मंगलवार, 30 जून, 2015 | 09:01 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    कश्मीर मामले पर चीन की ओर से आया बड़ा बयान, बताया विवादित क्षेत्र अमिताभ, सलमान और धोनी दुनिया के हाइएस्ट पेड सेलिब्रिटीज़ में शामिल विदेश मंत्रालय ने ललित मोदी प्रकरण पर जवाब क्यों नहीं दिए: पी चिदंबरम सलमान और मैं अब दोस्त बन गये हैं, सब कुछ साथ करेंगे: शाहरुख खान PHOTO: सचिन ने खींची बेटी सारा के साथ सेल्फी, इंटरनेट पर हुई वायरल बांग्लादेश में जिसे धौनी ने प्लेइंग इलेवन से किया बाहर, BCCI ने उसी रहाणे को बनाया नया कप्तान जब 1200 पाकिस्तानी सैनिकों पर भारी पड़ा एक हिन्‍दुस्तानी, पढ़िए पूरी कहानी तिहाड़ में सुरंग: LG ने दिए जांच के आदेश, कैदी की भी तलाश जारी व्यापमं आरोपियों की मौत सामान्य, सीबीआई जांच की जरूरत नहीं: गौर आर्डिनेंस फैक्टरियों ने रक्षा मंत्रालय को उत्पादन घटने की चेतावनी दी
अपराधियों के लिए सजा की मांग करने वाले हैं लोकतंत्र विरोधी
नीरज बधवार First Published:27-12-12 07:10 PM

अगर आप अलग-अलग पार्टियों के सांसदों पर नजर डालें, तो पाएंगे कि जाति, धर्म, नीतियों को लेकर इनमें कितना भी मतभेद क्यों न हो, पर एक चीज जो इन्हें आपस में जोड़ती है, वह है अपराधी। लोकसभा में 150 सांसद ऐसे हैं, जो आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। उनमें 71 के खिलाफ तो रेप व हत्या के मामले दर्ज हैं। अब हो सकता है किसी एक पार्टी से किसी एक जाति के लोग ज्यादा चुने जाएं और दूसरी से किसी और के, मगर जहां तक ‘अपराधियों’ की बात है, यह एकमात्र ऐसी कौम है, जिसे हर पार्टी में समान प्रतिनिधित्व हासिल है। दूसरे शब्दों में कहें, तो अपराधी भारतीय राजनीति की इकलौती ‘आम सहमति’ है।

ऐसे में, जब लोग मांग करते हैं कि बलात्कारियों को फांसी दो, हत्यारों को सूली पर चढ़ाओ, तो उनसे पूछा जा सकता है कि अगर इन्हें सजा दे दी गई, तो लोकतंत्र क्या आपके पिताजी चलाएंगे? अच्छे लोग राजनीति में आना नहीं चाहते और बुरों को बुरा बनने से पहले ही फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा, तो चुनाव लड़ने के लिए लोग क्या हम मंगोलिया से लाएंगे? वैसे भी अभी राजनीति में एफडीआई लागू नहीं हुआ है। दूसरा, जब एक जाति विशेष का व्यक्ति चुने जाने के बाद अपने लोगों का खयाल रख सकता है, तो अपराधी क्यों नहीं? क्या उसका अपराध सिर्फ यह है कि वह अपराधी है?

रही बात इंडिया गेट पर हुए लाठीचार्ज और वहां आई लड़कियों से किसी के न मिलने की, तो इसमें भी गलती लड़कियों की थी। गलती यह कि वे वहां सिर्फ ‘लड़की’ बन इंसाफ मांगने गईं, अगर वे पहले बता देतीं कि विरोध कर रही लड़कियों में 30 फीसदी ओबीसी, 20 फीसदी एससी व 10 फीसदी मुस्लिम हैं, तो पार्टियां अपने आप उन्हें बचाने वहां पहुंच जातीं। यह कहना भी गलत है कि लड़कियों को इंसाफ नहीं मिला। इंसाफ यानी कानून के मुताबिक इंसान जो डिजर्व करे, उसे वह दिया जाए। इंडिया गेट पर धारा 144 लगी थी। बावजूद इसके लड़कियां वहां पहुंची। उन्होंने कानून तोड़ा। कानून तोड़ने पर पुलिस ने उन्हें तोड़ा। मतलब उन्हें वह मिला, जो वे डिजर्व करती थीं। क्या अब भी आपको लगता है कि उन्हें इंसाफ नहीं मिला?

 
 
 
|
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
Image Loadingअमिताभ, सलमान और धोनी दुनिया के हाइएस्ट पेड सेलिब्रिटीज़ में शामिल
बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन, सलमान खान, अक्षय कुमार और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धौनी 100 सबसे अधिक पेड सेलिब्रिटी में शामिल हैं। हालांकि इस सालाना सूची में अमेरिकी बॉक्सर फ्लॉइड मेवेदर शीर्ष स्थान पर हैं।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड