शुक्रवार, 28 नवम्बर, 2014 | 23:33 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
ब्रेकिंग
यूपी के वरिष्ठ आईएएस राजीव अग्रवाल को सचिव आवास अवाम शास्त्री नियोजन और ग्रीन विभाग से हटाया गयाहल्द्वानी में मुख्यमंत्री के काफिले पर पथराव
गलत मत कदम बढ़ाओ, सोचकर चलो
First Published:26-12-12 09:28 PM

कुछ लोग हड़बड़ी में कुछ भी कह-बोल देते हैं और कोई भारी गड़बड़ हो जाती है। कई लोग ऐसी गलती नहीं करते, वे हर काम काफी सोच-समझकर, पूरा वक्त लेकर करते हैं और ज्यादा भारी गड़बड़ कर देते हैं।

हमारा सौभाग्य है कि हमारी सरकार चलाने वालों पर हम यह आरोप नहीं लगा सकते कि वे अगंभीरता से जल्दबाजी में फैसले करते हैं। वे सड़क पार करते वक्त पहली कक्षा में बताए मुताबिक पहले दाहिनी तरफ देखते हैं, फिर बाईं तरफ, फिर दाएं देखते हैं, फिर बाएं देखते हैं, फिर दाहिनी और बाईं तरफ देखते हैं और आखिरी बार दाहिनी तरफ देखकर सड़क पार करते हैं। यह बात और है कि इस बीच एक बस दाएं से चली आती है और उन्हें टक्कर मारकर चली जाती है।

हमारे गृह मंत्री के घर के बाहर आग लग जाए, तो वह तुरंत पानी की बाल्टी लेकर नहीं दौड़ेंगे। वह सोचेंगे कि अगर आज मैं पानी की बाल्टी लेकर दौड़ा, तो कल असम में कहीं आग लगेगी, तो मुझसे यह उम्मीद की जाएगी कि मैं बाल्टी लेकर दौड़ूंगा। परसों महाराष्ट्र में आग लग सकती है, उसके अगले दिन माओवाद ग्रस्त बस्तर के जंगलों में आग लगेगी, तो मैं कहां-कहां दौड़ूंगा। फिर वे तय करते हैं कि पानी की बाल्टी लेकर दौड़ना अच्छा फैसला नहीं होगा? इस बीच हो सकता है कि उनके घर सहित दो-चार घर और जल जाएं।

ऐसी ही दूर की सोच प्रधानमंत्री की भी है। वह सोचेंगे कि पहले देख लेते हैं कि आग कितनी दूर तक फैलती है। हो सकता है कि वह अपने आप ही बुझ जाए। दो दिन बाद भी आग जलती रही, तो वह सोचेंगे कि पानी डाला जाए, या फूंक मारी जाए। गंभीर विचार के बाद वह तय करेंगे कि पानी ही ठीक रहेगा। फिर यह विचार करेंगे कि कितना पानी डाला जाए, एक चम्मच काफी होगा, एक ग्लास डालना होगा या एक बाल्टी की जरूरत होगी।

सलाह करने के बाद वह तय करेंगे कि कुछ भी किया जाए, कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि आग में सब कुछ जलकर राख हो चुका है। पर उन्हें बताया जाएगा कि बतौर पीएम उन्हें कुछ तो करना होगा। तब वह चम्मच भर पानी ले जाकर अंगारों पर डालेंगे और पूछेंगे- ‘ठीक है?’
राजेन्द्र धोड़पकर

 

 
 
|
 
 
टिप्पणियाँ