रविवार, 19 मई, 2013 | 10:20 | IST
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‘मैंने अपने कामकाज में कायम रखे उच्च आदर्श’
First Published:06-07-12 05:00 PM
Last Updated:06-07-12 05:39 PM
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ को ई-मेल पर दिए इंटरव्यू में देश के आर्थिक और राजनीतिक हालात पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आर्थिक विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी तो यह भी बताया कि सरकार के सामने क्या-क्या चुनौतियां पेश आ रही हैं। यहां पेश है यह पूरा इंटरव्यू

देश के मौजूदा आर्थिक हालात को आप किस तरह से देखते हैं?
हम निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण आर्थिक स्थिति के दौरे से गुजर रहे हैं। ये हालात रातो-रात पैदा नहीं हुए हैं। काफी कुछ वैश्विक आर्थिक स्थिति की वजह से हुआ है। दुनिया में बिगड़े आर्थिक हालात के पीछे यूरोजोन एक बड़ा कारण रहा है। भारत के लिए यूरोप निर्यात का एक अहम क्षेत्र है और वहां की स्थिति निश्चित तौर पर हमें प्रभावित करती है। तेल के बढ़ते दाम का भी भारत पर असर हुआ है। हम तेल की अपनी कुल खपत का 80 फीसदी आयात करते हैं। इससे हमारा व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा कुछ घरेलू कारणों से भी हमारी आर्थिक विकास दर प्रभावित हुई है।

इस साल देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए पांच मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
भारत की अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत है। पिछले आठ वर्षो से हमने काफी कुछ हासिल किया है। हमने  निकट भविष्य में कुछ उपायों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बनाई है।

-कर प्रणाली को पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाएगा, ताकि पूरी दुनिया जान सके कि भारत कर मामले में सभी के साथ सही और तर्कसंगत तरीके अपनाता है।

-विशेष उपायों से आर्थिक घाटे को नियंत्रित किया जाएगा और इस पर संबंधित अधिकारियों ने काम भी शुरू कर दिया है। इस मुद्दे पर हम सरकार में भी आमसहमति लेंगे।

-म्युचुअल फंड और बीमा उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के विशेष प्रयास किए जाएंगे। देश में सोने में निवेश कर इसकी सेविंग का दायरा बढ़ रहा है। हमें कुछ नए रास्ते खोजने होंगे, ताकि फलदायक निवेश बढ़े और रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा हों।

-देश को बिजनेस फ्रैंडली बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। निवेश की जो योजनाएं पाइपलाइन में हैं, उन्हें क्लीयरेंस देने को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि निवेशक यह महसूस कर सकें कि भारत का मतलब है बिजनेस। इसके अलावा बिजनेस के प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी की प्रक्रिया को भी आसान बनाया जाएगा।

-हमने खासतौर से सार्वजनिक निजी साङोदारी (पीपीपी) के तहत ढांचागत विकास को बढ़ावा दिया है। सड़क, रेलवे बंदरगाह और नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में निवेश के लिए नए द्वार खोले गए हैं। इन क्षेत्रों में हमारे हाथ मजबूत करने के लिए दुनिया के दरवाजे खुले हैं जिससे हमारी अर्थव्यवस्था औरमजबूत हो सकेगी।

आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव सरकार की नीतियों को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं?
पिछले बीस वर्षों में जिस तरह से देश विकास के पथ पर आगे बढ़ा है, मैं उससे काफी हद तक संतुष्ट हूं। इस बीच कई सरकारें आईं, मगर एक बार जो नीतियां बनाई गईं, उन पर अमल होता रहा है। मेरी संतुष्टि का यह भी एक बड़ा कारण है।

-फिर भी कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर विचार किया जाना चाहिए। सबसे पहले हमें मुक्त अर्थव्यवस्था के प्रबंधन के लिए स्थायी तौर पर संस्थागत व्यवस्था करनी होगी।

-दूसरा, आम लोगों को अभी तक मुक्त अर्थव्यवस्था की पूरी तरह जानकारी नहीं है। ज्यादातर लोग आज भी बाजार को अपने हित से जोड़कर नहीं देख पाते हैं। पड़ोसी देश चीन में स्थिति इससे अलग है, वहां लोग मुक्त अर्थव्यवस्था को भली-भांति जानते हैं और वहां पर इसके लिए जरूरी संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा रही है। हमें भी इस बात को समझना होगा कि मुक्त अर्थव्यवस्था जनकल्याण की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

-देश में योजनाओं का आवंटन और इन्हें लागू करने की प्रक्रिया भी बड़ा मुद्दा है। हमने लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। मगर, मुझे इस बात की चिंता है कि मुक्त अर्थव्यवस्था का लाभ चंद लोगों तक सीमित रह गया है। देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक विकास के लाभ से वंचित रह जाता है। हमें इसमें जल्द सुधार लाना होगा।

