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नया साल, नया संकल्प
First Published:30-12-12 07:55 PM

कैलेंडर के पन्ने के साथ वर्ष तो नया हो जाएगा, लेकिन क्या आप भी नए होंगे या कि पुराने ही रहेंगे? यह आपके संकल्प पर निर्भर है। नए साल के लिए सबसे बड़ा संकल्प यही होगा कि अपने भीतर जो-जो पुराना है, उसे विगत होते साल के साथ तिलांजलि दे दें, जैसे सांप अपनी केंचुली को छोड़कर बाहर निकलता है।
ओशो सदा नए के पक्षधर हैं। पेश हैं कुछ ओशो सूत्र, जिनका अभ्यास करें, तो आप भीतर से नए हो सकते हैं। आपके जो भी अधूरे काम हों, उन्हें पूरे कर लीजिए। अधूरे कामों में आपकी बहुत-सी ऊर्जा अटकी होती है। उन्हें पूरा करने से आपकी उलझी हुई ऊर्जा मुक्त होगी। काम पूरा नहीं होता, तो वह आपके दिमाग में बना रहता है, दस्तक देता रहता है कि मुझे पूरा करो। जब तक आप उसे पूरा नहीं कर लेते, तब तक वह आपके चारों ओर मंडराता रहता है। इसलिए बेहतर है कि उसे पूरा कर डालें। जो भी कर रहे हैं, उसमें पूरा मौजूद रहें। अगर आप स्नान कर रहे हैं, तो उसे पूरी समग्रता से कीजिए। स्नान करते समय सोच-विचार में न उलझे रहें, अपने शरीर से फिसलती हुई पानी की बूंदों के स्पर्श का आनंद लें, उसे जियें, उसे महसूस करें। भोजन कर रहे हैं, तो पूरी तरह करें, बाकी सभी चीजें भूल जाएं। आपकी मौजूदा क्रिया के अलावा इस दुनिया में आपके लिए उस समय और कुछ नहीं हो। हर काम बिना किसी जल्दबाजी के, इतने धैर्य के साथ, इतनी संपूर्णता के साथ करें कि मन सराबोर होकर संतुष्ट हो जाए।

रात को सोने से पहले बिस्तर पर बैठ जाएं और अपनी स्मृति में पीछे की ओर यात्रा करें- उलटी दिशा में। पूरे दिन की घटनाओं को एक फिल्म की तरह देखें, जो किसी और के जीवन में घट रही हैं। इससे आपका दिन भर का बोझ हल्का होगा। घटनाओं से तादात्म्य होने के कारण जो सुख या दुख होता है, उससे एक दूरी बनेगी।
अमृत साधना

 

 
 
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