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‘मंगल’-मय नया साल, तेरा क्या होगा दो हजार तेरह
अशोक संड
First Published:31-12-12 07:25 PM
नया साल मंगल(वार) से शुरू हो मंगल(वार) पर ही समाप्त होगा। आदि से अंत तक मंगल। ‘मय’ की भूमिका नेपथ्य में। पहली जनवरी तमाम अंधविश्वासों का राष्ट्रीय दिवस भी है। अहसासे-कमतरी वाले बाबू सोचते हैं कि साल के पहले दिन ’विश’ करने पर साहब ने कहीं झिड़क दिया तो पूरा साल डांट खाते ही बीतेगा। आज उधार लिया तो साल भर उधार लेते रहेंगे। जितना सीना तान कर नए साल पर अखबारों में राशिफल आता है उतना कोई और नहीं। मेष से लेकर मीन तक पूरे साल की भविष्यवाणी। सज जाती हैं ज्योतिष की दुकानें। लीड स्टोरी में शनि की साढ़े साती। स्ट्रैप लाइन में जीवन में हलचल और उतार चढ़ाव। सिंह राशि के जातक कन्या जैसा आचरण और कन्या राशि वाले सिंघनाद करेंगे। शुरू के तीन महीने कष्ट-प्रद, कर्क को आर्थिक कष्ट, मीन को पानी से भय, मिथुन के जातकों के लिए पति-पत्नी में तनाव योग वगैरह वगैरह। इसे पढ़कर भला कौन हैप्पी न्यू इयर मनाएगा।
साल के पहले दिन ही टेंशन। ज्योतिष से बचो तो तो एस एम एस की चिक-चिक। सुख-समृद्घि की कामना करते हितैषी, मित्र-गण, रिश्ते के प्रति आभार प्रगट करते सर्व-जन। पहले दिन ‘विश’ करो बाद में ‘विष’भरो।
शुभ-कामना के क्षेत्र में भी कम अराजकता नहीं। हर शख्स की अपनी कामना वही उसका शुभत्व। उसकी (मनो)कामना में हमारी आपकी कामना अधिकांशत: अशुभ ही होती है। मिसाल के लिए मुनाफा-खोर, हेरा-फेरी करनेवाले व्यापारी को इस अंतर-राष्ट्रीय शुभ-कामना पर्व पर ईमानदार होने की शुभ-कामना उसे भड़का सकती है, तिलमिला जायेगा वो। इसी प्रकार हमेशा भ्रष्टाचार के स्विमिंगपूल में तैरने वाले मानुष को यदि सदाचार की कठौती में वाले जल में डूबकी लगाने की शुभ-कामना दी जाए तो बिना तौलिया लपेटे दौड़ा लेगा वह। बन्धु-बांधवों और संकट में काम आने वाले पावरफुल लोगों को शुभकामना देने वाला वायरस विचर रहा है वायुमंडल में। अंत में पराई लाइन का सहारा... कैसे मिलेंगे अबके बरस दिन कमाल के, पिछला बरस तो गया कलेजा निकाल के.... तेरा क्या होगा दो हजार तेरह।
शुभ-कामना के क्षेत्र में भी कम अराजकता नहीं। हर शख्स की अपनी कामना वही उसका शुभत्व। उसकी (मनो)कामना में हमारी आपकी कामना अधिकांशत: अशुभ ही होती है। मिसाल के लिए मुनाफा-खोर, हेरा-फेरी करनेवाले व्यापारी को इस अंतर-राष्ट्रीय शुभ-कामना पर्व पर ईमानदार होने की शुभ-कामना उसे भड़का सकती है, तिलमिला जायेगा वो। इसी प्रकार हमेशा भ्रष्टाचार के स्विमिंगपूल में तैरने वाले मानुष को यदि सदाचार की कठौती में वाले जल में डूबकी लगाने की शुभ-कामना दी जाए तो बिना तौलिया लपेटे दौड़ा लेगा वह। बन्धु-बांधवों और संकट में काम आने वाले पावरफुल लोगों को शुभकामना देने वाला वायरस विचर रहा है वायुमंडल में। अंत में पराई लाइन का सहारा... कैसे मिलेंगे अबके बरस दिन कमाल के, पिछला बरस तो गया कलेजा निकाल के.... तेरा क्या होगा दो हजार तेरह।
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