शनिवार, 22 नवम्बर, 2014 | 05:33 | IST
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लीक से हटकर
First Published:26-12-12 09:28 PM

उनके काम को लेकर मीन-मेख निकालने का एक माहौल-सा बन गया था। सभी कहते, जो काम सीधे रास्ते हो सकता है, उसे वह जटिल बनाकर करते हैं। ऐसे दौर भी आए कि बॉस से उन्हें प्रोजेक्ट मिलने बंद हो गए। आखिर मुख्यालय से आए एक पत्र ने सब कुछ बदल दिया।

पत्र में उनके काम की तारीफ थी और ब्योरेवार बताया गया था कि कंपनी को आगे क्या-क्या फायदे हो सकते हैं। दरअसल, गैर पारंपरिक कामों का विरोध होना अस्वाभाविक नहीं। विरोधी स्वर उठते रहते हैं और यदि आप सही हैं, तो आपका अपने काम में जुटे रहना जरूरी है।

पंडित रवि शंकर ने जब बैंड ग्रुप बीटल्स के जॉर्ज हैरिसन और फिर येहुदी मेनहिन के साथ जुगलबंदी की, तो आलोचकों ने उन्हें अपरिपक्व करार दिया। पूरब और पश्चिम के संगीत के उस संगम का मजाक उड़ाया गया, लेकिन आखिरकार इसे मान्यता मिली और एक समय के आलोचकों ने भी उनके बनाए मार्ग पर बढ़ने में भलाई समझी।

यह तय समझिए कि आप लीक से हटे नहीं कि अवरोध पैदा किए जाएंगे, आपका सामना भृकुटि ताने, नथुने फुलाए लोगों से होगा। ऐसे लोगों से होगा, जो आपके अस्तित्व को चुनौती देंगे, लेकिन आप डटे रहे, तो स्थितियां कुछ ठहराव के बाद बदल जाएंगी। तो क्यों नहीं हम और आप लीक से हटकर काम करते हैं?

दरअसल, इसके बाद होने वाले विरोध को लेकर हम डरते हैं, लेकिन मानसिक रवैये में थोड़ा बदलाव कर लें। ऐसा करना आसान भी है और जरूरी भी। विचारक विलियम जोन्स कहते हैं कि हमारी सबसे महान खोज है कि हम अपना मानसिक रवैया बदलकर इंसान की जिंदगी बदल सकते हैं। जोन्स ने साधारण शब्दों में एक असाधारण बात कही। पिकासो ने कहा कि किसी काम को करने के जितने अधिक तरीके आपने विकसित किए, आप उतने ही असाधारण हैं। आगे से आपको लीक के रास्ते ललचाएं, तो पिकासो की बात याद रखें।
नीरज कुमार तिवारी  

 

 
 
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