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अहम की लड़ाई में नुकसान का खेल
शिवेंद्र कुमार सिंह, विशेष संवाददाता, एबीपी न्यूज
First Published:05-12-12 10:27 PM
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ऐसा नहीं है कि 2016 ओलंपिक में भारतीय एथलीट हिस्सा नहीं ले पाएंगे। एक तो ओलंपिक में चार साल का वक्त बाकी है, तब तक हालात बदल चुके होंगे। दूसरे, भारत एशिया के बड़े और ताकतवर देशों में शामिल है, आईओसी के लिए उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। एक और अहम बात-ओलंपिक के प्रायोजकों में कई भारतीय कंपनियां शामिल हैं, इसलिए भी भारत को इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी लंबे समय तक निलंबित नहीं रख सकती। पर जिस तरह भारतीय ओलंपिक संघ को निलंबित किया गया, वह खेल संगठन की गंदी राजनीति का एक उदाहरण भर है।

वैसे, यह पुरानी चीज है, पर इस बार नौबत यहां तक पहुंच गई, क्योंकि मामला ‘ईगो’ की लड़ाई पर आ गया। आईओए के प्रस्तावित चुनावों में रणधीर सिंह व अभय चौटाला आमने-सामने थे। परदे के पीछे का खेल यह था कि रणधीर सिंह के आईओसी में रिश्ते अच्छे हैं, जबकि चौटाला के पास अध्यक्ष की कुरसी पर काबिज होने के लिए जरूरी वोट थे। रणधीर सिंह ने हार को भांपते हुए नाम वापस ले लिया, पर आईओसी से अच्छे रिश्ते की ताकत भी दिखा दी। वैसे आईओसी के सदस्य रणधीर सिंह ने पहले कहा था कि वह इन चुनावों में हिस्सा नहीं लेंगे, पर बाद में बदल गए। छवि अभय सिंह चौटाला की भी साफ नहीं है। उनके साथ जनरल सेक्रेटरी के लिए चुने गए ललित भनोट कॉमनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जा चुके हैं।

वैसे इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी की आपत्ति आईओए में सरकारी दखलअंदाजी को लेकर है। हालांकि, आईओसी के चार्टर व सरकार की तरफ से प्रस्तावित स्पोर्ट्स कोड के नियमों में मामूली अंतर है। ऐसे में, सिर्फ एक पक्ष की बातों व फायदों को ध्यान में रखते हुए भारत को निलंबित करना ज्यादती है। ओलंपिक चार्टर को तो पूरी तरह अमेरिका, चीन, नॉर्थ कोरिया जैसे देश भी नहीं मानते। पर उन्हें तो निलंबित नहीं किया गया। हमेशा से भारतीय खेलों की दो तस्वीरें रही हैं। खिलाड़ी बेहाल व बदहाल हैं और अधिकारियों की मौज है। अधिकारी सरकारी खर्च पर कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स से लेकर ओलंपिक तक जाते हैं। सिर्फ खुद ही नहीं जाते,  बल्कि इनके करीबी अधिकारी भी विदेश दौरों पर साथ होते हैं। जो अधिकारी एक बार किसी संघ की कुरसी पर आ गया, फिर वह हटने का नाम नहीं लेता। भारतीय तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष और मौजूदा कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्र पिछले करीब चार दशक से तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष बने हुए हैं। 

हमें यह भी समझना होगा कि बड़ी मुश्किल से ओलंपिक में हमारे खिलाड़ियों का नाम होना शुरू हुआ है। ऐसा ही रहा, तो भविष्य में ओलंपिक में खेलने से कोई हमारे खिलाड़ियों को भले न रोक पाए, लेकिन ऐसे खिलाड़ियों को पैदा करना ही मुश्किल हो जाएगा, जो उस स्तर का प्रदर्शन कर सकेंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 
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