शनिवार, 25 अक्टूबर, 2014 | 09:02 | IST
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सांता क्लॉज और क्रिसमस
First Published:24-12-12 07:12 PM

क्रिसमस के साथ सांता क्लॉज का चरित्र काफी घनिष्टता से जुड़ा हुआ है। लाल रंग के सिले हुए विशेष चोगे के साथ, सफेद चोटी वाली टोपी, बड़ी-बड़ी सफेद दाढ़ी पहने हुये सांता क्लॉज या क्रिसमस फॉदर इतने ज्यादा प्रसिद्ध हैं कि कई लोग भूल जाते हैं कि क्रिसमस का त्योहार जीसस के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है न कि सांता क्लॉज के। हालांकि सांता क्लॉज को लेकर बच्चों सबसे ज्यादा खुश होते हैं, क्योंकि उन सबको क्रिसमस के कई उपहार मिलते हैं, पर चर्च के कई अधिकारी, सांता क्लॉज को इतना ज्यादा महत्व मिलने से प्रसन्न नहीं हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे क्रिसमस का जो खास अर्थ है, वह फीका पड़ जाता है। साथ-साथ ये क्रिसमस के व्यापारीकरण से भी जुड़ा हुआ।

सांता क्लॉज की कहानी लगभग छठी सदी में लोकप्रिय हुई, जिसका संबंध वास्तव में चौथी सदी के ग्रीस के बड़े उदार दिलवाले एक बिशप से है। उनका नाम था निकोलस। कहा जाता है कि गरीबों और बेघरों की सहायता करने के लिए वे रात के समय अपना वेष बदलकर लोगों को दान देने निकल पड़ते थे। सांता क्लॉज का त्यौहार चर्च में 06 दिसम्बर को पड़ता है। तो दिसम्बर का महीना और सांता क्लॉज का दान व उपहार देना क्रिसमस से जुड़ गया। ये प्रथा विदेशों में खूब जोर-शोर से मनायी जाती है। भले ही सांता क्लॉज का क्रिसमस से सीधा संबंध न हो, फिर भी हमें एक चीज सीखने को मिलती है कि इस सुंदर प्रथा के पीछे अदान-प्रदान और दान की भावना।

विशेषकर अगर ये भावना, गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति प्रकट हो। इसका अर्थ यह भी होगा कि हमारे उपहारों का आदान-प्रदान केवल परिवार के सदस्यों तक ही सीमित ना रहकर, अगर जरूरतमंदों तक पहुंचे तो हमारा मन भी खुश होगा व गर्व से भर उठेगा। हमारा क्रिसमस तो खूबसूरत मनेगा ही साथ ही हमारी खुशियों में शामिल होंगी सच्चे दिल से दी गईं ढेर सारे लोगों की शुभकामनाएं।   
फॉदर डॉमिनिक एम्मानुएल

 
 
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