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एक और क्रिकेट हीरो पर मंडराता संकट
शिवेंद्र कुमार सिंह, विशेष संवाददाता, एबीपी न्यूज
First Published:08-01-13 06:57 PM
इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से विरेंदर सहवाग के बाहर किए जाने को लेकर कई बातें कही जा रही हैं। पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी समेत एक बड़ा वर्ग है, जो यह मानता है कि सहवाग के टीम से बाहर होने की वजह कप्तान धौनी के साथ आए दिन होने वाले विवाद हैं। बहस इस बात पर भी हो रही है कि जब पूरा का पूरा बल्लेबाजी क्रम ही लड़खड़ा गया, तो अकेले विरेंदर सहवाग पर निशाना क्यों साधा गया? दरअसल, दुनिया के सबसे धुरंधर बल्लेबाजों में शुमार विरेंदर सहवाग लगातार खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। खराब फिटनेस की वजह से उनकी फील्डिंग सुस्त होती जा रही है। जब से उनके कंधे और अंगुली में तकलीफ हुई, तब से उन्होंने पार्ट-टाइम गेंदबाज की अपनी भूमिका को भी छोड़ ही रखा है। सुनील गावस्कर और कपिल देव उनके एटीट्यूड की बात कह रहे हैं। इन्हीं सारी बातों का नतीजा है कि लगातार खराब प्रदर्शन कर रही भारतीय टीम से जब एक खिलाड़ी को बाहर का रास्ता दिखाया गया, तो सबसे पहला नंबर उन्हीं का आया।
दिल्ली में पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी वनडे जीतने के बाद कप्तान धौनी ने साफ शब्दों में कहा कि उनके हिसाब से टीम की फील्डिंग को मैन ऑफ द मैच चुना जाना चाहिए। यह इशारा था इस बात का कि अगले कुछ मिनटों के बाद जब वह चयन समिति की बैठक में जाएंगे, तो क्या कहेंगे। वैसा ही हुआ। इंग्लैंड के खिलाफ टीम के चयन के लिए जब धौनी चयनकर्ताओं के साथ बैठे, तो उन्होंने सबसे ज्यादा जोर फिटनेस पर ही दिया। यह सच है कि वीरू इस वक्त कैरियर के बुरे दौर से गुजर रहे हैं। 2011 में इंदौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ 219 रनों की तूफानी पारी खेलने के बाद सहवाग 11 मैचों में सिर्फ एक अर्धशतक लगा पाए हैं। पर अगर खराब फॉर्म ही टीम से बाहर होने की वजह रही, तो फिर गौतम गंभीर व रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी भी कोई बहुत अच्छी फॉर्म में नहीं हैं। लेकिन आउटफील्ड में गौतम गंभीर और रोहित शर्मा की बेहतर फील्डिंग उन्हें बचा ले गई। विराट कोहली, सुरेश रैना, रविंद्र जडेजा, रोहित शर्मा जैसे चुस्त-दुरुस्त फील्डरों के मैदान में रहने का फायदा टीम इंडिया को वक्त-वक्त पर मिला भी है। इस मोर्चे पर विरेंदर सहवाग लगातार कमजोर दिखते रहे हैं।
अब सहवाग के आगे का रास्ता क्या है? भारतीय टीम को 2015 में विश्व कप खेलना है। सहवाग फिलहाल 34 साल के हैं। विश्व कप के समय वह 36 साल के हो जाएंगे। तब खुद को फिट रखने की चुनौती और ज्यादा होगी। टीम से बाहर किए जाने के बाद सहवाग ने घरेलू क्रिकेट में खेलने की भी इच्छा जताई है, जाहिर है कि वह मायूस नहीं हैं। इसकी एक वजह शायद यह है कि पिछले काफी समय से उन्हें वनडे से ज्यादा टेस्ट में भरोसेमंद बल्लेबाज माना जा रहा है और फिर छक्के-चौके उड़ाने के लिए आईपीएल तो है ही।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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टिप्पणियाँ
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jaisa bovoge vaisa hi katoge, delhi ke khiladiyon ne dhoni ko captonship se hatane ka jo shadyantra racha hai usmein sehwag mukhiya the unhone dhoni se nahi desh se gaddari ki hai, purv khiladiyon dwara dhoni ki alochana karna dukhad hai, dhoni ke karan T20 world cup, 1day world cup bharat ne jiti hai, aur haar jeet to hoti rahti hai haar ke liye team ke sabhi khiladi jimmedar hote hain sirf akela capton nahi, mera dhoni ko pura samarthan
By vivek jadhav (9th-January-2013 10:31:AM)
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