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खबरदार.., अब भूखा नहीं रहने दिया जाएगा
के पी सक्सेना First Published:25-12-2012 08:01:48 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

गोमती के किनारे से लड़ रहे पेच की कनकइया जैसे मौलाना मोहल्ले के बसंत लाल से उलझे पड़े थे। लताड़कर बोले, ‘लाला, मुल्क में वालमार्ट आए या बवालमार्ट आए, हमें तो सौदा- सुलुफ फत्ते खान की दुकान से ही खरीदना है। विदेशी अड्डे पर से खरीदा हुआ अंडा न जाने किस जानवर का हो? हम तो उसूल वाले लोग हैं। यह थोड़ा ही कि बाहर-बाहर विरोध में चिल्लाए जा रहे हैं.., और अंदर ही अंदर सपोर्ट भी कर दिया, चुपके से। सरकार ने सब्सिडी के गैस सिलेंडर (वोट के लालच में) छह से नौ कर दिए। जब पड़ी फटकार चुनाव आयोग की, तो फिर जाकर वही छह हो गए। अब भई बाकी सब तो अंदर की बात है। ऐसी कबाड़ राजनीति हमारे अब्बा के वालिद के फादर तक ने न देखी।’

मुंह में पान कुलकुलाकर मौलाना आगे बोले,‘जाड़ा पीक पर जा रहा है। न्यूजें भी कोहरे जैसी चारों तरफ छा रही हैं। छपा हैगा कि ‘ताकि कोई परिवार भूखा न रहे।’ नहीं समझे? अरे भई, अपनी नेता सोनिया गांधीजी ने फरमाया है कि जल्द ही संसद में ऐसा विधेयक लाया जाएगा कि देश का कोई परिवार भूखा न रहे। यानी जब तक विधेयक नहीं आता और पारित नहीं हो लेता, सिर्फ तब तक के लिए परिवारों को भूखे रहने की छूट है। विधेयक के पारित हो चुकने और कानून बनने के बाद अगर कोई परिवार भूखा रहता है, तो उसे सख्त से सख्त सजा मिलेगी और शायद जबर्दस्ती खाना खिलाया जाएगा। भाई मियां, जब-जब चुनाव नजदीक आया, अगलों ने कील ठोक दी कि हम किसी भी परिवार को भूखा नहीं मरने देंगे। ..चुनाव के बाद मर  लो चाहे।’

बिना सुपारी-तंबाकू का एक पान मुङो थमाकर वह बोले, ‘गरीब की भूख से खेलना इसे ही कहते हैं, जनाब। आजादी से लेकर आज तक कितने ही बेसहारा परिवार भूखों मर लिए और गद्दीनशीन लोग गाल बजाते रह गए। एक बार करीब से देख तो लिया होता कि भूख क्या होती है और निर्धन परिवार क्यों भूखे रहते हैं। पर जिसे सिर्फ सत्ता की भूख है मियां, वह रोटी न मिलने का दर्द नहीं समझ सकता, और न भूखे लोगों की पीड़ा। बस विधेयक लाओ और संसद में चिहाड़ मचाओ। दैट्स ऑल ऐंड..जय हिंद।’

 
 
 
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