सोमवार, 21 अप्रैल, 2014 | 02:26 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    गिरिराज, गडकरी, अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर भाजपा क्या आडवाणी को भी पाकिस्तान भेजेगी: कांग्रेस सेना-प्रमुख के लिए लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह का नाम आगे मतदान नहीं करने वालों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए: आडवाणी कांग्रेस, सपा और बसपा ने देश को लूटा: राजनाथ सिंह सपा युवाओं की पार्टी, इसलिए अखिलेश को सीएम बनाया: मुलायम यूपी के सुलतानपुर से दो वरुण गांधी हैं मैदान में आडवाणी की तरह वाजपेयी को भी किनारा लगाते मोदी: राहुल राजनाथ ने विवादित बयान पर गिरिराज को फटकारा  राहुल अमेठी नहीं संभाल सकते, देश कैसे संभालेंगे: मोदी
 
सरल जिंदगी की राह
ब्रह्मकुमार निकुंज
First Published:01-01-13 07:09 PM
 imageloadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ-

आजकल के नौजवान अक्सर बोलते हैं, ‘टेक इट इजी’ व ‘जस्ट चिल्ल।’ लेकिन क्या जीवन की आपाधापी के बीच ‘टेक इट इजी’ व ‘जस्ट चिल्ल’ वाला रवैया संभव है? नकारात्मक अनुभवों और अशांतिग्रस्त परिस्थितियों के बीच रहकर खुद को हल्का और आसपास के वातावरण को शांत रखना, यह आज के युग में सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए हमें सबसे पहले अपने अंदर छिपी-दबी हुई आत्मिक शक्ति को उजागर करना होगा, क्योंकि यही वह ऊर्जा है, जिससे हम जीवन में आने वाली हर चुनौती का सरलता से मुकाबला कर सकते हैं। कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति का मानसिक संतुलन उसके इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों, वस्तुओं और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इस पर निर्भर करता है कि वह इन्हें किस नजरिये से देखता है। एक दार्शनिक ने कहा है कि हम परिस्थिति को बदल नहीं सकते, लेकिन उनके प्रति देखने का अपना दृष्टिकोण अवश्य बदल सकते हैं।

मगर देखा गया है कि जब वास्तविक स्थिति हमारे समक्ष आती है, तब हमारे मन में बसे नकारात्मक पूर्वाग्रहों के कारण सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है। इसलिए ही यह कहा जाता है कि ‘जैसा सोचें, वैसा बनें। ’हमारे दृष्टिकोण का बीज है, हमारी विश्वास प्रणाली। हमारी विश्वास प्रणाली की सबसे बड़ी खामी है ‘देह अभिमान’, अर्थात स्वयं को अजर-अमर, अविनाशी आत्मा समझने की बजाय विनाशी, हाड़-मांस का शरीर समझना। यह विचार ही आज के मनुष्य के दुख का मूल कारण है। समाज में हो रहे सारे दुष्कर्मों का कारण भी यही देह की दृष्टि है। हमें यह एहसास होना चाहिए की ज्योतिस्वरूप चैतन्य आत्मा का स्वाभाविक गुण हैं- प्रेम, शांति और सुख। अत: जितना हम अपने आत्मिक स्वरूप की स्मृति में रहकर देह को एक साधन समझकर कार्य में लाएंगे, उतना हम इजी और निश्चिंत रहेंगे। साथ ही दूसरों को भी इजी और निश्चिंत रख पाएंगे।

 
 imageloadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ- share  स्टोरी का मूल्याकंन
 
 
टिप्पणियाँ
 
Image Loadingगिरिराज, गडकरी, अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर
बिहार भाजपा के नेता गिरिराज सिंह, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के खिलाफ रविवार को एक प्राथमिकी दर्ज की गई।
 

लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें

आज का मौसम राशिफल
अपना शहर चुने  
आंशिक बादलसूर्यादय
सूर्यास्त
नमी
 : 06:47 AM
 : 06:20 PM
 : 68 %
अधिकतम
तापमान
20°
.
|
न्यूनतम
तापमान
13°