रविवार, 23 नवम्बर, 2014 | 06:22 | IST
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सोचेंगे कि मार दिया जाए या छोड़..
के पी सक्सेना First Published:01-01-13 07:10 PM

कोहरे और धुंध भरी नए साल की सर्द सुबह मौलाना ने पीछे से आकर गुड़ की गजक का एक टुकड़ा मेरे मुंह में दिया और बोले- ‘भाई मियां, जैसा भी गुजरे, नया साल मुबारक हो। शायर भी कह गया है- इसी उम्मीद पर सदियां गुजार दीं हमने.. गुजिश्ता साल से शायद यह साल बेहतर हो। गांव से गन्ने का रस आया है। तुम्हारी भाभी रसावल पका रही हैं। बनते ही इत्तला करूंगा। बस तुम तैयार रहना।’ गजक का टुकड़ा मुंह में चुगलाते हुए बोले- ‘मेरा दिल तो यही कह रहा है मियां कि इस 2013 में कुछ तगड़ा खेल होगा जरूर। न्यूजें भी अभी से ही जोर मार रही हैं। छपा हैगा कि देश की आवाज.. बलात्कारियों को फांसी दो। दिल्ली में हुई दुखद घटना के बाद आक्रोश का गुब्बारा फूलता ही जा रहा है। सरकार अड़दब में फंसी है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। अब यह सरकार भला किस-किस को फांसी दें? जिनकी कोर्ट से कन्फर्म हो चुकी है उन्हें ही लटकाने का मामला अटका पड़ा है। कुल जमा एक विकेट गिरा है कसाब का। पूरी आतंकवादी टीम कब आउट होगी खुदा जाने या अपने होम मिनिस्टर शिन्दे जानें। यहां तो सारा सतुआ ही पतला हुआ पड़ा है।’

गजक खत्म हुई तो मौलाना मुंह में पान डालते हुए बोले, ‘चुनाव सिर पर आने को है। जिस जूते में पांव डाले कांग्रेस उसी में काक्रोच पैर जमा चुका है। और अब यही लोग जनता को दिलासा दे रहे हैं कि दोनों सदनों में बलात्कार के लिए फांसी का बिल आएगा। समय आने पर वहीं फैसला होगा कि रेपिस्ट को मार दिया जाए या छुट्टा छोड़ दिया जाए। अब कुछ भी हो इसमें टाइम तो लगेगा ही। फास्ट ट्रैक कोर्ट भी कितना फास्ट दौड़ेगा? तब तक जितने बदकिस्मत हादसे और होने हैं हो लें। कानून बनते ही धायं-धायं सबको एक मुश्त फांसी दे देंगे। वे लगातार कह रहे हैं कि पब्लिक और बलात्कार पीड़ित को सरकार पर भरोसा रखना चाहिए। पहले जो भरोसा रखा था उसका नतीजा तो भोग ही रहे हैं। हमारी सरकार ने जैसे और ‘नेक काम’ किए हैं देश के लिए वैसे ही फांसी देने का बिल भी आएगा। कीप पेशेंस.. एंड जय हिंद।’

 
 
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