखिम आकलन और आपदा प्रबंध, प्रिवेन्टिव थॉट, आपदा नियंत्रण के लिए विधायी संरचना, आपदा तैयारी, आपदा संचार, आपदा कम करने के उपाय, आपदा प्रबंधन में जीआईएस का प्रयोग और बचाव शामिल हैं। खनन, रासायनिक आपदा और तकनीकी आपदा आदि के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है। आपदा प्रबंधन कोर्स शैक्षिक और कौशल आधारित शिक्षा का मेल मुहैया कराते हैं, ताकि छात्र प्रौद्योगिकीय आपदा और आपात प्रबंध में विशेषज्ञता हासिल कर सकें। इससे वे खुद को कई तरह की संस्थाओं में रोजगार पाने योग्य बना सकते हैं। इसके अलावा वे अपनी डिजास्टर मैनेजमेंट कंसल्टेंसी भी स्थापित कर सकते हैं।

ज्यादातर संस्थान अल्प अवधि के पोस्टग्रेजुएट सर्टिफिकेट या आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा कोर्स ऑफर करते हैं। ये कोर्स 6 महीने से लेकर एक साल तक की अवधि के हैं और कामकाजी पेशेवरों, गैरसरकारी संगठनों, सामाजिक संगठनों तथा समाज विज्ञान पढ़ने वाले छात्रों के लिए हैं। कुछ विश्वविद्यालय आपदा प्रबंध में पोस्ट ग्रेजुएट या एमबीए प्रोग्राम की भी पेशकश करते हैं। सीबीएसई ने छात्रों को शुरुआती समय में ही आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताने के लिए अपने पाठय़क्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट शामिल किया है। 10+2 के बाद डिजास्टर मैनेजमेंट की पढ़ाई की जा सकती है। ये कोर्स रेगुलर और दूरस्थ शिक्षा मोड में भी उपलब्ध हैं। कुछ करियर विकल्प इस प्रकार हैं-

रिलीफ एंड डेवलपमेंट इंजीनियरिंग
आपदा के बाद सबसे ज्यादा नुकसान बिल्डिंग्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुंचता है, इसलिए आपदा के तुरंत बाद एक राहत व विकास इंजीनियर पानी की सप्लाई, साफ-सफाई और अस्थाई शरण-स्थलों के साथ-साथ बुनियादी संरचना को दुरुस्त करने का काम करता है।

रिस्क एसेसमेंट एंड हैल्थ एंड सेफ्टी
कई कंपनियों को अपने कर्मचारियों व आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत होती है। निर्माण, रसायन, तेल, जल, अपशिष्ट, यातायात और परमाणु उद्योगों के साथ-साथ सरकारी एजेंसीज को आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञों की जरूरत होती है।

डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स ऐसी कंपनियों या उद्योगों में सीधे जॉब प्राप्त कर सकते हैं या एक कंसलटेंट के रूप में भी इन जिम्मेदारियों को निभा सकते हैं। वे क्राउड मैनेजमेंट के मानदंडों के माध्यम से एक नए खेल मैदान के डिजाइन में अहम भूमिका निभा सकते हैं या पेट्रोलियम इंडस्ट्री में राजनीतिक रूप से अशांत क्षेत्र में पाइपलाइन के माध्यम से ऑयल सप्लाई को सुनिश्चित करने में भी भूमिका निभा सकते हैं।

रिलीफ एंड डेवलपमेंट मैनेजमेंट
राहत के काम में लगे प्रोजेक्ट मैनेजर समाज की जरूरतों के प्रति जिम्मेदार होते हैं। उदाहरण के लिए उन्हें आपात स्थिति में खाद्य पदार्थों, राहत, शरण लेने वाली जगह बनाने के लिए आने वाले सामान के वितरण कार्य करने होते हैं। यह सामान अन्य देश द्वारा दान में दिया गया हो सकता है या फिर किसी अन्य एजेंसी के राहत प्रयासों का हिस्सा हो सकता है। विकास प्रबंधक को शिक्षा आदि की व्यवस्था भी करनी हो सकती है।

हैल्थ मैनेजमेंट
कुछ सरकारी, गैर सरकारी, मुनाफा न कमाने वाली संस्थाओं का फोकस प्राइमरी स्वास्थ्य पर ही होता है। इस क्षेत्र में प्रोजेक्ट मैनेजर से बहुत अधिक विशेषज्ञता की उम्मीद की जाती है। उसे विभिन्न तरह के कौशलों से लैस होना चाहिए, जैसे आम जनता के स्वास्थ्य व महामारी की जानकारी, लॉजिस्टिक का डिस्ट्रीब्यूशन, फाइनेंस और एकाउंटिंग, आपदा क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी मुद्दे, राजनीति और कानून आदि।

