शनिवार, 01 नवम्बर, 2014 | 19:20 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    पार्टी में सभी तबकों को शामिल किया जाना चाहिए: मोदी  मथुरा में भाजपा युवा मोर्चा का पुलिस पर पथराव, दर्जनों जख्मी मुख्यमंत्री कार्यालय में बदलाव करना चाहते हैं फड़नवीस  चीन ने पूरा किया चांद से वापसी का पहला मिशन  आज चार राज्य मना रहे हैं स्थापना दिवस  जम्मू-कश्मीर में बदले जा सकते हैं मतदान केंद्र 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का वीडियो यूट्यूब पर हिट दिग्विजय सिंह की सलाह, कांग्रेस की कमान अपने हाथ में लें राहुल गांधी 'दिल्ली को फिर केंद्र शासित बनाने की फिराक में भाजपा' जनता सब देख रही है, बीजेपी हल्के में न लेः उद्धव ठाकरे
करुणा, आवेश और वैराग्य
श्री श्री रविशंकर First Published:03-01-13 07:03 PM

जब एक व्यक्ति ध्यान करता है, तो उसे हम तपस्या कहते हैं (केंद्रित प्रयत्न, जो शुद्धि और आत्मिक ज्ञानोदय प्रदान करता है)। लेकिन जब पूरे विश्व के लोग एक साथ जुड़कर ध्यान करते हैं, तो उसे यज्ञ कहा जाता है। यह और भी विशेष होता है, क्योंकि हम सत्व और तालमेल का एक क्षेत्र बना लेते हैं,  जिसकी आज विश्व को अत्यधिक आवश्यकता है। इसकी आवश्यकता क्यों है, यह आप सभी जानते हैं। हमें यह हमेशा याद रखना चाहिए कि हम नवीन भी हैं और प्राचीन भी हैं। सूर्य को देखिए, यह प्राचीन है, फिर भी आज कितना ताजा है। इसकी किरणें कितनी ताजा होती हैं, इसी तरह ब्रह्मांड के अन्य अवयवों पर गौर कीजिए। वायु ताजा है। पेड़ भी कितने ताजे हैं- पुराने पेड़, पुरानी शाखाएं और ताजे पत्ते! ऐसे ही, आप भी हैं नवीन और ताजे।

ऐसे ही आपको भी जीना चाहिए। इस अनुभव के साथ कि मैं प्राचीन हूं और नवीन भी, शाश्वत और अनंत भी! स्वयं को ताजा और नया अनुभव कीजिए। और आप देखेंगे कि कैसे आपके सम्मुख उपस्थित सारी समस्याएं और खेद सरलता से लुप्त हो जाते हैं। उत्साह कहीं बाहर से हममें नहीं आता, उसका उद्भव हमारे भीतर से होता है और फिर हर स्तर पर वह तालमेल बैठाने लगता है। याद रखिए, जीवन में आपको तीन चीजों की आवश्यकता है- करुणा, आवेश और वैराग्य। जब आप पीड़ा में हैं, व्यथित हैं, तब वैरागी रहिए। जब आप खुश हैं, तब आवेश रखिए। आपके जीवन में कोई धुन होनी ही चाहिए। सेवा करने की धुन तो सबसे अद्भुत चीज है, जिसकी लालसा हर व्यक्ति को होनी चाहिए। इसलिए, जब आप सचमुच खुश हों, तो सेवा करने के लिए हमेशा तत्पर रहिए। और जब कभी दुखी हों, तब वैरागी रहिए व सदैव करुणामयी रहिए।

 
 
|
 
 
टिप्पणियाँ