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मैदान से लेना चाहिए था सचिन को संन्यास
शिवेंद्र कुमार सिंह, विशेष संवाददाता, एबीपी न्यूज
First Published:24-12-12 07:15 PM
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ऐसा नहीं है कि सचिन तेंदुलकर के संन्यास के बाद देश को उनकी महानता का अहसास हो रहा है। लेकिन हैरान करने वाली बात है संन्यास का उनका तरीका। सचिन जैसे बड़े कद के खिलाड़ी के लिए बेहतर होता अगर वो मैदान से संन्यास का एलान करते। यानी मैच खेलते और मैच खेलने के बाद सालों—साल तक प्यार करने वाले और सर आंखों पर बिठाने वाले अपने फैंस का अभिवादन स्वीकार करते हुए मैदान से दूर हो जाते। लेकिन टेस्ट क्रिकेट की खराब फॉर्म के बाद उनके सन्यास को लेकर हो रहे हो—हल्ले ने उन्हें मैदान के बाहर से ही सिर्फ एक प्रेस रिलीज के जरिए संन्यास लेने के लिए मजबूर कर दिया। बेहतर होता अगर सचिन पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज खेलने के लिए हामी भरते और साथ ही ये एलान कर देते कि वे इसके बाद वनडे क्रिकेट नहीं खेलेंगे। साथ ही यह भी बताते कि वे टेस्ट क्रिकेट कब छोड़ रहे हैं। वनडे से संन्यास के एलान के बाद कयास इस बात पर लगने लगे हैं कि वे टेस्ट क्रिकेट से कब रिटायर होंगे?

पूरे करियर में गेंद को सही ‘टाइमिंग’ के साथ बाउंड्री के बाहर पहुंचाने वाले सचिन के इस एलान की ‘टाइमिंग’ सही नहीं की। वनडे क्रिकेट को अलविदा कहने के दो बड़े मौके वे चूक गए। 2 अप्रैल 2011 को मुंबई में विश्व कप जीतने के बाद जब उन्हें साथी खिलाड़ियों ने कंधे पर बिठाकर स्टेडियम का चक्कर लगवाया था, तब सचिन वनडे क्रिकेट से संन्यास का एलान कर सकते थे। उसके बाद 16 मार्च 2012 को जब उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ शतक लगाकर अंतर्राष्ट्रीय करियर का सौंवा शतक पूरा किया तब भी सचिन अपना यह ‘मास्टर स्ट्रोक’ खेल सकते थे। चौंकाने वाली बात ये भी है कि विश्व कप फाइनल के बाद से लेकर अब तक सचिन ने सिर्फ 10 वनडे मैच खेले हैं। उन 10 वनडे मैचों में उनकी औसत 30 से ज्यादा की थी।

इसीलिए पाकिस्तान के खिलाफ वनडे टीम के चयन से पहले ये खबरें भी थीं कि सचिन वनडे सीरीज खेलने के लिए उपलब्ध हैं। तर्क यह था कि वो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलना चाहते हैं और खुद को मैच फिट रखने के लिए वो लगातार वनडे क्रिकेट खेलते रहना चाहते हैं। लेकिन इन सारी ‘थ्योरी’ को गलत साबित करते हुए सचिन ने बीसीसीआई के अध्यक्ष से बातचीत कर ये एलान कर दिया। खिलाड़ियों के संन्यास को लेकर दो बातें कही जाती हैं। पहली यह कि खिलाड़ी को संन्यास तब लेना चाहिए, जब लोग पूछें- अभी क्यों?

उस समय नहीं, जब लोग पूछें- अब तक क्यों नहीं?  दूसरी बात जो कही जाती है, वह ये कि जब कोई बहुत बड़ा खिलाड़ी मैदान के बाहर से ही संन्यास का एलान कर दे, तो इसका अर्थ है कि यह फैसला उसका अपना नहीं, किसी दबाव की वजह से लिया गया है। सचिन के संन्यास में आप इन दोनों ही बातों को देख सकते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 
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नरेन्द्र मोदी से ‘हिन्दुस्तान’ ने ई-मेल के जरिए उनसे जुड़े तमाम विवादों और सवालों पर सीधे सवाल किए। जवाब भी वैसे ही मिले...सपाट पर बेहद संयत। वे कठिन परिश्रम का वादा कर देश को आगे बढ़ाने की इच्छा जताते हैं।
 

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