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हम सिर्फ 90 प्रतिशत बेवकूफ हैं, बाकी बेशर्म..
के पी सक्सेना First Published:18-12-2012 10:07:08 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

दोपहर तक मौलाना नजर नहीं आए, और बिना उनके मन नहीं लगा, तो मैं खुद ही उधर चला गया। देखा कि गैस सिलेंडर वाले से भिड़े हुए हैं। उसके पास वजन करने वाला कांटा नहीं था। मौलाना तुन्नाकर बोले, ‘एक तो गैस ने यों ही सरकार और पब्लिक की गैस निकाल रखी है, ऊपर से आप सोलह दूनी आठ पढ़ा रहे हो। हम मौलाना लादेन हैं। अच्छे-अच्छे हमारे नाम से हौंका खाते हैं।’ उधर से गुजर रहे दूसरे गैस वाले ने अपने कांटे पर वजन कर दिया, तब जाकर कहीं मामला रफा-दफा हुआ। हालांकि थोड़ा-सा तैश तब भी बाकी रहा।

पान की एक छोटी गिलोरी मुंह में दबाकर थोड़े ठंडे हुए, तो बोले, ‘भाई मियां, रोज कोई न कोई इल्लत कि झांय-झांय हो जावे है। ऊपर से न्यूजों वाले छौंका मार पड़े हैं। छपा है कि नब्बे प्रतिशत भारतीय बेवकूफ हैं। यह बात एक जाने-माने रिटायर्ड जज साहब ने कही है। चूंकि जज ने कही है, सो कानूनन ठोक-बजाकर सही ही होगी। खुदा का लाख-लाख शुक्र है कि मैं और आप बकाया दस प्रतिशत में हैं। अपन लोगों को न वालमार्ट से लेना-देना, और न एनआरएचएम घोटाले से। आप जेल में रहो, तब भी जय जय, जेल से बाहर रहकर देश का खून चूसते रहो, तब भी जय जय। 90 परसेंट बेवकूफ न होते, तो मतलबी लोगों की शह पर गिनतियों के दम पर गलत-सलत प्रस्ताव पारित न करवा लेते। 10 परसेंट नोचते-खाते रहें, नब्बे परसेंट ङोलते रहें, बेवकूफ ही तो हैं। वेल सेड, जज साहब। बहुत बढ़िया। आई स्टैंड बाई यू।’

फू-फू करके मुंह के पान की फकली अलग झाड़कर बोल, ‘भाई मियां, देखते-देखते सोने की चिड़िया कहलाने वाला एक ईमानदार- प्रतिभाशाली देश नब्बे प्रतिशत बेवकूफों की जमात होकर रह गया। अब इससे भी नीचे कोई और क्या गिरेगा? सेंट-परसेंट इसलिए नहीं हो सकता, क्योंकि 10 प्रतिशत ‘समझदार’ और ‘ईमानदारों’ का बने रहना जरूरी है, जो 90 प्रतिशत को अपनी घिनौनी अंगुलियों पर नचाते रहें। मेरा भारत महान! आओ आज फिर 90 प्रतिशत बेवकूफों की शान में एक-एक कप चाय हो जाए।’

 
 
 
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