शुक्रवार, 03 सितम्बर, 2010 | 13:57 | IST
  RSS | 
Site Image Loading
Image Loading
Image Loading
 
दोस्ती की राह
First Published:05-02-10 08:28 PM
Last Updated:05-02-10 09:00 PM
 ई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ:  Image Loadingपढे  Image Loadingलिखे (0)  अ+ अ-

भारत और पाकिस्तान की दोस्ती की राह में उम्मीद के गुलदस्ते तो दिखने लगे हैं पर जमीन पर कांटों की संख्या कहीं ज्यादा है। एक तरफ भारत बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव भेज रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान बातचीत के दायरे को स्पष्ट कर लेना चाहता है। इसीलिए उसकी तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। इस बीच पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद शहर में कश्मीर एकता दिवस के मौके पर आतंकवादी संगठनों और भारत में वांछित आतंकी नेताओं का जमावड़ा हुआ और कश्मीर में लड़ाई जारी रखने का एलान किया गया। उससे लगता है कि भारत को आतंकवाद से राहत नहीं मिलने वाली है। बताया जाता कि पिछले तीन महीनों में भारत ने पाकिस्तान को बातचीत का प्रस्ताव दूसरी बार भेजा है। नवंबर में भी विदेश मंत्रालय की तरफ से संयुक्त सचिव के स्तर की बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया था। उससे पहले प्रधानमंत्री ने कहा था कि हम मानवीय मुद्दों पर संवाद तो कर ही सकते हैं। इस बार विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा के संकेत के बाद विदेश सचिव निरुपमा राव की तरफ से विदेश सचिव सलमान बशीर को न्योता भेजा गया है। गृहमंत्री भी इस महीने के अंत में सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने इस्लामाबाद जा रहे हैं। जहां वार्ता भले न हो पर संपर्क का दायरा जरूर बढ़ सकता है। अगर भारत-पाक वार्ता की तैयारियों, उनके साथ जुड़े हुए शब्दाडंबर और उनसे निकलने वाले नतीजों पर गौर किया जाए तो पता चलेगा कि यह दुनिया का सबसे ज्यादा दांवपेंच वाला और मृगमरीचिका पैदा करने वाला राजनय है। यहां लंबे समय तक इस सवाल पर वार्ता चलती है कि किन मुद्दों पर वार्ता की जाए और किसके बीच की जाए। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि अगले हफ्ते तक दिल्ली या इस्लामाबाद में वार्ता प्रक्रिया शुरू हो जाएगी पर उसके भूलभुलैया में ही भटकते रहने की संभावना है।

इसकी वजह यह है कि भारत पाकिस्तान से लगातार मांग कर रहा है कि वह 26 नवंबर 2008 के मुंबई हमले पर कोई ठोस कार्रवाई करे। लेकिन पाकिस्तान घटना के 14 महीने बाद भी सबूत मांग रहा है। इसीलिए भारत के सत्ता प्रतिष्ठान में वार्ता शुरू करने के बारे में मतभेद है। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नारायणन नहीं चाहते थे कि आतंकवाद को दरकिनार कर कोई वार्ता शुरू की जाए। नए सुरक्षा सलाहकार और पाकिस्तानी मामलों के विशेषज्ञ शिवशंकर मेनन चाहते हैं कि गतिरोध टूटे पर वे भी विपक्षी आपत्तियों की पूरी तरह उपेक्षा नहीं कर सकते। इसीलिए भारत खुली या सीमित बातचीत का प्रस्ताव रख रहा है। जबकि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे से लेकर नदियों के जल विवाद तक सभी मसले को शामिल करने वाली एक मुकम्मल बातचीत चाहता है। वार्ता के स्वरूप को तय किए बिना वह उसे शुरू करने से झिझक रहा है। ऊपर से भारत और पाक के बीच चलने वाली किसी भी वार्ता पर आतंकी हमले की छाया हमेशा मंडराती रहती है और इस बार भी उससे निरापद होने की कोई गारंटी नहीं है। इन स्थितियों के बावजूद अफगानिस्तान से कश्मीर तक हर जगह भारत और पाकिस्तान को एक दूसरे का साक्षात्कार करना ही है। इस जमीनी हकीकत में कांटे चाहे जितने दिखें पर इनसे मुंह चुराने से दोस्ती की राह नहीं निकलेगी। अगर दोनों को अमन के साथ रहना है तो कांटे निकालने ही होंगे।

 
 Image Loadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ:  Image Loadingपढे  Image Loadingलिखे (0)  अ+ अ- share   स्टोरी का मूल्याकंन
 
आज का मौसम राशिफल
अपना शहर चुने  
sky
बादल
सूर्यादय
सूर्यास्त
नमी
  : 5:58 AM
  : 18:43 PM
  : 94%
अधिकतम
तापमान
31.1°
.
|
न्यूनतम
तापमान
25.8°