शुक्रवार, 31 जुलाई, 2015 | 04:32 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    ना 'पाक' हरकतों से नहीं बाज आ रहा है पाकिस्तान, फिर किया सीजफायर का उल्लंघन, 1 जवान शहीद देश में केवल 17 व्यक्तियों पर 2.14 लाख करोड़ का कर बकाया  2022 तक आबादी में चीन को पीछे छोड़ देगा भारत  झारखंड में दिसंबर तक होगी 40 हजार शिक्षकों की नियुक्तियां महिन्द्रा सितंबर में पेश करेगी एसयूवी टीयूवी-300  नेपाल: भारी बारिश के बाद भूस्खलन, 13 महिलाओं समेत 33 की मौत, 20 से अधिक लापता पेट्रोल-डीजल के दामों में हो सकती है कटौती, 1 रुपये 50 पैसे तक घट सकते हैं दाम नागपुर की सेंट्रल जेल में 1984 के बाद पहली बार दी गई फांसी पढ़ें 1993 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट से अब तक का घटनाक्रम निर्दोषों को आतंकी कहा जा रहा है, मैं धमाकों का जिम्मेदार नहीं: याकूब
मायने जीवन के
प्रवीण कुमार First Published:20-12-2012 07:14:31 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

जीने की तुमसे वजह मिल गई है, बड़ी बेवजह जिंदगी जा रही थी.. गाने पर अटक गए वे। खुद से पूछा कि तुम्हारे जीने की क्या वजह है? अंदर से कोई साफ जवाब नहीं आया। उन्हें आभास हुआ कि वह एक उद्देश्यहीन जीवन जी रहे हैं, जिसमें बस समय का बीतना ही शामिल है। लेकिन हमारे जीवन में एक अदद उद्देश्य होने की वजह से कितना बदलाव आ सकता है? जवाब है आमूलचूल। पैसा, करियर आदि चीजों से हटकर आप बस इतना ठान लें कि कुछ ऐसा कर गुजरेंगे जिसके पूरा होने के बाद आप शांति और तसल्ली के साथ मर पाएं, तो समझिए जीवन यात्रा ठीक रही। शांति और तसल्ली के लिए यह जरुरी नहीं कि आप कोई बड़ा काम ही करें। यह आपके दैनंदिन के काम भी हो सकते हैं। छोटे से छोटे काम जो आपको सुकूल दें।

रवींद्रनाथ टैगोर इस बिंदु पर दार्शनिक भाव से कहते हैं कि मनुष्य को चाहिए कि वह अपने जीवन को समय के किनारे पर पड़ी हुई ओस की भांति हलके हलके नाचने दे। यह नाच तभी हो सकता है जब आपका मन ओस की तरह ही हलका हो। आपके कर्म, विचार निर्मल हों। उनमें दूसरों के लिए जगह हो। सुभाष चंद्र बोस कहते हैं कि मनुष्य का जीवन इसलिए है कि वह अत्याचार के खिलाफ लड़े। जर्मन नाटककार बतरेल्त ब्रेख्त इसी बात को आगे बढ़ाते हुए अपनी कविता में कहते हैं ‘तुम्हारा उद्देश्य यह न हो कि तुम एक बेहतर इंसान बने, बल्कि ये हो कि तुम एक बेहतर समाज से विदा लो’।

सफल होना ही हर स्थिति में जरुरी नहीं। नाविक लारेंस को याद करें। ओलंपिक में नौका रेस के मुकाबले के दौरान वह एकाएक अपने घायल प्रतियोगी की मदद के लिए रुक गए। नतीजा यह हुआ कि वह रेस में सबसे पीछे रहे। लेकिन चूंकि उन्होंने जीतने की इच्छा से अधिक दूसरे के जीवन को महत्व दिया इसलिए उनके लिए सबसे अधिक तालियां बजी थीं।

 
 
 
|
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
Image Loadingपे टीएम ने बीसीसीआई से 2019 तक प्रायोजन अधिकार खरीदे
पे टीएम के मालिक वन97 कम्युनिकेशंस ने आज भारत में अगले चार साल तक होने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के अधिकार 203.28 करोड़ रूप में खरीद लिए।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड