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ओलंपिक में महिलाएं
लॉस एंजिलिस टाइम्स, अमेरिका
First Published:30-07-12 11:18 PM
गुजरे शुक्रवार को लंदन में ओलंपिक गेम्स का भव्य उद्घाटन समारोह हुआ, पर इससे पहले ही इतिहास रचा जा चुका था। ओलंपिक में पहली बार सभी देशों, जो 200 से भी ज्यादा हैं, की टीमों में महिला एथलीट शामिल हैं। अमेरिकी दल में तो पुरुषों से ज्यादा महिला खिलाड़ी हैं- 261 पुरुष और 269 महिलाएं। ऐसा पहली बार हुआ। यहां तक कि ब्रूनेई, कतर व सऊदी अरब की नुमाइंदगी महिला एथलीट कर रही हैं। इससे पहले किसी ने ऐसा देखा-सुना न था।
आखिरी मिनट के नाटकीय बदलाव करते हुए सऊदी अरब ने भी अपनी टीम में दो महिला खिलाड़ियों को शामिल होने की इजाजत दी। एक जुडो प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेगी, तो दूसरी 800 मीटर दौड़ में। हाल ही में ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी एक रिपोर्ट में सऊदी अरब की आलोचना करते हुए कहा था कि यह देश महिलाओं को खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेने देता। कतर की महिला एथलीटों में से एक एयर राइफल शूटर बाहिया अल हमाद को टीम के मार्च-पास्ट के दौरान राष्ट्रीय झंडा लेकर चलने का गौरव हासिल हुआ।
इसी तरह, तलवारबाजी में दुनिया की शीर्ष खिलाड़ी मारियल जगुनिस अमेरिकी झंडा लेकर आगे बढ़ीं। वाकई वे महत्वपूर्ण पल थे, जिन पर इन्हें नाज होगा और इनके देशों को भी। इस बार ओलंपिक में न सिर्फ विभिन्न देशों की मुस्लिम महिलाएं दौड़ेंगी, बल्कि वे निशाना लगाएंगी और चप्पू भी चलाएंगी। साफ है, कई प्रतियोगिताओं में इन खिलाड़ियों की हिस्सेदारी है। वे तय पोशाक में दिखेंगी, जो उनकी मान्यताओं के लिहाज से अब भी आधुनिक परिधान हैं। इनमें से कुछ अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के निमंत्रण पर आई हैं, तो कुछ उनके खेल महासंघों के बुलावे पर।
ऐसा इसलिए किया गया है कि मुस्लिम देशों में खेल प्रतिस्पर्धा का माहौल बने और उनमें महिला नुमाइंदगी बढ़े। लेकिन इतने भर से काम नहीं चलने वाला। अब भी दुनिया के कई देशों में महिला खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं नहीं हैं। उनके खेलने पर कई तरह की पाबंदियां हैं। उन्हें इसका अधिकार और सुविधाएं दिलाने की जरूरत है। तब जाकर भविष्य में उन्हें किसी मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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