चौटाला को मिली छह हफ्ते की जमानत
IPL स्पॉट फिक्सिंग मामले में विंदू दारा सिंह गिरफ्तार चेन्नई में सट्टेबाजी मामले में प्रमुख आरोपी गिरफ्तार आइगेट ने यौन उत्पीड़न केस में CEO को किया बर्खास्त इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की राजेश तलवार की याचिका भारत-चीन सीमा संबंधी मुद्दों का समाधान खोजने में सक्षम IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
सवाल शौचालय का नहीं, पिनपिनाने वालों का है
गोपाल चतुर्वेदी
First Published:10-06-12 08:32 PM
पिनपिनाना मुख्य राष्ट्रीय रोग है। इसके लाइलाज मरीज दाल, अनाज, सब्जी, दूध, तेल, गैस, पेट्रोल वगैरह की कीमतों पर दनादन पिनपिनाते रहते हैं। उन्हें बस कोई न कोई बहाना चाहिए। अब भला शौच की क्रिया या शौचालय कोई पिनपिनाने का मुद्दा है? पर नहीं। किसी कमअक्ल ने पता किया कि योजना आयोग ने 35 लाख रुपये दो टॉयलेट पर लुटाए हैं। खबर आई नहीं कि मुल्क में पिनपिनाहट शुरू।
योजना आयोग आकाओं की संस्था है। उसमें सरकार के चहेते अवकाश-प्राप्त अफसर, नामचीन अर्थशास्त्री, खैरख्वाह राजनेता और विशेषज्ञ विराजते हैं। सब सरकार के सलाहकार हैं। सूबों को उन्हीं के हक का पैसा खैरात की तरह आबंटित करना इनका अधिकार है। राज्यों के मुख्यमंत्री इन्हें सलाम बजाते हैं। राज्यों की योजनाओं के ये सरकारी ठेकेदार जो ठहरे। वैसे इनकी धारदार कुल्हाड़ी के बावजूद देश ने थोड़ी-बहुत तरक्की की है। लेकिन सही बात यही है कि अजीज और नाकारा नौकरशाहों की जन-फंडिया सेवा-सुविधा हेतु इसका गठन हुआ है।
यहां विदेश के अति महत्वपूर्ण व्यक्ति भी पधारते हैं। गंभीर विचार-विमर्श होता है। ऐसे लोग फारिग होने को देश के गरीबों की तरह क्या झाड़ी, पोखर या रेल की पटरी खोजें? क्या उन्हें प्लेटफॉर्म या एयरपोर्ट जैसी जन-सुविधाओं के नरक में भेजा जाए? वे कोई अल्लू-बल्लू तो हैं नहीं, वे मुल्क के शाही मेहमान हैं। उनके लिए शाही टॉयलेट होना ही चाहिए। 35 लाख रुपये की मामूली रकम पर इतनी चिल्ल-पों शर्मनाक बात है। गनीमत है कि करोड़ों नहीं लगे।
योजना आयोग की हसरत है कि देश पेट के सपनों से ऊपर उठे। बड़े सपने देखे। शानदार शौचालयों की कल्पना करे। जीवन-स्तर के बेहतर साधन तभी तो जुटेंगे। टॉयलेट तरक्की का प्रतीक है। योजना आयोग के शौचालय अज्ञानियों को प्रेरणा देने को बनवाए गए हैं। घरेलू और बाहरी सैलानी, तीन मूर्ति, सफदरगंज, राजघाट वगैरह की परिक्रमा करते हैं। हमारे खयाल से उन्हें इस आदर्श टॉयलेट के दर्शन भी करवाए जाएं। विकसित योजना आयोग विकसित देश का पर्याय है। आठ-दस रुपये का टिकट लगा दें, तो खर्चे की भरपाई भी हो जाएगी।
30

टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(1)
पुरे ३५ लाख के टोइलेट हैं की उसमे भी ३० लाख विचार विमर्श करने में डकार
By Ujjwal Kumar Jha (11th-June-2012 04:28:PM)
स्थानीय ख़बरें
एन सी आर
पंजाब
उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें
आज का मौसम राशिफल



ई-मेल
