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दूर गगन की छांव में

ग्लोबल वार्मिंग के खतरों का कल्पना-लोक लगातार बड़ा होता जा रहा है। धरती के बढ़ते ताप पर जैसे-जैसे वैज्ञानिकों में सहमति बनती जा रही है, यह भी सोचा जाने लगा है कि अगर तापमान हद से ज्यादा बढ़ गया, तो क्या होगा? स्टीफन हॉकिंग जैसे वैज्ञानिक यह चेतावनी दे चुके हैं कि खतरा बढ़ा, तो हो सकता है कि भविष्य में धरती की पूरी आबादी को लेकर किसी दूसरे ग्रह पर बसाना पड़े। संकट के समय में हमें कहां सहारा, बल्कि आश्रय मिल सकता है, यह कोई नहीं जानता। पिछले कुछ साल में दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने हालांकि ऐसे बहुत सारे ग्रह ढूंढ़ निकाले हैं, जहां धरती जैसी ही परिस्थितियां हैं। लेकिन हम अभी पूरी तरह से नहीं जानते कि वहां जीवन बस सकता है या नहीं? यह आसान भी नहीं होगा, क्योंकि यह सिर्फ आवास परिवर्तन भर नहीं है, बल्कि धरती के पूरे जीव-जगत को, उसकी पूरी डायवर्सिटी को एक जगह से दूसरी जगह रोपने का मामला है। एक समस्या यह भी है कि अभी तक जीवन की संभावना वाले जो ग्रह ढूंढे़ भी गए हैं, वे हमारी धरती से काफी दूर हैं।

जैसे अभी पिछले महीने ही नासा के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे तारे की खोज की, जिसके आस-पास धरती के आकार के सात ग्रह चक्कर काट रहे हैं और अभी तक की जानकारी के हिसाब से इन सभी ग्रहों पर वैसी स्थितियां हैं, जिनमें जीवन पनप सकता है। लेकिन समस्या यह है कि ये ग्रह हमसे 39 प्रकाश वर्ष दूर हैं। यानी अगर हम प्रकाश की गति से भी वहां जाएं, तब भी 39 वर्ष में वहां पहुंच पाएंगे। इस गति से यात्रा करना अभी हमारे लिए मुमकिन नहीं है और हमारे रॉकेट जिस अधिकतम गति से आगे बढ़ सकते हैं, उससे तो वहां तक पहुंचने में सदियां लग जाएंगी। जाहिर है कि किसी दूसरे ग्रह पर मानव को बसाने की कल्पना जितनी आसान है, व्यवहार में यह उससे कहीं ज्यादा जटिल मामला है। धरती पर आ गए संकट के समय इसे अपनाना शायद मुमकिन न हो।

अब वैज्ञानिकों ने इसका एक वैकल्पिक तरीका सोचा है। उनका कहना है कि अगले 20 साल के अंदर हम अंतरिक्ष में ऐसी कॉलोनियां बसाने की स्थिति में होंगे, जो किसी ग्रह पर नहीं होंगी, बल्कि अंतरिक्ष में तैरेंगी। कुछ-कुछ उसी तरह से, जैसे मशहूर कार्टून सीरियल जेटसन  में होता है, जहां लोग अंतरिक्ष में तैरती इमारतों में रहते हैं और आकाशीय रास्तों से आया-जाया करते हैं। इन कॉलोनियों के डिजाइन के बारे में भी सोचा जाने लगा है और ऐसी फसलों के बारे में भी, जिन्हें अंतरिक्ष में उगाया जा सके। ब्रिटिश इंटरप्लेनेटरी सोसायटी के विशेषज्ञ ने तो ऐसी कॉलोनियों के ढेर सारे फायदे भी गिना दिए हैं। उनका कहना है कि ऐसी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की उम्र लंबी होगी और उनकी लंबाई भी अब के मुकाबले ज्यादा होगी। जब आपके घर के बाहर न वायु होगी और न वातावरण, तो प्रदूषण का सवाल ही नहीं उठता है, भले ही पड़ोसी कोई उल्का हो। 

एक अन्य सोच यह भी है कि अंतरिक्ष में मानव आबादी के इतने महंगे तामझाम बनाने की बजाय बेहतर यही होगा कि इस धरती को ही बचाने की कोशिश की जाए। इसमें शायद इतना खर्च भी नहीं होगा। धरती के बढ़ते तापमान को रोका जा सकता है। इसे लेकर वैज्ञानिक एकराय नहीं हैं। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती को बचाना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है, लेकिन किसी कारण से हम यह नहीं कर सके, तो वैकल्पिक रास्तों की अभी से तलाश करने में कोई बुराई नहीं। अभी हम ठीक से कुछ नहीं जानते कि गरम धरती का जीवन कैसा होगा और आसमान में उड़ती कॉलोनियां हमें कौन सी जीवनशैली देंगी? कुछ भी हो, बुरे भविष्य के लिए अच्छी उम्मीदें नए रास्ते निकालने का आश्वासन तो देती ही हैं।  

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  • Web Title:danger of global warming