इमरजेंसी प्लानिंग एंड मैनेजमेंट
इमरजेंसी प्लानर जोखिमों की पहचान करता है और उन रिस्क के संबंध में प्लान बनाता है, जिनका सामना समाज का कोई समुदाय करता है। इनमें खराब मौसम, रासायनिक विस्फोट या आतंकवादी खतरा आदि शामिल हैं। इमरजेंसी प्लानर को पहले से ही लोगों की भूमिकाएं, जिम्मेदारियां, संचार के तरीके और प्रबंधन की प्रक्रिया तय करनी होती है। बाढ़ की स्थिति या दो ट्रेनों के आपस में टकरा जाने पर तीव्र और इफेक्टिव रिस्पॉन्स देने वाली कार्रवाई की भी इमरजेंसी प्लानिंग करनी होती है।

रिस्क एंड बिजनेस कॉन्टिन्युटी मैनेजमेंट
एक जोखिम और कारोबार निरंतरता प्रबंधक की भूमिका यह होती है कि उसे संस्थान के भीतर और उसके बाहरी दुनिया के साथ संबंध से जुड़े प्रोसेस और मैनेजमेंट सिस्टम की विस्तार से जानकारी होनी चाहिए। उसके लिए जरूरी है कि वह संस्थान के आंतरिक खतरों को पहचानने की क्षमता रखता हो और उसके मद्देनजर आंतरिक सिस्टम को मजबूत रखे व यह सुनिश्चित करे कि किसी भी आपदा या संकट की स्थिति में संस्थान का काम रुके नहीं।

प्रमुख संस्थान
आईएएसई यूनिवर्सिटी, सरदार शहर, चुरू, राजस्थान
, www.iaseduniv.org
इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली, www.ignou.org
टाटा इंस्टीटय़ूट ऑफ सोशल साइंस www.tiss.edu
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, इंदौर www.dauniv.ac.in 
नेशनल सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट www.ncdm-india.org
सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट (सीडीएम) पुणे, महाराष्ट्र www.yashada.org/courses
सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ, मेडिकल एंड टेक्नोलॉजीकल साइंसेज, टडोंग, गंगटोक, सिक्किम
www.sikkimmanipal.net
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली, www.ipu.ac.in
नेशनल सिविल डिफेंस कॉलेज, नागपुर, महाराष्ट्र, www.ncdcnagpur.nic.in/ prog-offered.htm
एन्वायरमेंट प्रोटेक्शन ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीटय़ूट, हैदराबाद, www.eptri.com/ riskanalysisdisaster.html
नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट (मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर), नई दिल्ली, www.nidm.net
नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, पटना www.nalandaopenuniversity.com
अलगप्पा यूनिवर्सिटी www.alagappauniversity.ac.in
सेंटर फॉर डिजास्टर मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट, अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई www.annauniv.edu

तेजी से बढ़ रही हैं आपदा प्रबंधन में संभावनाएं

आपदा प्रबंधन को लेकर पिछले कुछ समय से पूरे विश्व में तेजी से काम किया जा रहा है। भारत में भी इस दिशा में काफी काम हो रहा है और अभी काफी होना बाकी है। बाढ़, साइक्लोन, ज्यादा बर्फबारी, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ परमाणु दुर्घटनाओं और आतंकी हमलों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भी आपदा प्रबंधन जरूरी है। हालांकि अभी देश में इससे संबंधित कम ही कोर्स उपलब्ध हैं, लेकिन अब तेजी से इस दिशा में काम किया जा रहा है, इसलिए इस क्षेत्र में करियर की संभावनाएं भी काफी बढ़ गई हैं।
आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न कोर्सेज में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट सहित सभी विषयों के छात्र आवेदन कर सकते हैं। इसमें ग्रेजुएशन, पोस्टग्रेजुएशन और एमबीए कोर्सेज के साथ शॉर्ट टर्म डिस्टेंस लर्निंग कोर्स भी करवाए जाते हैं। कोर्सेज के दौरान आपदा से पहले और आपदा के बाद के मैनेजमेंट और प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में बताया जाता है। आपदा प्रबंधन कोर्स करने के बाद सरकारी विभागों में जॉब की संभावनाएं अधिक हैं, पर अब कॉरपोरेट जगत भी इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को काम पर रख रहा है।

प्रो. जेके गर्ग,
डायरेक्टर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट स्टडीज, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली

 
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