शनिवार, 20 दिसम्बर, 2014 | 23:24 | IST
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स्विट्जरलैंड हो रहा जबलपुर
First Published:07-01-13 07:26 PM

उत्तर भारत में जाड़ा बहुत पड़ रहा है। सैकड़ों जानें जाड़े से जा चुकी हैं। सरकार बेचारी कुछ कर नहीं पा रही है। जो गिनती बताई जाती है, चुपचाप नोट कर लेती है। किसी टीवी पर इस बारे में कोई बहस दिखी नहीं। टीवी के लोग अभी लक्ष्मण रेखा, भारत और इंडिया में बिजी हैं। जबलपुर में तो मौसम स्विट्जरलैंड हो रहा है। खूब सर्दी, खूब धूप। जाड़े का लुत्फ उठाया जा रहा है। रोज गिरते तापमान के रिकॉर्ड के आंकड़े आते हैं अखबार में। हमें वे सब एक गिनती की तरह लगते हैं। यही अगर पहनने को गरम कपड़े, ओढ़ने को रजाई-कंबल न होते, तो बिलबिलाते घूमते। मौसम जो अभी स्विट्जरलैंड लग रहा है, तब साइबेरिया हो जाता। दुआ करते कि ये जाड़ा टले जल्दी। बवाल है। इसी मौसम में कल ‘चलो कुछ तूफानी करते हैं’ सोचते हुए साइकिल चलाने निकल गए। शुरू के पंद्रह-बीस पैडल तो खुशी-खुशी मारे। फिर मामला फंसने लगा। समतल सड़क पर लग रहा था कि एवरेस्ट पर साइकिलिंग कर रहे हैं। मन किया कि रुक जाएं, फिर सोचा रुकेंगे, तो लगेगा कि थक गए।

स्टेमिना गड़बड़ है। फिर अपने एक मित्र से मिलने चले गए। साइकिल से आने की बात ऐसे बताई, जैसे हम कोई किला फतह करके आए हों। हांफते हुए ही सही, चार किलोमीटर की साइकिलिंग ने हमारे मन में इतना आत्मविश्वास भर दिया कि हमने तय किया कि तीन महीने बाद साइकिल से नर्मदा परिक्रमा करेंगे। पर दस किलोमीटर चलने में ही हाल-बेहाल हो लिए हम, तो पंद्रह-सोलह सौ किलोमीटर में क्या हाल होगा?
फुरसतिया ब्लॉग से

 

 
 
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