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चीन के बदले रूप पर किसिंजर की सोच
गौरीशंकर राजहंस, पूर्व सांसद और पूर्व राजदूत
First Published:02-01-13 09:46 PM
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर ने बीते साल के अंतिम दिनों में चीन के बारे में जो कुछ कहा, वह बताता है कि अमेरिका में चीन के बारे में किस तरह की राय बन रही है। गौरतलब है कि हेनरी किसिंजर हमेशा से चीन के प्रशंसक रहे हैं। उनसे जब यह पूछा गया कि चीन में जो नए नेताओं का चुनाव हुआ है, उससे चीन की राजनीति में कितना परिवर्तन आएगा और क्या यह देश अमेरिका का मित्र बन पाएगा?
इस वाला के उत्तर में किसिंजर का कहना था कि संसार के दो बड़े देश अमेरिका और चीन में राष्ट्रपति का चुनाव लगभग एक ही समय पर हुआ है। फर्क इतना है कि अमेरिका का राष्ट्रपति अपने देश में करीब-करीब सर्वशक्तिमान है और उसके अधिकारों पर पार्लियामेंट द्वारा बहुत कम अंकुश लगाया जा सकता है। परंतु चीन का राष्ट्रपति उतना स्वतंत्र नहीं है। उसे हर बात पर पोलित ब्यूरो की स्टैंडिंग कमेटी की मंजूरी लेनी होती है।
चीन के नए राष्ट्रपति शी जीनपिंग के बारे में पूछे जाने पर किसिंजर ने कहा कि उनकी तीन-चार बार मुलाकात शी से हुई है। वह उदारवादी विचारधाराओं के समर्थक हैं। किसिंजर ने कहा कि शी के पिताजी का संबंध सेना के शीर्ष अफसरों से बहुत ही मधुर था। अत: इस बात की पूरी उम्मीद की जानी चाहिए कि शी का सेना पर पूरा नियंत्रण रहेगा। परंतु सच्चई यह है कि काफी अर्से से चीन में सेना और सिविल सरकार के बीच रस्साकसी चल रही है और यह कहना बहुत कठिन है कि क्या शी सेना पर पूरा नियंत्रण प्राप्त कर सकेंगे। असल में, शी का विरोध हू जिंताओ के समर्थक कर रहे हैं। यह दिखाने के लिए कि सेना की असली कमान भी शी के हाथों में है, शी ने देश के परमाणु संयंत्रों के प्रमुख को अचानक जनरल का पद दे दिया। कोई चाहकर भी उनका विरोध नहीं कर सका।
हेनरी किसिंजर चाहे जो भी कहें, चीन में नए प्रधान ली केक्वीयांग और शी के बीच रस्साकसी जारी है। चीन के निवर्तमान प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने भ्रष्ट तरीके से अकूत धन अर्जित कर लिया है और अधिकतर धन विदेशी बैंकों में जमा है। यद्यपि उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया, पर दाग तो उन पर लग ही गया। इसलिए शी ने पदभार ग्रहण करते ही कहा कि वह सेना और सिविल सरकार, दोनों में भ्रष्टाचार को समाप्त कर देंगे। अपना पक्ष और भी अधिक मजबूती से रखने के लिए प्रधानमंत्री ली ने कहा कि कहने और करने में बहुत अंतर है। यदि भ्रष्टाचार का समूल नाश करना है, तो जल्दी से जल्दी शीर्ष पदों से सफाई करनी होगी।
किसिंजर चाहे जो कुछ कहें, चीन में एक तरह से अंदर ही अंदर सत्ता संघर्ष चल रहा है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि किसिंजर ने इस पर जरा भी प्रकाश नहीं डाला कि अपने पड़ोसियों के साथ चीन जो दादागिरी कर रहा है, उसके बारे में नए राष्ट्रपति और नए प्रधानमंत्री का क्या रुख होगा?
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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टिप्पणियाँ
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china ke log udarwadi niti ka sirf duniye ke samne dikhawa karte h jabki vo ese nahi jab kahi unka apna swarth dikhta h tab sab kuch bhool jate h
jai hind
By ajay tiwari (3rd-January-2013 07:55:PM)
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