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मैनेजमेंट की डिग्री और हक की बात
प्रदीप सौरभ
First Published:06-02-10 10:11 PM
Last Updated:06-02-10 10:11 PM
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सलिल शेट्टी गरीबी से लड़ते हैं। भूख से लड़ते हैं। बीमारी से जूझते हैं। अनपढ़ता से भिड़ते हैं। दुनिया के पचास से अधिक गरीब देशों में इन बीमारियों के खिलाफ उन्होंने अभियान चलाया है। दुनिया को बेहतर बनाने के संयुक्त राष्ट्र के मिलेनियम कैंपेन के वे प्रमुख रहे हैं। अभियान के खिलाफ बोलने और उसे प्रभावित करने वालों के खिलाफ वे एंग्री यंगमैन की तरह उनसे भिड़ते रहे हैं।

उनके भय, भूख और गरीबी अभियान को जब यह कह कर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की कि ग्लोबल वार्मिग और खाद्यान्न संकट से उनका अभियान प्रभावित हो सकता है, तो वे उन पर बिफर गये। उन्होंने कहा की दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे सारी बाधाएं खत्म हो जाती हैं। उन्होंने लगभग पलटवार करते हुये कहा था कि दुनिया की सरकारें विकास के नाम पर सर्विस सैक्टर और औद्योगीकरण को तरजीह देती है और गरीबी और भूख से जुड़े अभियानों से किनारा कर लेती हैं।

अब सलिल शेट्टी के पास नई जिम्मेदारी आई है। लंदन में 1961 में स्थापित मानवाधिकार के लिये काम करने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का उन्हें महासचिव चुना गया है। शेट्टी जून 2010 में इरेने खान का स्थान लेंगे। एमनेस्टी इंटरनेशनल के पचास साल के इतिहास में बेंगलूरू निवासी 48 वर्षीय शेट्टी ऐसे पहले भारतीय होंगे, जो इस पद तक पहुंचे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष पीटर पैक द्वारा शेट्टी के नाम की घोषणा के बाद उन्होंने कहा कि मानवाधिकार से संबंधित अभी कई काम करने बाकी है। दुनिया में मानवाधिकारों पर गहरा संकट है।

आईआईएम, अहमदाबाद से एमबीए और लंदन स्कूल ऑफ इकोनामिक्स से सोशल पॉलसी एंड प्लानिंग में एम.ए. की पढ़ाई करने वाले शेट्टी चाहते तो किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर ढेर सारा धन कमा सकते थे, लेकिन उन्होंने सेवा को अपना पेशा बनाया। चट्टानी इरादों और विनम्र स्वभाव वाले शेट्टी 2003 में संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़ने से पहले अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठन एक्शनएड के मुख्य कार्यकारी थे।

एक्शनएड में रहते हुये उन्होंने दक्षिण एशिया और सब-साहरन अफ्रीका में अनेक फील्ड कार्यक्रमों का संचालन किया। इसके बाद यूरोप और अमेरिका में सेवा के लिये फंड रेसिंग का काम किया। शेट्टी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेन्ट स्टडीज ‘ससेक्स’, ओवरसीस डेवलपमेन्ट इंस्टीट्यूट लंदन, एडवाइजरी काउन्सिल ऑफ अमेरिकन इंडियन फाउन्डेशन, न्यूयार्क, ग्लोबल लीडरशिप काउन्सिल आफ दि टेक्नोलाजी म्यूजियम ऑफ इनोवेशन इन सेनजोस, कैलीफोर्निया से भी जुड़े हैं।

यह बात दीगर है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल दुनिया में मानवाधिकार हनन के मसलों को उठाने वाली चैंपियन संस्था है। लेकिन भारत में उसके कार्यकलापों को लेकर काफी विवाद रहा है। खासतौर से जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित इलाकों में। भारत में माना जाता है कि यह संस्था मानवाधिकार हनन की आड़ में आतंकियों और नक्सलियों का पक्ष लेने वालों का समर्थन करती है। अतीत में एमनेस्टी इंटरनेशनल की टीम के जम्मू-कश्मीर प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अब जब शेट्टी के रूप में एक भारतीय इस संस्था का मुखिया बन गया है, तो उसे अपने देश में एमनेस्टी इंटरनेशनल की साख के लिये देश की सरकार से जूझना होगा।  

 

 
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