सोमवार, 31 अगस्त, 2015 | 18:47 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
ब्रेकिंग
मुरादाबाद के काशीपुर बस स्टैंड पर अवैध वसूली को लेकर यूनियन वालों में मारपीट। पुलिस ने यूनियन अध्यक्ष को लिया हिरासत में। विरोध में बस चालकों ने की हड़ताल।जीआरपी सिपाही बनकर रेलवे स्टेशन पर यात्री को लूटपाट।जनता एक्सप्रेस में शाहजहांपुर से हरिद्वार जाते समय मुरादाबाद स्टेशन पर उतर गया था यात्री। यात्री शाहजहांपुर का रहने वाला।जीआरपी ने पीड़ित के बताए हुलिए के आधार पर डाली दबिश। प्लेटफार्म पांच पर धरे गए दोनों लुटेरे।इंद्राणी, संजीव और ड्राइवर को पुलिस हिरासत में भेजा गयामेरठ: दो दिन से लापता युवक की लाश गाजियाबाद के निवाड़ी में मिली, परिजनों का हंगामा
खोल के भीतर
नीरज कुमार तिवारी First Published:05-12-2012 10:08:10 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

वह तमाम बैठकों में वही कहते हैं, जो उनके बॉस के विचार होते हैं। बॉस बदलने के साथ ही उनके विचार बदल जाते हैं। हालांकि, अपने काम में वह माहिर समझे जाते हैं। बॉस की जरूरत का सौ प्रतिशत देना उनके बाएं हाथ का खेल है। लेकिन क्या यह पर्याप्त है? पामेला मेयर, जो एक सोशल नेटवर्किंग कंपनी की सीईओ और लेखिका हैं, उनका कहना है कि आज की ज्यादातर कंपनियों में मशीनी मानवों का बोलबाला है। वे काम में प्रोफशनली तौर पर रिच हैं, पर विचारों से खाली है। पामेला कहती हैं कि इससे पैसे तो फल रहे हैं, पर विचारों की फसल मार खा रही है। दरअसल, हम इस गफलत के शिकार हैं कि अपने वरिष्ठों की हां में हां मिलाना सही रणनीति है, जबकि यह हमेशा कारगर नहीं होता। किसी भी काम, मुद्दे और समस्या पर जब तक आप अपना दिमाग नहीं लगाते, विचार नहीं रखते आपका अस्तित्व मानव होने के नाते समझ से परे है। 17वीं सदी के महान विचारक बाल्तेशर ग्रेशियन ने कहा था कि आपको यह कोशिश नहीं करनी चाहिए कि आप किसी एक व्यक्ति पर ही निर्भर रहें, बल्कि आपको यह कोशिश करनी चाहिए कि कई व्यक्ति आप पर निर्भर रहें। भला यह हो कैसे? बाल्तेशर के शब्दों में, ‘खुद को सभी वायदों और एहसानों से मुक्त रखें।’ इससे आपकी जवाबदेही कहीं से कम नहीं होती है, बल्कि और बढ़ जाती है। यहां नारायण मूर्ति के विचार प्रासंगिक हैं। वह कहते हैं कि अगर आप मौलिक विचार रखते हैं, तो भले ही वे नहीं माने जाएं, पर आपको वे असम्मानित नहीं बना सकते। उनका कहना है कि आप मशीन से बेहतर हैं और यह बात आपको बार-बार साबित करनी पड़ती है। सच तो यह है कि हम कछुए की तरह कवच चाहते हैं। लेकिन अगर हमें वाकई अपनी स्वतंत्रता, मानसिक सुरक्षा कायम रखनी है, तो अपने विचारों के साथ जीना होगा। खुद को खोल के भीतर रखना अपने को क्षत-विक्षत करने जैसा है।

 

 
 
 
|
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
Image Loadingभारत ने कसा शिकंजा, जीत से सिर्फ सात विकेट दूर
पुछल्ले बल्लेबाजों के उपयोगी योगदान से श्रीलंका के सामने बड़ा लक्ष्य रखने वाले भारत ने शुरू में ही तीन विकेट निकालकर तीसरे और अंतिम टेस्ट क्रिकेट मैच पर शिकंजा कसने के साथ श्रीलंकाई सरजमीं पर 22 साल बाद पहली टेस्ट सीरीज जीतने की तरफ मजबूत कदम बढ़ाए।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
 
Image Loading