शुक्रवार, 24 मई, 2013 | 05:00 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    खाद्य सुरक्षा कानून के लिए प्रतिबद्ध है संप्रग सरकार न्यायाधीश के रूप में श्रीनिवासन को 21 सांसदों का समर्थन फिक्सिंग से मेरा सिर शर्म से झुक गया: जितेंद्र सिंह  फिक्सिंग से मेरा सिर शर्म से झुक गया: जितेंद्र सिंह  फिक्सिंग से मेरा सिर शर्म से झुक गया: जितेंद्र सिंह  फिक्सिंग से मेरा सिर शर्म से झुक गया: जितेंद्र सिंह  शशिकांत शर्मा बने नए CAG, 2017 तक होगा कार्यकाल  फाइनल के लिए आखिरी जंग लड़ने उतरेंगे मुंबई-राजस्थान फाइनल के लिए आखिरी जंग लड़ने उतरेंगे मुंबई-राजस्थान फाइनल के लिए आखिरी जंग लड़ने उतरेंगे मुंबई-राजस्थान
 
बाढ़ का अंदेशा और सूखे की मार
उर्मिल कुमार थपलियाल
First Published:27-07-12 08:39 PM
 ई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ-
भाई साहब, सूखा और बाढ़ स्वभाव में एक-दूसरे के विरोधाभासी ऐसे लगते हैं, जैसे कांग्रेस और भाजपा एक साथ खड़े हों। ये दोनों कभी गले मिलें भी तो ऐसा लगेगा, जैसे अन्ना हजारे कपिल सिब्बल के गले मिल रहे हों। यह एक असंभव भरत मिलाप होगा। किसी को समकालीन शाप देना हो, तो यह कहा जाता है कि जा तू सूखे से मरे और तेरी लाश बाढ़ में बह जाए। व्याकरण के अनुसार सूखा पुल्लिंग है और बाढ़ स्त्रीलिंग। सूखा तो मारता है, बाढ़ लील जाती है।

बाढ़ और सूखा पीड़ितों को इनकम टैक्स में छूट से क्या वास्ता? कांग्रेस और भाजपा तक अपने भीतरी सूखे और भारी बाढ़ से इतने पीड़ित हैं कि न तीन में, न तेरह में। इनमें जो बड़े बाप के बेटे हैं, वे जब से पैदा हुए, तब से लेटे हैं, बाकी बाढ़ के कारण घुटने समेटे हैं। सूखे और बाढ़ के बीच खड़ा गरीब आदमी अर्धनारीश्वर की तरह लगता है। गरीब के पास तो केवल माथा बचा रहता है पीटने के लिए। देवता गरीब नहीं होते, क्योंकि वे आसमान में धान बोते हैं। आसमान को बाढ़ या सूखे से क्या मतलब। ये सीन तो बस धरती का है कि बाढ़ में बहते छप्पर में सांप-चूहे के बीच उनका भय एक रूप हो जाता है। चूहे का भाग्य और सांप की भूख, दोनो आतंक में। कभी कवि दुष्यंत कुमार ने चेताया था कि,  नालायकों जब बाढ़ की संभावनाएं सामने हों तो नदियों के किनारे तुम अपने घर बनाते क्यूं हो, तो पीड़ितों ने जवाब दिया था कि घर नदी में बनाएं क्या। मगरमच्छों को अतिक्रमण अच्छा नहीं लगता।
मानसून के मिजाज का ठेका तो अब मौसम विभाग भी नहीं लेता। पुरानी मसल है कि सावन की बरसात और औरत की जात का कोई भरोसा नहीं। जाने कब बरस जाएं।

मूसलाधार वर्षा तो यूं भी टाइमपास प्रेमियों की बिचौलिया सखी होती हैं। प्रेमियों को दो-चार घंटे बिछुड़ने नहीं देती। सिंगल छाते में दोनों एडजस्ट करते हैं। मन में ताक-धिना-धिन होने लगती है। दूसरी तरफ सड़क के किनारे टोकरी से सर ढके गरीब मजदूर आसमान देखता हुआ नरेश सक्सेना का कहा याद कर रहा होता है कि- ‘उन खेतों में भी हो रही होगी बारिश जो खेत कभी मेरे थे।’

 
 Image Loadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ- share  स्टोरी का मूल्याकंन
 
 
टिप्पणियाँ
 

लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें

आज का मौसम राशिफल
अपना शहर चुने  
बादलसूर्यादय
सूर्यास्त
नमी
 : 7:14 AM
 : 17:48 PM
 : 70% %
अधिकतम
तापमान
21.9°
.
|
न्यूनतम
तापमान
8.5°