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ऐ मेरे शब्दो.. मुंह में वापस आ जाओ
के पी सक्सेना
First Published:08-01-13 06:56 PM
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सुबह-सुबह घने कोहरे और ठंडक में मौलाना कई-कई लबादों, टोपों और मफलरों में पैक्ड दूध का पाउच लटकाए खरामा-खरामा अंग्रेजी के आठ जैसे ऐंठे चले आ रहे थे। उनकी गठरी में सिर्फ आखें खुली थीं, बाकी सब ढका-छिपा था। बोले, ‘भाई मियां, डरो मत। हम हैं मौलाना लादेन। ठंड ने हमें एक्स-वाई-जेड बना रखा है। खुदा कसम, बाबर और हुमायूं के टाइम में पड़ी हो तो पड़ी हो, हमारे लाइफ टाइम में ऐसी ठंड नहीं पड़ी। घर पर चाय खौल रही होगी। पीछे-पीछे चले जाओ। एक कप तुम भी अपने भीतर धकेल लेना।’ चाय की सुड़पी लेकर बोले, ‘अल्ला खुश रखे। तुम्हारी भाभी दनादन कप थमाती रहती है। इधर चाय की गरमाहट, उधर न्यूजों की। जनवरी पार लग जाएगा। पेपर में छापे पड़े हैं कि मैं अपने शब्द वापस लेता हूं।

राष्ट्रपति के सुपुत्र ने (जो खुद कांग्रेसी सांसद हैं) दिल्ली गैंग रेप प्रदर्शन के खिलाफ कुछ अनर्गल ऐन-गैन बक दिया। तूफान उठा खड़ा हुआ। धायं से अपने शब्द अपने मुंह में वापस ले लिए। मामला ऊं शांति ऊं हो गया। अपने मुंह से निकाले गए शब्द मुंह में वापस ले लेना राजनीति की एक कला है, जिसमें कांग्रेसी माहिर हैं। वैसे अब तो सभी दल वाले यहां तक कि बाबा-फकीर भी इस फन में माहिर होते जा रहे हैं। मुंह से कोई घटिया बयान फेंका और वापस कैच करके मुंह में रख लिया। भाई माफ करना, चमड़े की जबान है, फिसल गई।

थैंक यू, हम तो यह कहें भाई मियां कि अललटप शब्द बोलने से पहले नाप-तोल लें, तो देश के सामने यह शर्मिदगी क्यों उठानी पड़े? पर राजनीति का शर्मो-हया से क्या वास्ता?’ आपको याद होगा भाई मियां, संत कबीर ने कहा है- ‘शब्द सम्हारे बोलिए, शब्द के हाथ न पांव.., एक शब्द औषधि करे, एक शब्द करे घाव।’ ऐसी गेंद फेंके ही क्यों, जो वाइड बॉल हो जाए? ऐसी वाइड फेंकने में अपनी कांग्रेस के दिग्गी राजा एक्सपर्ट हैं। अंपायर उनके ठेंगे पर। ऐसी हनकबाजी से क्या फायदा कि बाद में सिर झुकाना पड़े? सबसे बढ़िया अपने पीएम, जो कुछ बोलते ही नहीं। चुप-चुप दीदम, दम न काशीदम। लो, पान खाओ।’

 
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