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विदेशी बैंकों में नेताओं के खातों की तो खूब चर्चा रहती है। हम अक्सर अपने नेताओं के स्विस बैंक खातों का पता लगाते ही रहते हैं। यह अलग बात है कि पता लगता नहीं है। नेताओं के बच्चे विदेश में रहते हैं, इसकी जानकारियों भी आती ही रहती हैं कि कौन अमेरिका में सेटल हुआ और कौन सिंगापुर शिफ्ट हो रहा है। पहले तो इस पर भी खूब हंगामे रहते थे कि किस नेता का किस विदेशी एजेंसी से नाता है। कुछ का सीआईए से जोड़ा जाता था तो कुछ का केजीबी से।
पर इधर राजस्थान में मुख्यमंत्री ने नेताओं के विदेशी कनेक्शनों के विवादों में एक विवाद और जोड़ दिया। उन्होंने भाजपा नेता वसुंधरा राजे पर यह आरोप लगा दिया कि उनका इंग्लैंड में मकान है। चुनाव के वक्त नेता लोग अपनी धन-संपत्ति का ब्यौरा दिया करते हैं। उसमें जाहिर है कि बेनामी संपत्ति का ब्यौरा नहीं होता। यह नहीं बताया जाता कि कितने फार्महाऊस हैं और कितने बंगले। मकान-वकान के बारे में बताया भी जाता है तो पुरानी दरों पर उसका मूल्यांकन करके ही बताया जाता है। हमारे यहां अपने को गरीब दिखाने का प्रचलन बहुत रहा है न। इसीलिए तो कई बार पता चलता है कि बड़े-बड़े नेताओं के पास कार ही नहीं है।
वसुंधराजी ने चुनाव के समय इस मकान की जानकारी शायद नहीं दी थी, वरना मुख्यमंत्रीजी भला यह क्यों पूछते कि इंग्लैंड में उनका मकान है या नहीं। एक जमाने में वीपीओ यानी गांव और डाकखाना बताने की राजनीति खूब हुयी थी। अब इसकी जानकारी कोई नहीं रखता। पर अब तो वसुंधराजी मकान का पता भी नहीं बता रही। उनकी पार्टी ने भी कह दिया है कि वे उन्हें यह बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकती कि इंग्लैंड में उनका मकान है या नहीं। और हम लोग हैं कि विदेशी बैंकों के खाते पता करते रहते हैं।

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