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वेब मीडिया बदल रहा है उपभोक्ताओं का मिजाज
मुकुल श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर, लखनऊ विश्वविद्यालय
First Published:10-12-12 07:35 PM
इंटरनेट की शुरुआत से ही कन्वर्जेंस की संभावनाओं के असीमित विकल्प खुल गए थे, पर तकनीकी और कंटेंट के स्तर पर यह बदलाव हमारी मीडिया हैबिट पर किस तरह से असर करेगा, इसे लेकर आशंकाएं थीं। भारत जैसे देश में इस बारे में सभी मान रहे थे कि यह परिवर्तन बहुत समय लेगा और तब तक प्रचलित जन-संचार माध्यम अपनी धाक जमाए रखेंगे। सूचनाएं और समाचार पाने का सबसे तेज माध्यम अभी तक टेलीविजन ही था, पर अब यह तस्वीर बदलने लगी है और टेलीविजन को कड़ी टक्कर दे रहा है वेब मीडिया, यानी एक ऐसा माध्यम, जिसका प्रयोग इंटरनेट द्वारा किया जाता है।
भारत जैसे देश में अभी इंटरनेट की ब्रॉड बैंड सुविधाओं का व्यापक विस्तार होना बाकी है, लेकिन अब इंटरनेट की सुविधा से लैस मोबाइल फोन मीडिया हैबिट के परिदृश्य पर बड़ा असर डाल रहे हैं। भारत में इस बदलाव की वाहक कामकाजी युवा पीढ़ी है, जो तकनीक पर ज्यादा निर्भर है और परंपरागत रूप से मीडिया उपभोग के समय का भी अधिकतम लाभ लेना चाहती है, यानी खबर पढ़ते-देखते समय भी अपने काम पर रहा जाए। एसी नील्सन के वैश्विक मीडिया खपत सूचकांक 2012 से पता चलता है कि एशिया (जापान को छोड़कर) और ब्रिक देशों में इंटरनेट मोबाइल फोन पर टीवी व वीडियो देखने की आदत पश्चिमी देशों व यूरोप के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है, यानी वेब मीडिया परंपरागत इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को बहुत तेजी से चुनौती दे रहा है।
यही वजह है कि हर इलेक्ट्रॉनिक टीवी चैनल अब अपनी वेबसाइट पर ज्यादा ध्यान देने लगा है, जिसमें लाइव स्ट्रीमिंग के साथ खबरों का विश्लेषण और पुराने वीडियो भी उपलब्ध रहते हैं। बहरहाल, बदलाव का यह असर बहुआयामी है। समाचारपत्र और एफ एम रेडियो चैनल भी अपनी साइबर उपस्थिति पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। बीबीसी व डायचे वेले जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रसारक अपने वेब पोर्टल पर खासा जोर दे रहे हैं। वहां दृश्य-श्रव्य सामग्री के अलावा गंभीर विश्लेषण हैं, वहीं समाचारपत्र ई-पेपर के अलावा अपनी वेबसाइट को लगातार अपडेट रख रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मीडिया उपभोग के मामले में टेलीविजन अब भी नंबर एक है, पर लोगों के इंटरनेट पर समय बिताने के मामले में बहुत तेजी से इजाफा हो रहा है, जिससे विज्ञापनदाताओं का झुकाव भी वेब की तरफ हो रहा है। निवेश पर सर्वाधिक लाभ एशिया-प्रशांत क्षेत्रों में डिजीटल मार्केटिंग चैनलों द्वारा हो रहा है, ऐसा इस रिपोर्ट का मानना है।
भारत के संदर्भ में यह बदलाव ज्यादा तेजी से होगा, क्योंकि मैकेंजी ऐंड कंपनी द्वारा किया गया एक अध्ययन बताता है कि 2015 तक भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की तादाद 35 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी, जिनके हाथों में एक ऐसी तकनीक होगी, जिससे उनकी परंपरागत टीवी पर निर्भरता कम होगी और इसमें बड़ी भूमिका स्मार्ट फोन निभाने वाले हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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