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अपना हारमोनियम अपने मुल्क में बैठकर बजाइए
के पी सक्सेना
First Published:11-09-12 07:46 PM
न कोयले की खदान.., न यूपीए से घमासान। न टाइगर सलमान.., न कोई नेता बेईमान.., आज बासी कढ़ी न जाने कौन-से उबाल पर थी। मौलाना गोविंदा की तरह लहककर किसी फिल्म का घिसा-पिटा गाना गुनगुना रहे थे- नीचे पान की दुकान.. ऊपर गोरी का मकान, हाय हाय रे..। मैंने पूछा कि पूरी तरह पागल होने में अभी कितनी देर बाकी है? वह लजाकर बोले, ‘माफ करना.. आज अपनी चर्खी कुछ उल्टी घूम गई। कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन। क्या जमाना था, क्या लहरें थीं..? खैर अब जाने दो यह सब!’
मुंह में महकता हुआ बनारसी पान सरकाकर बोले, ‘मियां, कांटे से कांटे की निकास होती है। न्यूजें ही ऐसी आ रही हैं कि दे-दनादन विराट कोहली। छपा है कि मनसे (राज ठाकरे) ने आशा भोंसले को धमकी दी है। सुभानल्लाह! अगले के पास धमकी-धमाके के अलावा है क्या? टाइम-टाइम पर एक सीला पटाखा छोड़ते रहो। अभी तक धमकियां उत्तर भारत के लिए रिजर्व थीं। अब एक मराठी दूसरे मराठी को धमकी दे रहा है कि आशा जी के प्रोग्राम में तयशुदा पाकिस्तानी गायक शामिल हुए, तो ईंट से ईंट बजा देंगे। जब उन्होंने हमारे सलमान खान की एक था टाइगर अपने मुल्क में बैन कर दी, तो हम क्या पतली दाल खाते हैं? पाकिस्तानी तंबूरा मुंबई में नहीं बजने देंगे। खुट्टी तो खुट्टी.।
नो कल्चरल एक्सपोर्ट-इंपोर्ट। अपना हारमोनियम अपने मुल्क में धौंकते रहो। फिलहाल अपने राष्ट्रपति और साडे पीएम विच अमन-चैन दी गल बात चलने दो (जैसी 60 वर्षो से जारी है..)। कीप इट अप!’ मूंछ पर से पान पोंछकर बोले, ‘भई, अपने राज ठाकरे साहब का जवाब नहीं। अपने चाचा से नौ गज आगे हैं। जब-जब नींद से करवट लेकर चौंकते हैं..एक सुरसुरी छोड़कर फिर सो जाते हैं। चलो न्यूज तो छपी। अब आप बताइए भाई मियां, मैं आशा भोंसले को क्या लिखूं?’
मैंने डांटा, चुपचाप चलकर चाय पीजिए। आपको मजीरा बजाना तक आता नहीं। म्यूजिक प्रोग्रामों और मनसे की झाईं-झप्प में टांग मत अड़ाया कीजिए। राज ठाकरे चाहे तंबूरा बजने दें या फिर तंबू उखाड़ फेंकें..अब यह उनकी मर्जी। कम ऑन।
मैंने डांटा, चुपचाप चलकर चाय पीजिए। आपको मजीरा बजाना तक आता नहीं। म्यूजिक प्रोग्रामों और मनसे की झाईं-झप्प में टांग मत अड़ाया कीजिए। राज ठाकरे चाहे तंबूरा बजने दें या फिर तंबू उखाड़ फेंकें..अब यह उनकी मर्जी। कम ऑन।
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