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भारतीय बाजार में घुसने का जुगाड़ भी घोटाला है
सीताराम येचुरी सांसद तथा सदस्य, माकपा पोलित ब्यूरो
First Published:14-12-12 08:03 PM
अमेरिकी सीनेट के सामने पेश किए गए विवरण के अनुसार, खुदरा व्यापार की मल्टीनेशनल कंपनी वॉलमार्ट ने पिछले चार साल में ही लॉबिंग की अपनी गतिविधियों पर करीब 125 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसमें ‘भारत में निवेश के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ने’ पर लॉबिंग भी शामिल है। विपक्ष के हंगामे के बाद अब जाकर सरकार इसकी जांच कराने को मजबूर हुई है। इससे कुछ ही पहले, वाणिज्य मंत्रालय ने रिजर्व बैंक को इस आशय के आरोपों की जांच कराने के निर्देश दिए थे कि वॉलमार्ट ने किस तरह भारत में अपनी साझेदार भारती एंटरप्राइज के मालिकाना हक वाले स्टोर्स की एक श्रृंखला में दस करोड़ डॉलर का निवेश किया। मीडिया की रिपोर्टो के अनुसार, इस निवेश से वालमार्ट की हिस्सेदारी 49 फीसदी हो गई। याद रहे कि यह निवेश उस समय किया गया था, जब हमारे देश में बहुब्रांड खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित था।
बहरहाल, सरकार संसद में वॉलमार्ट संबंधी आरोपों की जांच कराने के अपने निर्णय की घोषणा कर ही रही थी कि यह खबर आ गई कि वॉलमार्ट द्वारा लॉबिंग करने के लिए जिन फर्मो का उपयोग किया गया था, उनमें से एक फर्म पैटन बॉग्स ने 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु सौदे को सिरे चढ़ाने के लिए भारतीय दूतावास की ओर से लॉबिंग करने का भी जिम्मा संभाला था। यह एक दिलचस्प तथ्य है कि 2009 के मार्च में भारत में अमेरिका के पूर्व-राजदूत, फ्रैंक वाइजनर विदेशी मामलों के सलाहकार की हैसियत से इस फर्म के साथ जुड़ गए। इसलिए यह जरूरी हो गया है कि सभी मल्टीनेशनल कंपनियों की इस तरह की गतिविधियों की जांच कराई जाए।
भारत में यह जांच ऐसे समय में होने जा रही है, जब वॉलमार्ट की दूसरे देशों में गतिविधियों की सघन जांच-पड़ताल पहले से ही जारी है। न्यूयॉर्क टाइम्स की हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, वॉलमार्ट को आठ साल पहले ही यह बताया जा चुका था कि वॉलमार्ट मैक्सिको ने उस देश में अपनी गतिविधियों के लिए जल्दी परमिट हासिल करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को करोड़ों डॉलर की घूस खिलाई थी। इसी प्रकार, कितने ही देशों में वॉलमार्ट को एक के बाद दूसरी मजदूर विरोधी नीतियों के लिए भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
इसे देखते हुए सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि बहुब्रांड खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अमल में लाने से पहले वह वॉलमार्ट की लॉबिंग करने और अन्य गतिविधियों की जांच पूरी हो जाने दे। वैसे भी फेमा कानून में जो संशोधन किए गए हैं, उनके संसदीय अनुमोदन तक सरकार को इंतजार करना ही होगा। विचित्र बात है कि इन संशोधनों को अब तक राज्यसभा के सामने लाया ही नहीं गया है, जबकि सरकार को इस कानून के तहत नियमों व नियमनों में हरेक संशोधन को अनुमोदन के लिए संसद के दोनों सदनों में लाना होगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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