मंगलवार, 04 अगस्त, 2015 | 04:50 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    अगला बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी राबड़ी देवी कांवड़ यात्रा से बरेली के कई पंपों पर डीजल-पेट्रोल खत्‍म  आखिर यूं ही नहीं बनती 'बाहुबली', जानिए 10 बेहद खास राज  भारत से प्रभावित होकर अंग्रेजों ने ब्रिटेन में भी बसा दिया 'पटना'  तृणमूल ने दिखाई कांग्रेस के साथ एकजुटता, लोकसभा की कार्यवाही का पांच दिनों तक करेगी बहिष्कार 14 साल से पाकिस्तान में फंसी भारतीय लड़की को बजरंगी भाईजान की जरूरत श्रीलंका में जीत के लिए ये है कोहली का मास्टर प्लान राफेल नडाल ने जीता हैम्बर्ग ओपन खिताब चेल्सी बीते सत्र में ही ईपीएल खिताब का हकदार था: कोम्पेनी साध्वी प्राची को अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने पर हंगामा
क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को गुजरात
उर्मिल कुमार थपलियाल First Published:21-12-2012 08:13:57 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

अहा, क्या सीन है। थोड़ा मीठा, थोड़ा कड़वा, बाकी नमकीन है। गुजरात में लय और ऊंचे पहाड़ों वाले हिमाचल में तुषारापात। धन्य और अधन्य, दोनों गुजरात। जैसे इक्कीस दिसम्बर छोटा दिन वैसे पच्चीस दिसम्बर बड़ा दिन। माया कलेन्डर और मुलायम धूप की संसदीय कहानी एक तरफ। दोनों जगह सवारों की जीत एक तरफ और घोड़ियों की हार एक तरफ। चुनावी क्रिकेट में एक तरफ सेंचुरी तो दूसरी तरफ कैच। बराबरी में छूट गया मैच। कहा भी है कि- दम लगा गुजरात में, दिल्ली की किल्ली हिल गई। लेकिन हिमाचल में सभी चूहों को बिल्ली मिल गई। दोनों जगह उम्मीदवार जीते, पार्टी हारी। एक चपत लगी हलकी, मगर दूसरी करारी।

मतदान के दिनों में मुझे एक फुदकती हुई युवती मिली। उसने हंसकर मुझे उंगली का निशान दिखाया और गाना गाने लगी कि- पिया का घर प्यारा लगे। मैंने पूछा- पहली बार वोट दिया है क्या। वो बोली- हां, पहली बार शादी जो कर रही हूं। मैंने कहा- ये बताओ तुमने पार्टी देखकर वोट दिया या उम्मीदवार देखकर। वो तड़ से बोली- उम्मीदवार देखकर। मैंने पूछा- क्यूं। वो फटाक से बोली- वो मेरा  मंगेतर है।

ये तो तय है कि नरेंद्र मोदी भले ही अब ज्यादातर दिल्ली में मिलें, मगर अपने धूमल तो अब गूगल में भी मिलने से रहे। हनीमून में हिमपात तो भला लगता है पर तुषारापात नहीं सुहाता। सुना है दिल्ली का रास्ता केशूभाई पटेल के घर से होकर जाता है। सुबह-सुबह सपने में मोदी मिले, पूछा- क्या आप अब दिल्ली जाएंगे? चश्मा साफ करते हुए वह बोले- दिल्ली भी अब दूर नहीं है। अब मोदी मजबूर नहीं है। सारे बंदर मौज मनावें। जंगल में लंगूर नहीं है। दिल्ली-फिल्ली है क्या? मैं- रेप की राजधानी। बोले- ये मेरी प्रॉब्लम नहीं है। ये क्या है, नियति की उलटबांसी। पीड़िता को पीड़ा की उम्रकैद, दुराचारी को दो बार फांसी। इतना सुनते ही मेरी नींद खुल गई।

और अब सुनिए एक कांग्रेसी मां-बेटे का संवाद। मां- भाग्य भी इतना क्रूर नहीं है। बेटा- चूल्हा है तंदूर नहीं है। मां- ले आटे का लड्डू खा ले। बेटा- क्यूं अम्मा। मां- घर में मोतीचूर नहीं है।

 
 
 
|
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
Image Loadingश्रीलंका में जीत के लिए ये है कोहली का मास्टर प्लान
टेस्ट कप्तान के तौर पर अपनी पहली संपूर्ण तीन मैचों की सीरीज के लिये श्रीलंका दौरे पर भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे विराट कोहली ने कहा है कि उनकी योजना श्रीलंका में पांच गेंदबाजों को उतारने की रहेगी।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
 
Image Loading

जब बीमार पड़ा संता...
जीतो बीमार पति से: जानवर के डॉक्टर को मिलो तब आराम मिलेगा!
संता: वो क्यों?
जीतो: रोज़ सुबह मुर्गे की तरह जल्दी उठ जाते हो, घोड़े की तरह भाग के ऑफिस जाते हो, गधे की तरह दिनभर काम करते हो, घर आकर परिवार पर कुत्ते की तरह भोंकते हो, और रात को खाकर भैंस की तरह सो जाते हो, बेचारा इंसानों का डॉक्टर आपका क्या इलाज करेगा?