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परदेस में बसे भारतीयों का बढ़ता योगदान
जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्री
First Published:30-11-12 07:11 PM
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दूर देशों में जा बसे वाले लोगों द्वारा स्वदेश भेजी जाने वाली विदेशी मुद्रा पर विश्व बैंक रिपोर्ट-2012 प्रकाशित हुई है। यह ताजा रिपोर्ट बता रही है कि अनिवासी भारतीयों ने अच्छी कमाई करके सबसे अधिक विदेशी मुद्रा स्वदेश भेजने का कीर्तिमान बनाया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2012 में अनिवासी भारतीयों ने लगभग 70 अरब डॉलर भेजी। आकलन किया गया है कि विकासशील देशों में वर्ष 2012 के दौरान कुल 406 अरब डॉलर की रकम आएगी और भारत इस सूची में सबसे ऊपर होगा। ऐसी धनराशि पाने वाले देशों में भारत के बाद चीन का दूसरा स्थान है, जिसको 66 अरब डॉलर इस दौरान हासिल होंगे। मैक्सिको 24 अरब डॉलर के साथ सूची में तीसरे पायदान पर है। अन्य प्रमुख देशों में नाइजीरिया (21 अरब डॉलर), मिस्र (18 अरब डॉलर), पाकिस्तान (14 अरब डॉलर), बांग्लादेश (14 अरब डॉलर), वियतनाम (9 अरब डॉलर) और लेबनान (7 अरब डॉलर) शामिल हैं। इसी तरह से पिछले वर्ष 2011 में कुल 351 अरब डॉलर स्वदेश भेजे गए थे जिसमें सबसे अधिक 58 अरब डॉलर अनिवासी भारतीयों ने भेजे थे। यह कोई छोटी बात नहीं है कि अमेरिका व यूरोप सहित अनेक देशों में मंदी के बावजूद अनिवासी भारतीय अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा भारत भेज रहे हैं।

उनके द्वारा स्वदेश भेजी जाने वाली राशि से भारत का विदेशी मुद्रा कोष (फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व) लगातार मजबूत होता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित दुनिया के कई राष्ट्र प्रमुखों ने उनकी अर्थव्यवस्थाओं में वहां रहने वाले भारतीयों के योगदान का कई बार उल्लेख किया है। कहा जाता है कि आईटी, कम्प्यूटर, मैनेजमेंट, बैंकिंग, वित्त के क्षेत्र में दुनिया में भारतीय प्रवासी सबसे आगे हैं। पिछले कई दशकों से भारतीय प्रतिभाएं दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए याद की जाती रही हैं। आर्थिक  सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के द्वारा जारी की गई वैश्विक प्रवासी रिपोर्ट में भारतीयों को दुनिया का सबसे योग्य प्रवासी बताया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विकसित देशों में जाने वाले विभिन्न देशों के  प्रवासियों में सेवा भावना, परिश्रम और ईमानदारी के  मामले में भारतीय प्रवासी सबसे ज्यादा प्रभावी हैं।

अच्छी बात यह है कि प्रवासियों की नई पीढ़ी भी उत्साह के  साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ने और भारत को बुलंदी पर देखने की इच्छा रखती है। ये लोग एक तरह से विदेशों में भारत के सद्भावना दूत की भूमिका में होते हैं। भारत की दुनिया भर में जो नई छवि बनी है उसमें इनका योगदान काफी ज्यादा है। तीन दशक पहले प्रवासी चीनियों ने पूरी दुनिया से कमाई हुई विदेशी मुद्रा चीन के बुनियादी ढांचे में लगाकर चीन की आर्थिक तकदीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उसी तरह की उम्मीद हमें अब अनिवासी भारतीयों से भी करनी चाहिए।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 

 
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