शुक्रवार, 24 अक्टूबर, 2014 | 02:08 | IST
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हारने से इनकार
प्रवीण कुमार First Published:12-12-12 10:11 PM

‘मेरे साथ ऐसा नहीं हो सकता’, उन्हें डॉक्टर के शब्दों पर विश्वास नहीं हो रहा था। लेकिन यह सच था, इसलिए स्वीकार करना पड़ा। समस्या दरअसल सच की नहीं, इसका सामना करने की थी। स्वास्थ्य को लेकर कोई मेडिकल रिपोर्ट आपको चौंका दे, ऐसा हो सकता है। अभिनेत्री मनीषा कोइराला भी स्तब्ध रह गईं, जब पता चला कि उन्हें कैंसर है। लेकिन इतने भर से यह मान लेना कि जिंदगी खत्म हो गई, बुजदिली ही है। हारने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि यह जिंदगी का हिस्सा है। दरअसल, जिंदगी आश्चर्यो से भरी है। यह हमें कभी न कभी जरूर चौंकाती है। मशहूर क्रिकेटर इमरान खान भी तब चौंक गए, जब उन्हें अपनी मां को कैंसर होने का पता चला। लेकिन वह घबराए नहीं। उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। बाद में उन्होंने बताया कि अल्लाह पर यकीन ने सारे डर खत्म कर दिए। इस तरह का भरोसा आपको हर दुख, संत्रस, चिंता से उबरने में मदद करता है। इस मामले में विकी फोस्टर भी हमारे लिए आदर्श हो सकती हैं। विकी फोस्टर को सात साल की उम्र में कैंसर हो गया था, लेकिन उन्होंने इस पर जीत हासिल की। आज विकी 25 साल की हैं। उन्होंने बायो-मेडिकल साइंस में पीएचडी की है और वह कैंसर के खात्मे से जुड़ी रिसर्च में जुटी हैं। उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल करते ही कहा, ‘प्यारे कैंसर, मैंने तुम्हें सात साल की उम्र में ही हरा दिया था और आज मैंने कैंसर रिसर्च में अपनी पीएचडी की है, अब क्या कहते हो?’ दरअसल, मन से हारना ही मौत की पहली निशानी है। सच यही है कि जिंदगी एक बॉक्सिंग गेम की तरह है, जहां हार का ऐलान आपके गिरने पर नहीं होता, वह तो आपके वापस उठने से इनकार करने पर होता है। गौर करने पर हम पाते हैं कि दुनिया के लगभग सभी महान लोग इस तरह के बॉक्सिंग खेल के उस्ताद रहे हैं। इस बारे में आप क्या सोचते हैं?

 
 
 
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