गुरुवार, 23 अक्टूबर, 2014 | 19:59 | IST
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चुपचाप गाली दे, ..वरना समन जारी होगा
के पी सक्सेना First Published:27-11-12 07:25 PM

मैं उधर पहुंचा, तो देखा कि मौलाना धूप में चारपाई पर बैठे पड़ोस के एक बच्चे को पढ़ा रहे थे। मुझे सुनाई दिया, जैसे कह रहे हों कि ‘क’ से केजरीवाल, ‘ख’ से खुर्शीद, ‘ग’ से गडकरी..। मुझे देखकर बच्चों को रफा-दफा किया और चारपाई पर बिठाते हुए बोले, ‘इस सुहानी धूप में तुम्हें ‘जीकेटी’ काली चाय पिलाता हूं। नहीं समझे? जिंजर (अरदक), काली मिर्च, तुलसी वाली। इससे जाड़ों में नाक से गले तक का पैसेज एकदम विधानसभा मार्ग जैसा साफ रहता है।’ अंदर अपनी इस स्पेशल चाय का ऑर्डर फेंककर मौलाना ने पुड़िया का बुरादा मुंह में झोंका और मूंछें पोंछकर बोले, ‘भाई मियां, अखबार भी अजीब शै है। कुछेक न्यूजें पढ़कर छींकें आने लगती हैं। छपा है एक जगह कि दिग्विजय को समन। वह जनाब भाजपा वाले नितिन गडकरी के खिलाफ कुछ अंट-संट बोले, तड़ से समन जारी हो गया कि 21 दिसंबर को कोर्ट में हाजिर हो। हो जाएंगे। कौन-सा फांसी चढ़ा दोगे? जिनके फांसी चढ़ने के आदेश हुए पड़े हैं, उन्हीं को कौन-सा चढ़ा दिया।

एक कसाब ही तो निपटा है, बाकी देश की छाती पर दंड पेल रहे हैं। अभी तो साहब वह रस्सी ही नहीं बांटी गई है, जिससे उन्हें फांसी दी जाए। जहां तक दिग्गी राजा का सवाल है, समन जारी न किया जाए। हर पार्टी में एक न एक ऐसा होना चाहिए, जो औल-फौल और ऐन-गैन बककर पार्टी को लग्घे पर उठाए रहे। अपने दिग्विजय महाराज तो फिर इस काम में माहिर हैं। जो मुंह में आया, प्रेस में झोंक दिया।’ महकती हुई गरमागरम चाय आ गई। मौलाना एक सुड़पी लेकर शुरू हो गए, ‘अदालत और समनों पर चल रहा है यह देश। दनादन समन जारी। कोर्ट में हाजरी दो। न भी दो, तो कोई हर्ज नहीं। टांय-टांय फिस्स.. जुमार्ना एक अठन्नी का नहीं। आपस में गाली गलौज करते रहो। भाई मियां, राजनीति का ऐसा घिनौनापन न मैंने पहले देखा, न अब्बा ने। पब्लिक का डर न हो, तो सरेराह एक-दूसरे की धोती खींच लें। फिर भी फा है कि सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा। अल्ला करे कि और अच्छा होता रहे। कीचड़ कालिख..जिन्दाबाद।’
 
 
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