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तिरंगे को सम्मान दिलाने के लिए खेल रहा हूं
First Published:28-07-12 10:40 PM
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लिएंडर पेस एक अलग ही दुनिया में रहते हैं। वह बहुत भावुक इंसान हैं, जो या तो किसी से बात करना पसंद नहीं करते या उसे जीवन भर के लिए दोस्त बना लेते हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स के नेशनल स्पोर्ट्स एडिटर सुखवंत बसरा ने जब उनसे बात करने की कोशिश की, तो वह लंबा इंटरव्यू देने के मूड में नहीं थे। पर जब बात शुरू हुई, तो वह मूड में आ गए और फिर खुलकर बातें हुईं। पेश हैं इस इंटरव्यू के अंश:

आपके लिए ओलंपिक का क्या मतलब है?
मुझे इस तरह के सवालों के जवाब देना अच्छा नहीं लगता। क्या हमेशा यह नहीं होता कि मैं राष्ट्रीय झंडे के लिए खेलता हूं? देश के लिए खेलता हूं और अपने सपोर्ट ग्रुप के लिए, जो बीते 26 साल से मेरे साथ है। यह सब कुछ भारत के लिए है, जिसने बुरे वक्त में भी हमेशा खेलने को प्रोत्साहित किया। मैं खुद को अपमानित महसूस कर रहा हूं। ऐसा महसूस कर रहा हूं कि मेन्स डबल्स का चयन योग्यता के आधार पर नहीं हुआ। लेकिन फिर भी हम पेशेवर खिलाड़ी हैं। मैंने सभी नकारात्मक पक्षों को एक तरफ रख दिया है और उस वजह के लिए खेल रहा हूं, जिसके लिए ताउम्र खेलते रहना चाहता हूं। यानी अपने तिरंगे और भारत के करोड़ों लोगों के लिए खेल रहा हूं।

मीडिया आपकी ताकत कभी नहीं रहा। फिर भी आप इसमें उलझे।
वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं था। अलग-अलग कारणों से अलग-अलग लोगों ने मुझे अलग-अलग रास्ते दिखाए। इसका असर यह हुआ कि कोई असर नहीं हुआ। मुझे अब भी लगता है कि चयन समिति किसी मकसद के लिए बनती है। मैं आज भी उनके चयन के साथ हूं। लेकिन दुर्भाग्य से लगभग पांच महीने तक नंबर वन बने रहने के बावजूद साल की शुरुआत अच्छी नहीं रही। बदकिस्मती से ग्रैंड स्लेम के फाइनल में पहुंचने के बाद भी आपको सम्मान नहीं मिलता है। पर क्या आप जानते हैं, इस पूरे मामले का सबसे बेहतरीन पक्ष क्या रहा? दरअसल, इससे मैं और प्रेरित हुआ। 

कैसे?
मैं इतना प्रेरित हो गया हूं कि मैं अपने खेल से सबकी बोलती बंद कर दूंगा। अगले चार साल तक इस पर पूरी गंभीरता से काम करूंगा और अपना सातवां ओलंपिक भी खेलूंगा।

पक्का?
सौ फीसदी। मैं इस दिशा में अभी से जुट जाऊंगा।

आप पहले से ज्यादा दुबले-पतले और फिट दिख रहे हैं।
(..हंसते हुए) आप पूरे यकीन के साथ तो कह रहे हैं न! एक वक्त में मेरा वजन 112 पाउंड ज्यादा था। इसलिए मुझे परवाह नहीं कि आप जैसे लोग मेरे वजन के बारे में क्या कहते हैं- फिट या फैट, या जो आपको अच्छा लगे। वजन कोई बड़ा मसला नहीं है। सवाल यह है कि आप कितने फुर्तीले हैं। आप में गति होनी चाहिए, जो कोर्ट में दिखे। कोर्ट का दाहिना हिस्सा हो या बायां, इससे फर्क नहीं पड़ता। इस स्तर पर आपको अपना बेहतरीन खेलना होता है, दुनिया में सबसे बेहतर। आप कोई साऊथ क्लब (कोलकाता) चैंपियनशिप नहीं खेल रहे हैं। यहां तो हार और जीत में बस एक अंक का फर्क रह जाता है। आखिरकार आपको अपना सबसे बेहतर देना होता है और मैं इसी पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं।

लोग आपका जोड़ीदार क्यों नहीं बनना चाहते?
जब दो लोग ऐसा कह रहे हों, तो आप यह नहीं देखते कि बाकी दुनिया क्या कहती है? 26 साल के पेशेवर जीवन में मेरे 92 जोड़ीदार रहे हैं। और अगर इनमें से दो (महेश भूपति और रोहन बोपन्ना) नाखुश हैं, तो 90 खुश हैं। मुझे लगता है कि उन्हें अनुशासित करने की जरूरत है। लेकिन महासंघ ऐसा नहीं कर रहा है। यही निराशा करने वाली बात है। जहां तक मेरी बात है, तो मेरी यात्रा उन दोनों से काफी बड़ी और लंबी है। इसलिए मैं अपना छठा ओलंपिक खेल रहा हूं और सातवां खेलने के लिए खुद को प्रेरित कर रहा हूं। हम उस संसार में हैं, जहां खूबियों को सराहा जाता है। लेकिन इस वक्त ऐसा नहीं है। इसीलिए पिछले दो महीने काफी कठिन गुजरे।

यानी आपकी जो उपलब्धियां हैं, उसके लिए आपको सराहा नहीं जा रहा?
खैर, ओलंपिक में आपकी योग्यता बोलती है। श्रेष्ठ टीम को मेडल मिलता है। हम खुश हो सकते हैं कि हमारा टेनिस दल सबसे बड़ा है। पर अगले दस दिन में आप हमसे पूछेंगे कि हमारे पास कितने मेडल हैं? हिस्सेदारी करने के लिए टीम को भेजने और जीतने के लिए टीम को भेजने का अंतर मैं समझता हूं। 

लेकिन ये दोनों आपके साथ खेलना नहीं चाहते थे।
कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं वास्तव में इस पचड़े में पड़ना ही नहीं चाहता।

सानिया मिर्जा के साथ मिक्स्ड डब्लस में आप बैकहैंड पर होंगे, जो आपकी ताकत नहीं है।
मैं यहां लिजा रेमंड के साथ बैकहैंड खेलकर जीत चुका हूं। मुश्किल से दो हफ्ते पहले, मैं यहीं पर मिक्स्ड डबल्स के फाइनल में था। आप एक विश्वस्तरीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने जा रहे हैं, जहां कुछ शॉट के फासले से जीत-हार का फैसला होता है। इसलिए फर्क नहीं पड़ता कि आप कोर्ट के किस हिस्से से खेल रहे हैं। मेरे लिए तो कोई भी तरफ अच्छा ही है। मैंने अपने करियर की शुरुआत बैकहैंड साइड से की थी। और काफी अच्छा भी खेला था। मिक्स्ड डबल्स में ज्यादा अहम यह होता है कि आपके साथ खेल रही महिला खिलाड़ी कहां से खेलना चाहती है। वैसे भी सानिया का सर्विस रिटर्न बहुत अच्छा है। जितना रिटर्न वह कोर्ट में देगी, उतना हमारे लिए अच्छा होगा, क्योंकि तब विपक्षी टीम खुद को दबाव में महसूस करेगी।

आपको पक्का भरोसा है कि आप अगला ओलंपिक खेल पाएंगे?
भविष्य को कौन जानता है? लेकिन फिलहाल तो मुझे यही लगता है।

 
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