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औरतों के हक में उम्मीद जगाती एक पहल
कौशलेंद्र प्रताप यादव, प्रशासनिक अधिकारी First Published:27-11-2012 07:26:23 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

इसे उत्तर प्रदेश में महिलाओं को दिया गया सशक्तीकरण का एक तोहफा माना जा रहा है। प्रदेश सरकार ने एक महिला पावर लाइन की शुरुआत की है। इसके तहत 1090 पर शिकायत करने पर महिला पुलिस खुद पीड़िता के पास पहुंचेगी,  उसको थाने में नहीं आना पड़ेगा और समस्या को सुलझाने की कोशिशों के साथ ही उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यह नंबर टोल फ्री होगा और जब तक पीड़िता की समस्या का समाधान नहीं हो जाएगा,  पुलिस उसके संपर्क में रहेगी। माना जा रहा है कि इससे न केवल अपराधों और छेड़छाड़ पर अंकुश लगेगा, बल्कि प्रशासन के प्रति आम जनता में विश्वास भी पैदा होगा। जिन लोगों के विरुद्ध शिकायतें सही पाई जाएंगी, उनका ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और चरित्र प्रमाण पत्र नहीं बन सकेगा। इतना ही नहीं, उनके लिए नौकरी पाना भी आसान नहीं रह जाएगा। देश में जिस प्रकार यौन अपराधों में बाढ़ आई है, उससे निपटने की राह में इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह माना जाता है कि इस तरह की छेड़छाड़ और शोषण का शिकार सबसे ज्यादा दलित व अदिवासी तबकों की महिलाएं होती हैं, इस लिहाज से इसे इन तबकों के सशक्तीकरण की कवायद भी कहा जा सकता है। इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि जो महिलाएं या लड़कियां थाने आने से डरती हैं, उन्हें इससे काफी मदद मिलेगी। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि जब इस फोन लाइन को शुरू किया गया, तो पहले दिन ही इस नंबर पर दो हजार से ज्यादा कॉल आईं।

लेकिन प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इसके जो नतीजे निकले, वैसी उम्मीद क्या पूरे उत्तर प्रदेश के मामले में की जा सकती है? यह लाइन टोल फ्री जरूर है, लेकिन उत्तर प्रदेश में आज भी ऐसे गांव हैं, जहां आज भी बिजली नहीं पहुंची है, और मोबाइल फोन के सिग्नल तक नहीं पहुंच रहे हैं। जबकि ये वे इलाके हैं, जहां के लोगों को ऐसी कोशिशों की सबसे ज्यादा जरूरत है। दूसरे, ऐसे मामलों में हम पुलिस से कोई उम्मीद उसी सूरत में कर सकते हैं, जब सामान्य पुलिस वाले महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता से लैस हों। जो पुलिस उपलब्ध है भी, वह खुद जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रही है, ऐसे में उससे यह उम्मीद कैसे की जाए कि जरूरत पड़ने वह तुरंत मौका-ए-वारदात पर पहुंच जाएगी?

अभी तक जो टोल फ्री नंबर उपलब्ध हैं, वे ज्यादा भरोसेमंद नहीं माने जाते। इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन 100 नंबर केअसंवेदनशील हो जाने की खबरें अक्सर आती ही रहती हैं। ऐसा 1090 नंबर के साथ भी हो सकता है। फिर दहेज विरोधी कानून की तरह ही इसके दुरुपयोग का डर भी बना हुआ है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार की इस व्यवस्था के बाद मध्य प्रदेश ने भी यह रास्ता अपनाया है। यकीनन औरतों के हक में यह एक सराहनीय पहल है, जिसे अन्य प्रदेश भी अपना सकते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 
 
 
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