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हर किसी को छुट्टी की जरूरत होती है। रोजमर्रा के कामकाज के बोझ और रूटीन की बोरियत से मुक्त होकर तरोताजा होने के लिए छुट्टी मनाने के अलावा और कोई अच्छा तरीका भी नहीं होता। तेल अवीव विश्वविद्यालय में हुए एक अध्ययन का कहना है कि साल में एक बार छुट्टियां मनाने से पुरुषों में दिल का दौरा पड़ने की आशंका 30 फीसदी कम हो जाती है और औरतों के बारे में तो यह आंकड़ा 50 फीसदी तक है।
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि छुट्टियों का मतलब है खुद को ऐसे काम में डुबोना जिसमें आपको आनंद आता हो। जब आप रोजमर्रा के काम में लगे होते हैं तो मन एक खास तरह से चलने लगता है। उसमें मशीन जैसी चाल आ जाती है। जीवन को इस मशीनी चाल से अलग करने का तरीका है छुट्टियां। छुट्टियां आपको फिर से नए उत्साह के साथ काम पर जुट जाने के लिए रिचार्ज कर देती हैं।
लेकिन इस तरह रिचार्ज होने के लिए कितनी छुट्टिया जरूरी हैं। कुछ विशेषज्ञ एक से तीन हफ्ते की छुट्टियों की बात करते हैं। वे मानते हैं कि साल में एक बार छुट्टी ली जा रही है तो जरूरी है कि छुट्टियां इतनी हो कि मन भर जाए। वे ये भी कहते हैं कि छुट्टियां जितनी होंगी रिचार्ज भी उतना ही होगा।
दूसरी तरफ यह मानने वाले भी लोग हैं जो मानते हैं कि छुट्टियों की लंबाई इतनी महत्वपूर्ण नहीं है, जितनी कि उनकी गुणवत्ता। जरूरत से लंबी छुट्टियां भी नीरस हो सकती हैं। इसके मुकाबले अगर आप कम छुट्टियों में ही पूरा आनंद ले लें तो मकसद पूरा हो सकता है। सालाना छुट्टियों के साथ ही यह भी जरूरी है कि आप रोजाना थोड़ी ही देर के लिए अपने रूटीन से छुट्टी लें।

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