शनिवार, 01 नवम्बर, 2014 | 14:29 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    आम आदमी की उम्मीदों को पूरा करे सरकार: शिवसेना वर्जिन का अंतरिक्ष यान दुर्घटनाग्रस्त, पायलट की मौत केंद्र सरकार के सचिवों से आज चाय पर चर्चा करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा आज से शुरू करेगी विशेष सदस्यता अभियान आयोग कर सकता है देह व्यापार को कानूनी बनाने की सिफारिश भाजपा की अपनी पहली सरकार के समारोह में दर्शक रही शिवसेना बेटी ने फडणवीस से कहा, ऑल द बेस्ट बाबा झारखंड में हेमंत सरकार से समर्थन वापसी की तैयारी में कांग्रेस अब एटीएम से महीने में पांच लेन-देन के बाद लगेगा शुल्क  पेट्रोल 2.41 रुपये, डीजल 2.25 रुपये सस्ता
खुद से सलाह
नीरज कुमार तिवारी First Published:08-01-13 06:56 PM

आप जब परेशानी से घिरे होते हैं, तब क्या सोचते हैं? ज्यादातर लोग चाहते हैं कि उन्हें हमदर्दी हासिल हो। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें दूसरों के सलाह की जरूरत होती है। लेकिन कितने हैं, जो आत्म-सुझाव में परेशानी का हल तलाशते हैं? ऑपेरा स्टार रिसे स्टीवन्स ने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें हार ही हार हासिल हो रही थी। तब उसके दिमाग में केवल एक बात नाचती कि वह इसलिए विफल हो रही है कि उसकी आवाज के सच्चे कद्रदान नहीं हैं, उनका कोई गॉड फादर नहीं है। एक दिन उसे एक आत्म-सुझाव मिला कि जितना वक्त वह इस तरह सोचने में व्यतीत करती है, उतना अपने रियाज को और दे तब? तब वही हुआ, जो होना था। वह कामयाब हुई। उनके कद्रदान दिन-ब-दिन बढ़ते चले गए। स्टीवन्स कहती हैं कि कामयाबी का सबसे बड़ा रास्ता तब खुलता है, जब आप अपनी कमियों के साथ सहज होते हैं, उसे स्वीकार करते हैं, अपनी आलोचना करते हैं और आलोचक ‘स्व’ को महत्व देते हैं। इस मसले पर डॉक्टर जोसेफ मर्फी कहते हैं कि सेल्फ सजेशन का मतलब है, खुद को किसी खास बात का सुझाव देना।

वह कहते हैं कि हर साधन की तरह इसके भी गलत प्रयोग से नुकसान हो सकता है, लेकिन सही तरीके से प्रयोग करने पर यह बहुत उपयोगी बन जाता है। दरअसल, विचारों में चुंबकीय ताकत होती है और किसी भी व्यक्ति को सबसे ज्यादा उसके अपने विचार प्रभावित करते हैं। अगर आप दिल से मान बैठे हैं कि आप हार चुके हैं, तो दुनिया की कोई ताकत आपको जिता नहीं सकती, लेकिन अगर दिल कहता है कि आप विजेता बन सकते हैं, तो आप जीत की राह तलाश ही लेंगे। समस्या यह है कि हम खुद की बात ही नहीं सुनना चाहते। इसके लिए आपको ठहरना पड़ता है। शांत होना पड़ता है। तभी आपका दिल गलतियों, कमजोरियों को सामने लाकर रखता है। बस हममें अपना रचनात्मक आलोचक बनने का साहस होना चाहिए।  

 
 
|
 
 
टिप्पणियाँ