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हम सबकी मूर्खताओं को चाहिए बड़ा मंच
नीरज बधवार
First Published:02-08-12 07:49 PM
मैं हमेशा इस बात का पक्षधर रहा हूं कि व्यक्ति हो या राष्ट्र, उसकी एक पहचान होनी चाहिए। अब इस पहचान का इस बात से कोई ताल्लुक नहीं है कि वो अच्छी है या बुरी। इसके लिए जरूरी है कि जो मूर्खताएं या करतब अब तक आप छोटे स्तर पर दिखाते रहे हैं, उसे बड़े मंच पर परफॉर्म करें ताकि आपका हुनर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच पाए। जैसे मोटे तौर पर हर हिंदुस्तानी ये जानता है कि हमारे यहां 8 से 10 घंटे बिजली न रहना आम बात है। मगर ‘हमारे यहां घंटों बिजली नहीं रहती’ ये अपने आप में एक कैजुअल स्टेटमेंट है, इस पर कोई ध्यान नहीं देने वाला। इसका नुकसान ये हो रहा है कि रोजाना घंटों बिजली गुल रहने के बावजूद विश्व मानचित्र में भारत की ‘पावर कट नेशन’ के तौर पर कोई पहचान नहीं बन पा रही।
क्या किया जाए? किया ये जाए कि नादर्न ग्रिड फेल कर दो। एक साथ देश के नौ राज्यों में बिजली चली गई। पूरे देश में हाहाकार। टीवी से लेकर अखबार तक हर जगह बिजली गुल रहना सुर्खियां बना। फिर अगले दिन हमने इस उपलब्धि को और विस्तार दिया। एक नहीं दो-दो ग्रिड फेल करके दिखा दिए। जबकि ध्यान देने लायक बात ये है कि इस दौरान भी रोजाना की तरह बिजली सिर्फ आठ से दस घंटे तक ही नहीं आई। तो सवाल ये है कि जो कटौती हमारी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा है, उस पर इतना क्लेश क्यों? शायद इसलिए क्योंकि इस बार बिजली गुल रखने का गुल हमने एक साथ कई राज्यों में खिला दिया। नतीजा ये हुआ कि एक साथ चारों ओर से सरकार को गालियां पड़ीं। भारत सहित विश्व मीडिया में इसकी चर्चा हुई। भारत को लानत देते हुए दुनिया ने कहा, ‘अरे! ये कैसा देश है जहां घंटो बिजली नहीं रहती’। हमने एक ऐसे अवगुण के लिए वर्ल्ड लेवल पर अपनी पहचान बना ली, जो हममें विद्यमान तो था मगर हम उसे एनकैश नहीं कर पा रहे थे। जब आप बड़े मंच पर परफॉर्म करते हैं तो आपको उसका रिवार्ड भी बड़ा मिलता है। दूसरे दिन जब आधा देश अंधेरे में डूब गया तो ऊर्जा मंत्री को गृहमंत्री बना दिया गया। जो आधे देश को अंधेरे में रख सकता है वह तरक्की का हकदार तो है ही।
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