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कम नहीं हो रही चीन और जापान की रंजिश
गौरीशंकर राजहंस, पूर्व सांसद और पूर्व राजदूत
First Published:03-05-12 10:11 PM
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चीन और जापान की दुश्मनी बार-बार सतह पर आ रही है। ताजा विवाद चीन और जापान के बीच एक द्वीप को लेकर है। इस द्वीप पर दोनों ही अपना दावा जता रहे हैं। साउथ चाईना सी का विवाद तो चीन, जापान और वियतनाम के बीच चल ही रहा है। जापान की चिंता इन दिनों इसलिए बढ़ गई है कि उसका विरोध करने के लिए चीन और उत्तर कोरिया ने हाथ मिला लिए हैं। हालांकि यह माना जाता है कि किसी अप्रिय स्थिति में जापान की मदद करने के लिए  अमेरिका पहुंच सकता है। परंतु जापान को यह भी पता है कि अमेरिका की आर्थिक हालत इन दिनों बहुत अच्छी नहीं है और यदि चीन तथा उत्तर कोरिया ने खुलकर दुश्मनी शुरू कर दी, तो शायद अमेरिका उसकी बहुत मदद नहीं कर पाएगा। अत: हर हालत में जापान को रक्षा के मामलों में अपने पैरों पर खड़े होना होगा। इसी को ध्यान में रखकर जापान ने पड़ोसी देशों से कई सुरक्षा समझौते भी किए हैं।

वैसे चीन और जापान की दुश्मनी बहुत पुरानी है। द्वितीय विश्व युद्ध में एक लंबे अरसे तक जापान ने चीन के बहुत बड़े भू-भाग को अपने कब्जे में रखा था। जब अमेरिका ने जापान पर एटम बम गिराया और उसे आत्मसमर्पण करना पड़ा, तब जापान ने चीन के इस हिस्से पर अपने अधिकार को छोड़ दिया था। चीन अब भी उस दौर को भूला नहीं है। समय बदल गया है और अब चीन हर लिहाज से जापान पर बीस ही पड़ता है।

पिछले साल जब बाली में आसियान की बैठक हुई थी, तब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रतिबद्ध शब्दों में कहा था कि एशिया और प्रशांत महासागर के क्षेत्र से अमेरिका का पुराना संबंध है और अमेरिका में चाहे कोई भी आर्थिक संकट आ जाए, वह इस क्षेत्र के अपने मित्र देशों को छोड़कर नहीं भागेगा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की संसद में उन्होंने कहा कि भले ही अमेरिका में वित्तीय संकट है और वहां बजट में कटौती हो रही है। लेकिन इस कटौती के कारण अमेरिका एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों को छोड़कर अलग नहीं होगा। जापान के लिए शायद इतना ही काफी नहीं है, इसीलिए उसने समुद्री सुरक्षा के लिए भारत, सिंगापुर, वियतनाम और फिलीपींस से समझौता किया है।

चीन ने जापान को संयुक्त नौसैनिक अभ्यास के खिलाफ चेतावनी भी दी है। इस तरह के समझौते दरअसल अमेरिका की ही रणनीति का एक हिस्सा हैं। वह जानता है कि ये सारे देश अलग-अलग चीन का मुकाबला नहीं कर सकते, लेकिन एकजुट होकर वे चीन के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। इस बीच वियतनाम साउथ चाईना सी क्षेत्र की एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है। भारत और जापान आर्थिक विकास में उसकी हर मुमकिन मदद कर रहे हैं। चीन उसे भी रोकना चाहता है, इसीलिए पेट्रोलियम खनन में वियतनाम के तटवर्ती क्षेत्र में जाने वाले भारतीय जहाजों को वह अक्सर तंग करता रहता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 
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