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बंजर शिक्षा व्यवस्था में प्रतिभाओं का गणित
आनंद कुमार, संस्थापक, सुपर-30
First Published:20-12-12 07:16 PM
पूरी दुनिया इस साल महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की 125वीं जयंती मना रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनकी स्मृति में इस वर्ष को गणित वर्ष की संज्ञा दी है। पर आश्चर्य की बात यह है कि भारतीय गणितज्ञों से ज्यादा उत्साह विदेशी गणितज्ञों में देखा जा रहा है। गणित की दुनिया के सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थान अमेरिकी मैथेमेटिकल सोसाइटी ने तो रामानुजन की याद में एक व्याख्यान की श्रृंखला का आयोजन किया है। हमारे लिए यह खुद से पूछने का अवसर है कि पिछले सवा सौ साल में हम कोई और रामानुजन क्यों नहीं पैदा कर पाए? बात शायद सिर्फ सुविधाओं की नहीं है, रामानुजन का जीवन तो बहुत अभावग्रस्त था, वह ज्यादा औपचारिक शिक्षा भी नहीं ग्रहण कर सके थे। दरअसल, इसका कारण काफी हद तक उन तौर-तरीकों में छिपा है, जिनसे हम बच्चों को गणित जैसा विषय पढ़ाते हैं।
आज लगभग हर अभिभावक की शिकायत होती है कि उनके बच्चे की रुचि गणित में नहीं है। हो भी कैसे? स्कूलों में गणित को रटने का एक विषय बना दिया गया है। हम यह सिखा देते हैं कि त्रिभुज का क्षेत्रफल क्या होगा। कैसे और क्यों- बच्चा यह नहीं सीख पाता। शिक्षकों को इस बात के लिए प्रेरित करना होगा कि बच्चों को गणित के पाठ रटाने की बजाय जीवन से जोड़ते हुए समझाए जाएं। मल्टीमीडिया और टेक्नोलॉजी से इस काम को आसान बनाया जा सकता है। हो सकता है कि बच्चों से पहले बहुत कुछ उनके अध्यापकों को सिखाना पड़े।
दुनिया में इंटरनेशनल मैथेमेटिकल ओलंपियाड के अलावा कई ऐसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जिनमें कई चुनौतीपूर्ण सवाल पूछे जाते हैं। उन सवालों का संग्रह करके विद्यालयों को हल करने के लिए प्रत्सोहित करने की जरूरत है। आजकल टीवी चैनलों पर तरह-तरह के रियलिटी शो की धूम है। क्या कोई गणित या विज्ञान के प्रश्नों पर आधारित शो का आयोजन नहीं किया जा सकता?
गणित को जीवन से दूर स्कूलों का विषय बना देने की बजाय उसे जीवन का एक हिस्सा बनाना जरूरी है। यही काम है, जो हमारे यहां नहीं हो रहा। हर साल दुनिया भर में गणित से संबंधित अनेक पुरस्कार बांटे जाते हैं और उनमें किसी भारतीय का नाम कहीं नहीं आता। हम इसके लिए आईआईटी व आईआईएस जैसे संस्थानों की ओर नजर डालते हैं और उत्तर भी वहीं से खोजना शुरू करते हैं। जहां कोई तकनीक की बात करता है, तो कोई फैकल्टी के अभाव की। लेकिन असल जरूरत नींव मजबूत करने की है। सर्बिया जैसे छोटे देशों में भी साइंस तथा गणित में विशेष प्रतिभा रखने वाले बच्चों के लिए एक स्कूल है- मैथेमेटिका जिम्नाजिया। इस सकूल के बच्चे पिछले 45 वर्षों में इंटरनेशनल मैथेमेटिक्स ओलंपियाड 400 से अधिक मेडल जीत चुके हैं। लेकिन इसके लिए हमें गणित वर्ष मनाने से ज्यादा गंभीर प्रयास करने होंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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टिप्पणियाँ
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REALLY SINCERE EFFORT ARE NEEDED TO POPULARISE TO MOTIVATE PEOPLES WORKING IN THIS PANDEY, CONVENER- INNOVATIVE MATHS CLUB UTTARAKHAND 9456322307
By H.P.Mitr (31st-December-2012 03:30:AM)
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