वोडाफोन कंपनी से जुड़े कर मामले से विदेशी निवेशकों में कई तरह की धारणाएं पैदा हुई हैं। आप उन्हें किस तरह संतुष्ट करने का इरादा रखते हैं?
कर मामलों से निवेशकों का सीधा संबंध होता है। वित्त मंत्रलय पिछले तीन माह से इस मसले पर स्थिति स्पष्ट कर रहा है। निवेशकों को विश्वास में लेने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, बाजार में पूंजी प्रवाह कम हुआ है, जिससे आर्थिक विकास भी प्रभावित हुआ है। मगर, इसका यह मतलब नहीं है कि हालात बहुत बिगड़ गए हैं। कोका कोला कंपनी ने कुछ दिन पहले भारत में पांच बिलियन डॉलर निवेश का ऐलान किया है। आईकेईए भी भारत में बड़े निवेश की योजना बना रही है। उपभोक्ताओं की खरीदारी बढ़ रही है। ब्याज दरों का उपभोक्ता पर कोई प्रभाव नहीं है।

सरकार की नीतियों के पंगु हो जाने की बात भी कही जा रही है। आपने ‘गठबंधन की मजबूरी’ की बात कही, क्या यही इसकी मुख्य वजह है? क्या आप देश की जनता के साथ संवाद बढ़ाने का इरादा रखते हैं?
मुझे लगता है कि यह अवधारणा से जुड़ा मसला है। यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में हमने बाध्यकारी परिस्थितियों में काम किया। फिर भी उस समय हमने विकास को गति देने के लिए काफी कुछ किया है। हमने आम आदमी की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया, जो एनडीए सरकार के कार्यकाल में ‘शाइनिंग इंडिया’ के पीछे चला गया था। यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि आम लोगों से जुड़ी योजनाएं रही हैं। इससे विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं। हमने यह सब विभिन्न दलों के सहयोग से किया है। मगर आज परिस्थितियां बदल गई हैं। हालांकि, ऐसा नहीं हैं कि तीन वर्षो में विभिन्न दलों का नेतृत्व बदल गया है, मगर लोगों की सोच और उम्मीदों में भी बदलाव आया है।

एक वित्त मंत्री के तौर पर आपकी नजर में लंबित सुधारों जैसे पेंशन, बीमा, वस्तु एवं सेवाकर और प्रत्यक्ष कर को लागू करने के लिए क्या रोडमैप है?
-सबसे पहले मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि कानून आर्थिक विकास में कोई अडं़गा नहीं है। अर्थव्यवस्था के सुधार की दिशा में कदम उठाने के लिए कानूनी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती है।

-यह ज्यादा जरूरी है कि सरकार की नीतियों में राजनीतिक दलों की आमराय कायम की जाए। विचारों में मतभेद होना लाजिमी है। इसलिए लोकतंत्र में आमराय बनाना लंबे समय तक आर्थिक सफलता का सूत्र है और हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

क्या हम आशा कर सकते हैं कि कुछ युवा मंत्रियों को कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा मिलेगा?
आपको इस सवाल के जवाब के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।

आप पाकिस्तान कब जा रहे हैं? इस यात्रा के लिए आदर्श स्थिति क्या होनी चाहिए?
मैं इस यात्रा को सकारात्मक रूप में देख रहा हूं। हालांकि यात्रा के लिए अभी कोई तिथि तय नहीं है। आप जानते हैं कि ऐसी यात्राओं का उद्देश्य उपयुक्त निष्कर्ष वाला होना चाहिए।

अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार बढ़ने के आरोपों को किस तरह लेते हैं?
भारत के इतिहास में अब से पहले सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने, सरकार को लोगों के प्रति जवाबदेह बनाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में इतने कम समय में इतने कदम कभी नहीं उठाए गए। सूचना का अधिकार कानून लाना इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है जिसके लिए आने वाली पीढ़िया कांग्रेस पार्टी और इसकी अध्यक्ष को हमेशा याद रखेंगी। वास्तव में इस एक कानून ने किसी अन्य कदम की तुलना में जवाबदेही बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में ज्यादा अहम भूमिका निभाई है। इसकी मदद से काफी मुद्दे प्रकाश में आए, नहीं तो वे दबे पड़े थे।

हम पब्लिक प्रोक्योरमेंट बिल लाए, जिसकी मदद से भ्रष्टाचार की मूल जड़ पर वार किया गया। इसके साथ ही व्हिसल ब्लोअर, लोकपाल और न्यायिक जवाबदेही समेत कई अन्य बिल लाए गए, ताकि समाज को भ्रष्टाचार से मुक्त किया जा सके।
व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बीच मैं अपनी अखंडता पर कायम रहा। जहां तक मीडिया की आलोचना की बात है यह उनका काम है और मैं प्रभावपूर्ण ढंग से इस काम को किए जाने पर मीडिया को बधाई देता हूं। मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि वह अपनी रिपोर्ट को जारी करने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि उसमें दोनों पक्षों की बात जरूर सामने आए।

वो एक चीज क्या है जिसके लिए आप चाहेंगे कि आपको याद किया जाए?
मैंने अपने जीवनकाल में भारत को रहने और काम के लिए एक आदर्श स्थान बनाने की कोशिश की है। इसके लिए मैंने वित्तमंत्री के रूप में भी काम किया। प्रधानमंत्री के तौर पर मैंने वहीं काम किए लेकिन इस बार मेरा दायरा बढ़ा हुआ है। मैंने भारत को शांतिपरक, सौहार्दपूर्ण, सुरक्षित व उन्नत देश बनाने की कोशिश की, जहां हर भारतीय अपनी बेहतर जीवन बिता सके। मैं इसे इतिहास पर छोड़ता हूं कि मैं सफल रहा या नहीं।

 
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