सोमवार, 21 अप्रैल, 2014 | 04:57 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    गिरिराज, गडकरी, अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर भाजपा क्या आडवाणी को भी पाकिस्तान भेजेगी: कांग्रेस सेना-प्रमुख के लिए लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह का नाम आगे मतदान नहीं करने वालों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए: आडवाणी कांग्रेस, सपा और बसपा ने देश को लूटा: राजनाथ सिंह सपा युवाओं की पार्टी, इसलिए अखिलेश को सीएम बनाया: मुलायम यूपी के सुलतानपुर से दो वरुण गांधी हैं मैदान में आडवाणी की तरह वाजपेयी को भी किनारा लगाते मोदी: राहुल राजनाथ ने विवादित बयान पर गिरिराज को फटकारा  राहुल अमेठी नहीं संभाल सकते, देश कैसे संभालेंगे: मोदी
 
बंजर शिक्षा व्यवस्था में प्रतिभाओं का गणित
आनंद कुमार, संस्थापक, सुपर-30
First Published:20-12-12 07:16 PM
 imageloadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ-

पूरी दुनिया इस साल महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की 125वीं जयंती मना रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनकी स्मृति में इस वर्ष को गणित वर्ष की संज्ञा दी है। पर आश्चर्य की बात यह है कि भारतीय गणितज्ञों से ज्यादा उत्साह विदेशी गणितज्ञों में देखा जा रहा है। गणित की दुनिया के सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थान अमेरिकी मैथेमेटिकल सोसाइटी ने तो रामानुजन की याद में एक व्याख्यान की श्रृंखला का आयोजन किया है। हमारे लिए यह खुद से पूछने का अवसर है कि पिछले सवा सौ साल में हम कोई और रामानुजन क्यों नहीं पैदा कर पाए? बात शायद सिर्फ सुविधाओं की नहीं है, रामानुजन का जीवन तो बहुत अभावग्रस्त था, वह ज्यादा औपचारिक शिक्षा भी नहीं ग्रहण कर सके थे। दरअसल, इसका कारण काफी हद तक उन तौर-तरीकों में छिपा है, जिनसे हम बच्चों को गणित जैसा विषय पढ़ाते हैं।

आज लगभग हर अभिभावक की शिकायत होती है कि उनके बच्चे की रुचि गणित में नहीं है। हो भी कैसे? स्कूलों में गणित को रटने का एक विषय बना दिया गया है। हम यह सिखा देते हैं कि त्रिभुज का क्षेत्रफल क्या होगा। कैसे और क्यों- बच्चा यह नहीं सीख पाता। शिक्षकों को इस बात के लिए प्रेरित करना होगा कि बच्चों को गणित के पाठ रटाने की बजाय  जीवन से जोड़ते हुए समझाए जाएं। मल्टीमीडिया और टेक्नोलॉजी से इस काम को आसान बनाया जा सकता है। हो सकता है कि बच्चों से पहले बहुत कुछ उनके अध्यापकों को सिखाना पड़े।

दुनिया में इंटरनेशनल मैथेमेटिकल ओलंपियाड के अलावा कई ऐसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जिनमें कई चुनौतीपूर्ण सवाल पूछे जाते हैं। उन सवालों का संग्रह करके विद्यालयों को हल करने के लिए प्रत्सोहित करने की जरूरत है। आजकल टीवी चैनलों पर तरह-तरह के रियलिटी शो की धूम है। क्या कोई गणित या विज्ञान के प्रश्नों पर आधारित शो का आयोजन नहीं किया जा सकता?

गणित को जीवन से दूर स्कूलों का विषय बना देने की बजाय उसे जीवन का एक हिस्सा बनाना जरूरी है। यही काम है, जो हमारे यहां नहीं हो रहा। हर साल दुनिया भर में गणित से संबंधित अनेक पुरस्कार बांटे जाते हैं और उनमें किसी भारतीय का नाम कहीं नहीं आता। हम इसके लिए आईआईटी व आईआईएस जैसे संस्थानों की ओर नजर डालते हैं और उत्तर भी वहीं से खोजना शुरू करते हैं। जहां कोई तकनीक की बात करता है, तो कोई फैकल्टी के अभाव की। लेकिन असल जरूरत नींव मजबूत करने की है। सर्बिया जैसे छोटे देशों में भी साइंस तथा गणित में विशेष प्रतिभा रखने वाले बच्चों के लिए एक स्कूल है- मैथेमेटिका जिम्नाजिया। इस सकूल के बच्चे पिछले 45 वर्षों में इंटरनेशनल मैथेमेटिक्स ओलंपियाड 400 से अधिक मेडल जीत चुके हैं। लेकिन इसके लिए हमें गणित वर्ष मनाने से ज्यादा गंभीर प्रयास करने होंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 
 imageloadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ- share  स्टोरी का मूल्याकंन
 
 
टिप्पणियाँ
 
Image Loadingगिरिराज, गडकरी, अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर
बिहार भाजपा के नेता गिरिराज सिंह, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के खिलाफ रविवार को एक प्राथमिकी दर्ज की गई।
 

लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें

आज का मौसम राशिफल
अपना शहर चुने  
आंशिक बादलसूर्यादय
सूर्यास्त
नमी
 : 06:47 AM
 : 06:20 PM
 : 68 %
अधिकतम
तापमान
20°
.
|
न्यूनतम
तापमान
13°