सोमवार, 31 अगस्त, 2015 | 14:19 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
ब्रेकिंग
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की याचिका खारिज की, हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में नहीं मिले सही आधार, सही आधार के साथ साथ नए सिरे से याचिका दायर की जा सकती है।केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने बोधगया IIM का किया उदघाटन, बिहार के शिक्षा मंत्री पीके शाही भी कार्यक्रम में थे मौजूद।झारखंड: बोकारो में दो राजस्व कर्मी घूस लेते पकड़ाए, पूछताछ के बाद दोनों को रांची ले जाया गया।उत्तराखंडः लक्सर के भोगपुर क्षेत्र में दीवार से टकराई कार, दो लोगों की मौत, टांडा गांव के रहने वाले थे दोनों मृतक।सुषमा स्वराज ने की बिहार के सीएम नीतीश कुमार से बात, विश्व हिंदी सम्मेलन में आने का किया अनुरोध।
मन की शांति
ब्रह्मकुमार निकुंज First Published:27-12-2012 07:09:23 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

साइलेंस प्लीज। यह शब्द बचपन से हम स्कूल, कॉलेज व कचहरी में सुनते आए हैं। दो अक्षरों वाले इस शब्द ‘शांति’ के पीछे कौन-सा गहरा राज छिपा  है? शांति क्या है, इस पर दुनिया में आज तक बहुत कुछ सोचा और विचारा गया है, लेकिन कोई नहीं जान पाया कि शांति को हासिल कैसे किया जाए? यह भी पहेली है कि वास्तव में सच्ची शांति किसे कहेंगे? मनुष्य क्या उसे अपने जीवन में हासिल कर सकता है? आध्यात्मिक दृष्टि से यदि देखा जाए, तो इंसान के भीतर की दिव्य शक्ति (आत्मा) और परम दिव्य शक्ति (परमात्मा) के बीच के सेतु संवाद को ‘यथार्थ शांति’ कहा गया है। आध्यात्मिक शांति की गहराई में जाने से हम अनमोल हीरे-मोती प्राप्त कर सकते हैं। जैसे भौतिक शरीर के लिए सांस लेना जरूरी है, वैसे ही सूक्ष्म शरीर के लिए शांति की अनुभूति करना अति आवश्यक है। शांति हमारी मानसिक व भावनात्मक ऊर्जा को चरम बिंदु तक ले जाती है, जिससे हम बिंदु स्वरूप में स्थित होकर परमानंद की अनुभूति कर सकते हैं।

आंतरिक शांति के बिना हम कठपुतली की तरह विभिन्न बाहरी परिस्थितियों के तारों से यहां-वहां खिंचते रहते हैं। शांति एक दर्पण की तरह है। दर्पण किसी की भी आलोचना नहीं करता, सभी चीजों का सच्च प्रतिबिंब हमें दिखाता है और हमें सभी प्रकार के व्यर्थ विचारों के जाल से मुक्त होने में मदद करता है। अत: मन की सच्ची शांति की अनुभूति के लिए हमें सर्वप्रथम अपने भीतर जाकर अपने अनंत आत्मिक स्वरूप में स्थित होने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा करके हम विस्मृत हुई भावनाओं और स्मृतियों को फिर से प्रतिबिंबित व जागृत कर मगन अवस्था में लीन होकर परमानंद व प्रेम के झूले में झूलकर आत्मिक तृप्ति का अनुभव कर सकते हैं। यही आत्मिक तृप्ति फिर विश्व शांति का आधार बनती है। इसीलिए ज्ञान से आलोकित आत्माओं का कहना है कि ‘मन की शांति ही सच्चा सोना है।’

 
 
 
|
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
Image Loadingरोहित का अर्धशतक, भारत को 243 रन की बढत
श्रीलंका के खिलाफ तीसरे और आखिरी क्रिकेट टेस्ट में भारत ने चौथे दिन लंच तक पांच विकेट पर 132 रन बना लिये, जिससे उसकी कुल बढत 243 रन की हो गई।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
 
Image Loading

सीसीटीवी कैमरों का जमाना है...
पिता: एक समय था, जब मैं 10 रुपए में किराना, दूध, सब्जी और नाश्ता ले आता था..
बेटा: अब संभव नहीं है, पापा अब वहां सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं।